Pawan Jury BhilwaraRj
मॉरीशस रूट बंद करने का दावा करके अरुण जेटली कार्यकर्ताओ को भ्रमित कर रहे है।
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हाल ही में अरुण जेटली ने एक पेड निजी चेनल को दिए साक्षात्कार में यह दावा किया कि, "हमने काले धन को रोकने के लिए मॉरीशस व साइप्रस रूट को बंद कर दिया है, तथा सिंगापुर रूट को भी बंद करने के लिए हमने सिंगापुर को चिट्ठी लिख दी है"।
अरुण जेटली झूठे है, क्योंकि ---
1) मोरिशस रूट के अलावा भी कई रूट है जिनके माध्यम से कर मुक्त निवेश आता रहेगा और भारत को डॉलर की चपत लगती रहेगी,
2) मोरिशस रूट से आने वाले P-notes को अभी भी कर मुक्त रखा गया है।
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क्या है मॉरीशस रूट ?
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भारत और मॉरीशस के बीच समझौता है कि, मॉरीशस से निवेश करने वाली कंपनियों को भारत में कोई केपिटल गेंस टेक्स नहीं चुकाने होंगे। समझौता कहता है कि यदि मॉरीशस की कोई कंपनी भारत में निवेश करती है तो यह कंपनी की इच्छा है कि वह कमाए गए लाभ पर किस देश में टेक्स चुकाए। वे चाहे तो भारत में कर चुका सकते है या मॉरीशस में चुका सकते है। भारत में शार्ट टर्म केपिटल गेन्स टेक्स के रूप में कंपनियों को 40% तक चुकाने पड़ सकते है अतः मॉरीशस से निवेश करने वाली कंपनियां टेक्स मॉरीशस में ही चुकाती है। क्योंकि मॉरीशस में केपिटल गेन्स टेक्स शून्य है। और ये कम्पनियां भारत में जो लाभ रूपये में कमाती है उसके हमें डॉलर चुकाने होते है, वे अलग से।
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भारत ने ऐसे समझौते सिर्फ मॉरीशस के साथ ही नहीं बल्कि सिंगापुर, फिजी, साइप्रस, और नीदरलेंड के साथ भी करके रखे है।
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असल में इन सभी संधियों को मॉरीशस रुट के अंतर्गत लिया जाता है। मतलब जब कार्यकर्ता कहते है कि मोरिशस रूट बंद करो, तो इसका आशय यह होता है कि, वे सभी रूट बंद करो जिनके साथ भारत ने मॉरीशस जैसा समझौता किया हुआ है। मॉरीशस से कार्यकर्ताओ की कोई निजी दुश्मनी नहीं है। जो नुक्सान भारत को मॉरीशस दे रहा है वही नुकसान अन्य वे देश भी दे रहे है, जिनके साथ ऐसे समझौते है। लेकिन मॉरीशस रुट ज्यादा लोकप्रिय हुआ, अतः कार्यकर्ता इन सभी रूट्स के लिए "मॉरीशस रूट" शब्द का प्रतीकात्मक प्रयोग करने लगे।
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भारत में सन 2000 से 2015 तक कुल 280 बिलियन डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानि FDI आया है, जिसमे से 94 बिलियन डॉलर यानि 33% अकेले मोरिशस से निवेश हुआ है। सिंगापुर से 43 बिलियन डॉलर, नीदरलेंड से 16 बिलियन डॉलर जबकि इसी अवधि में ब्रिटेन, अमेरिका और जापान जैसे विकसित देशो से क्रमशः सिर्फ 22, 17 और 19 बिलियन डॉलर का निवेश हुआ है।
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मोरिशस और सिंगापुर रूट
मोदी साहेब जब पिछले वर्ष मोरिशस गए थे तो घोषणा कर आये थे कि, मोरिशस रूट को संशोधित करने की जरुरत है। नतीजे में मोरिशस से होने वाले निवेश में गिरावट आयी जबकि सिंगापुर से होने वाले निवेश में अचानक उछाल आ गया। पिछले 9 महीने में ही सिंगापुर से 10 बिलियन का विदेशी निवेश आ चुका है, जबकि मोरिशस से इस अवधि में 6 बिलियन का निवेश हुआ।
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मोदी साहेब ने मोरिशस और साइप्रस रूट को संशोधित कर दिया है, लेकिन सिंगापुर रूट अभी तक चालू है। मतलब मोरिशस से आने वाला निवेश अब सिंगापुर से होकर आएगा।
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फिजी रूट
मोरिशस रूट बंद हो इसके पहले ही भारत ने 2014 में विदेशियों को टेक्स मुक्त निवेश करने के लिए एक और रूट खोल दिया था। चिदंबरम ने फरवरी-2014 में फिजी के साथ भी मोरिशस जैसा ही समझौता कर डाला। जब नवम्बर 2014 में मोदी साहेब ने फिजी का दौरा किया तो इस रूट को जारी रखने की सहमती जताई। मतलब सिंगापुर रूट यदि बंद हो भी जाता है तो विदेशी निवेश फिजी से आता रहेगा।
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नीदरलेंड रूट
नीदरलेंड भी है। नीदरलेंड के साथ भारत की संधि है कि, यदि नीदरलेंड की कोई कम्पनी भारत में निवेश करती है और यदि ऐसा निवेश अमुक भारतीय कम्पनी के कुल इक्विटी के 10% से कम है तो नीदरलेंड की कम्पनी को इन इक्विटी की बिक्री से होने वाले पूंजीगत लाभ पर कोई कर नही चुकाने होंगे। चाहे ऐसे बिक्री किसी भारतीय को की गयी हो या गैर भारतीय को। इतना ही नहीं, यदि नीदरलेंड की कम्पनी के पास भारतीय कम्पनी की कुल इक्विटी का 10% से अधिक शेयर है तब भी उसे पूंजीगत लाभ पर कोई कर नही चुकाने होंगे, यदि वह इन शेयर्स की बिक्री किसी गैर भारतीय कम्पनी को करे।
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कोई भी सामान्य समझ का व्यक्ति यह बता सकता है कि जब तक किले का एक भी द्वार खुला रहेगा, दुश्मन उसमे से प्रवेश कर जाएगा। अत: देश की अर्थवयवस्था को नुकसान पहुँचाने वाले ऐसे सभी रूट्स को समाप्त किया जाना चाहिए। किसी एक रूट को समाप्त करने और बदले में नया रूट खोल देने से समस्या जस की तस रहेगी। लेकिन मोदी साहेब को ऐसा नहीं लगता। उनका मानना है कि, यदि किसी मटके में 5 छेद हो, और सब मे से पानी रिस रहा हो तो, किसी एक छेद को बंद करके फिर से एक नया छेद बना देना चाहिए !! इससे मटके के सभी सूराखो में से पानी गिरना बंद हो जाता है।
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नोट बंदी और मोरिशस रूट
मोदी साहेब ने मोरिशस रूट को संशोधित तो कर दिया है किन्तु इसमें यह प्रावधान रखा है कि यह संशोधन 31 मार्च 2017 से लागू पड़ेगा और अप्रेल 2017 से अप्रेल 2019 तक निवेश करने वालो को भारत में लागू टेक्स दरो में 50% का डिस्काउंट मिलेगा। यानि उन्हें सिर्फ 7.5% की दर से ही कर चुकाने होंगे। नोट बंदी के कारण जमीन की कीमते गिरी जा रही है। जनवरी-2017 में निवेशक मोरिशस रूट के माध्यम से निवेश करके बड़े पैमाने पर सस्ती दरों में जमीने खरीद सकेंगे। चूंकि मोदी साहेब ने काले धन को जनरेट करने वाले स्त्रोतों को रोकने के लिए आवश्यक कानूनों को लागू करने से इंकार कर दिया है, अत: जल्दी ही काला धन नकदी के रूप में फिर से बाजार में आ जाएगा, जिससे जनवरी 2018 आते आते फिर से जमीनों की कीमतें बढ़ जायेगी। तब ये विदेशी निवेशक बढे हुए दामो में अपनी जमीने बेचकर मोटा मुनाफा कम सकेंगे और सिर्फ 7% कर चुकायेंगे।
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2) मोरिशस रूट से आने वाले P-notes को अभी भी कर मुक्त रखा गया है।
भारत में कुल P-notes के निवेश का लगभग 75% हिस्सा मोरिशस और सिंगापुर से आता है। 36% सिंगापुर और 30% मोरिशस से।
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पार्टिसिपेटरी नोट्स -- P-notes ऐसे निवेश है, जिन्हें सेबी ( भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड ) में पंजीकृत कराये बिना ही भारतीय स्टॉक मार्केट में निवेशित किया जा सकता है। ये नोट्स उन विदेशी वित्तीय संस्थाओ द्वारा जारी किये जाते है, जिन्हें भारत के स्टॉक मार्केट में निवेश करने की अनुमति है। ऐसे निवेशो से अर्जित सभी प्रकार के लाभांश और पूंजीगत लाभ अपंजीकृत निवेशक के खाते में जाते है। भारतीय नियामक सेबी के पास इन निवेशको की पहचान करने का कोई जरिया नहीं है
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भारत सरकार ने सिंगापुर, मोरिशस के साथ साथ साइप्रस, फ़्रांस, नीदरलेंड और दक्षिण कोरिया के वित्तीय संस्थानो को भी P-notes के जरिये भारत में "कर मुक्त" निवेश करने की अनुमति है। मतलब P-notes के जरिये किये जाने वाले निवेशो पर निवेशको को कोई कर नहीं चुकाने होते है, और भारत सरकार को यह भी जानकारी नहीं रहती कि, इन notes के जरिये कौन भारत में निवेश कर रहा है।
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इन सभी रूट्स से भारत में कर मुक्त निवेश किया जाता है, जिससे हमें डॉलर की हानि होती है। इन रूट्स का इस्तेमाल भ्रष्ट न्यायधीश, भ्रष्ट मंत्री, भ्रष्ट नौकरशाह आदि अपने काले धन को सफ़ेद बनाने में भी करते है। ये सभी निवेश शोर्ट टर्म है। मतलब कोई इन्फ्रास्ट्रकचर नहीं लगाया जाता, कोई रोजगार नहीं, कोई उत्पादन नहीं। ये निवेश साल दो साल के लिए होते है, ताकि शोर्ट टर्म केपिटल गेंस टेक्स से बचा जा सके। और हम इस राउंड ट्रिपिंग में करोडो डॉलर प्रतिवर्ष गवां रहे है। कोंग्रेस, आम आदमी पार्टी, बीजेपी समेत सभी पार्टियों के नेता इन रूट्स के लाभार्थी है। और इसीलिए सोनिया-केजरीवाल और इनके सभी अंध भगत भी इन रूट्स को किसी भी कीमत पर चालू रखने का समर्थन करते है।
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कुल मिलाकर सिर्फ मोदी साहेब के अंध भगत ही इस बात को मान सकते है कि मोदी साहेब काले धन की रोकथाम के लिए गंभीर है। वे गंभीर तो है, लेकिन उनकी गंभीरता सिर्फ देश के मध्य, उच्च मध्य वर्ग और स्थानीय कारोबारियों के प्रति है। विदेशी धनिकों और भारतीय उच्च वर्ग के प्रति वे उदार है।
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