Pawan Jury BhilwaraRj

अमेरिकी सरकार और/या गूगल भारत के उन सभी फ़ोन्स को सिर्फ एक बटन दबा कर बंद कर सकते है जिनमे एंड्राइड एप्लिकेशन है !!! और सोनिया-मोदी-केजरीवाल भारत में एंड्राइड बेस कैश लेस इकोनॉमी लागू करने पर आमादा है !!!
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एक स्वस्थ मस्तिष्क का व्यक्ति हमेशा पतलून पहनने से पहले कच्छा पहनेगा। सिर्फ दो ही व्यक्ति पेंट पहनने के बाद कच्छा पहनते है --- सुपरमैन और महामूर्ख !!!
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चूंकि इसके कई लाभ है, अत: हम (राईट टू रिकॉल पार्टी) हमेशा से ही कैशलेस या लेसकैश सोसाइटी के समर्थक रहे है। लेकिन सिर्फ तब जबकि भारत के सभी चिप्स/डिवाइस/सोफ्टवेयर/सर्वर/एप्स/संचार नेटवर्क आदि 100% 'मेड इन इंडिया, मेड बाय इंडियन' हो।
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यहाँ तक कि हमने नकद व्यवहार पर 1% बैंक चार्ज लगाने का भी प्रस्ताव किया है। यह शुल्क देय आयकर में से घटा दिया जाएगा। यह शुल्क उन व्यवसाइयो को भी देना होगा जो अपने खातो में नकद व्यवहार दिखाते है, तथा यह शुल्क भी देय आयकर में से घटा दिया जाएगा। यदि वे चाहे तो शुल्क अपने उन ग्राहकों से वसूल सकते है जो उनसे नकद व्यवहार कर रहे है, या इसका बोझ स्वयं उठा सकते है।
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इसी तरह से लेन देन की लागत -- चाहे यह नकद हो, चेक द्वारा हो या इलेक्ट्रोनिक हो -- अंतिम उपभोक्ता पर हस्तांतरित की जानी चाहिए, तथा सरकार को सिर्फ स्थायी लागत ही वहन करना चाहिए। जब लेनदेन की लागत उपभोक्ता पर हस्तांतरित की जाएगी तो उपभोक्ता स्वत: ही कम महंगे और सरल तरीके का इस्तेमाल करने लगेंगे।
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लेकिन सोनिया-मोदी-केजरीवाल भारत में ऐसी व्यवस्था चाहते है जो पूरी तरह से विदेशी कंपनियों पर टिकीहो, तथा जब उनकी मर्जी हो वे इसे बन्द कर सके !!! और फिर यही लोग हमें राष्ट्रीय सुरक्षा पर उपदेश भी देते है !! बताइये !
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अगर नकली नोट समस्या है तो इसकी जगह ऐसी व्यवस्था लागू करना जिसका पूरा नियंत्रण अमेरिकी सरकार के हाथो में हो, इस समस्या को १० हजार गुना बढ़ा देगा। और सोनिया-मोदी-केजरीवाल व उनके अंध भगत यह भी चाहते है कि, हम उनकी इस दलील पर विश्वास कर ले कि -- "चाहे अमेरिका के पास हमारे पेमेंट सिस्टम को बंद करने की ताकत क्यों न हो, वे न तो कभी इसे बंद करेंगे और न ही कभी भारत सरकार को ब्लैकमेल करने के लिए ऐसी धमकी देंगे"। मतलब इनका मानना है कि खुद इनके अलावा पूरा देश घास पात ही खा रहा है !
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नोटबंदी का कैश लेस या लेस कैश से कोई लेना देना नहीं है। कैश लेस सिस्टम लागू करने के लिए ऐसे कदम उठाने की जरूरत है जिससे कैश लेस ट्रांजेक्शन में धोखधड़ी की संभावनाए कम हो, और अनिवार्य रूप से ये व्यवस्था विदेशी कंपनियों के हाथो में नहीं होनी चाहिए। साथ ही नकदी के लेनदेन पर कुछ शुल्क लागू किया जाए ताकि नकदी की लागत को इससे वसूला जा सके।
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कुल मिलाकर अब अमेरिका को भारत को धमकाने के लिए ज्यादा कुछ नहीं करना है, वे सिर्फ एक बटन दबाकर ही भारत की अर्थव्यवस्था को ठप कर सकते है। इस तरह से नोटबन्दी से भारत अमेरिका पर और भी निर्भर हो जायेगा।
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