Pawan Jury BhilwaraRj
समस्या ये है कि वोट किस को दिया जाए। ज्यादातर उम्मीदवार या तो गुंडे हैं, दागी है या आजमाए हुए है। मतलब भरोसेमंद नहीं है।
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ऐसे उम्मीदवार को वोट करे जिसने समाधान के लिए लिखित कानूनी ड्राफ्ट प्रस्तावित किये हो। यदि ऐसा कोई उम्मीदवार मैदान में नहीं है तो आप खुद चुनाव लड़े तथा कानून ड्राफ्ट के पर्चे छपवाकर अपने क्षेत्र में बाँट दे। यदि आप चुनाव लड़ने की स्थिति में नहीं है तो किसी अन्य कार्यकर्ता को चुनाव लड़ने के लिए प्रेरित करे। इससे नागरिको तक यह जानकारी पहुंचेगी कि अन्य उम्मीदवार सिर्फ समस्या पर बात करके वोट मांग रहे है, लेकिन समाधान नहीं दे रहे है। इससे अन्य उम्मीदवारों पर भी क़ानून ड्राफ्ट देने का दबाव बनेगा।
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राजनैतिक पार्टियों का एकाधिकार इसीलिए बना हुआ है क्योंकि वे इस बात को समझते है कि ज्यादातर कार्यकर्ता चुनावी मैदान में उतरने से कतराते है। अतः उन्हें चुनौती नहीं मिल पाती। चुनाव लड़ने का उदेश्य जीतना नहीं होना चाहिए। इसी आदर्श को सामने रखकर चुनाव लड़ना चाहिए कि हम नागरिको को क़ानून ड्राफ्ट्स की जानकारी देने के लिए चुनाव लड़ रहे है। एक बार यदि कोई व्यक्ति जीतने के दबाव से मुक्त हो जाता है तो वह बहुत आसानी से चुनाव लड़ सकता है।
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हमारे द्वारा प्रस्तावित राईट टू रिकॉल प्रक्रियाएं आने से पार्टी तंत्र टूट जाएगा और स्वतंत्र/योग्य उम्मीदवारों के चुनावो में जीतना आसान हो जाएगा। अधिक विवरण के लिए कृपया हमारे द्वारा प्रस्तावित राईट टू रिकॉल का ड्राफ्ट पढ़े।
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"क्यों चुनावो में बड़ी पार्टियों के उम्मीदवारों को ही अधिक वोट मिलते है और योग्य होने के बावजूद स्वतंत्र उम्मीदवार जीत नहीं पाते" -- इस विषय पर विस्तृत विवरण मैं फिर कभी रखूँगा।
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