Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate
Pawan Jury BhilwaraRj:
ओह माय गॉड, पीके, सिंघम-2, धर्म संकट में, आदि सभी फिल्मे एक ही प्रकार का सन्देश देने के लिए रची गयी है --- न तो मंदिरो में जाना चाहिए और न ही उन्हें दान देना चाहिए। इन सभी फिल्मो में साधू संतो को चोर, उचक्के और व्यभिचारी दिखाया जाता है और मंदिरो को लूट व भ्रष्टाचार का अड्डा।
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चूंकि भारत में मंदिरो के प्रशासन पर श्रद्धालुओ का कोई नियंत्रण नहीं है अतः मंदिरो/मठो आदि का प्रबन्धन बिगड़ा हुआ है। इस कारण से मंदिरो के पुजारी/ट्रस्टी/मठाधीश आदि दान से प्राप्त संपत्ति का अपनी इच्छा से इस्तेमाल करते है। लेकिन उपाय यह नहीं है कि हम मंदिरो और धर्म का बहिष्कार करना शुरू करें। समाधान के लिए हमें उन कानूनों की मांग करनी चाहिए जिससे हिन्दू धर्म के प्रशासन को मजबूत और कुशल बनाया जा सके।
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हमने इसके इसके लिए जो कानूनी ड्राफ्ट प्रस्तावित किये है, उनके गेजेट में प्रकाशित होने से हिन्दू धर्म के प्रशासन को सिक्ख धर्म की तरह मजबूत बनाया जा सकता है। प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट दिए गए लिंक पर देखें जा सकते है :
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राष्ट्रीय हिन्दू देवालय प्रबंधक ट्रस्ट के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
https://web.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/570764579768407
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