Pawan Jury BhilwaraRj

भारत में ISI द्वारा चलाए जा रहे नकली नोटों को रोकने के लिए एक बेहतर सुझाव --- सभी बैंको को मशीने दी जाए (उन निजी कारोबारियों को भी जो ये मशीने लेना चाहते है), ये मशीने नोटों को स्केन करेगी और इसकी रिपोर्ट रिजर्व बैंक के सर्वर को भेजेगी ; और उन लोगो का नागरिको की ज्यूरी द्वारा नार्को टेस्ट लिया जाए जो नकली नोट चलाने के आरोपी हो।
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और हां, स्थायी समाधान तो यही है कि ---- उस जगह को बम से उड़ा दिया जाए जहां पर नकली नोट छापे जाते है।
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यह भय वास्तविक हो या आभासी, पर नकली नोटों के चलन को नोटबंदी से जोड़ा गया है, ( हालांकि इस तमाशे का असली मकसद विदेशी बैंको को लाभ पहुँचाना है)। लेकिन यदि नकली नोटों की समस्या है तो इसका समाधान बहुत ही सस्ता और आसान है --- नोटों के सीरियल नंबर को स्कैन किया जाए और इसकी रिपोर्ट रिजर्व बैंक को भेजी जाए।
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हमारे द्वारा प्रस्तावित सिस्टम किस तरह यह काम कर पाएगा ?
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(1) सभी बैंको को एक मशीन दी जा सकती है, जो कि नोटों की जाँच करे और सीरियल नंबर को स्केन करके नोट नंबर रिजर्व बैंक को भेजे। मशीन में कैमरा भी हो सकता है ताकि नोट देने वाले व्यक्ति का फोटो मशीन में कैद हो सके।
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(2) बैंक इन नोटों को दोनों बार स्केन करेंगे ---- जब वे ब्रांच में नोट जमा करंगे व जब वे नोट देंगे।
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(3) रिजर्व बैंक का सर्वर यह जांच करेगा कि, क्या कोई ऐसा नोट पाया गया है जिसका सीरियल नम्बर मौजूद नहीं है, या क्या किन्ही दो बैंक ब्रांच के पास एक ही सीरियल नंबर का नोट मौजूद है।
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(4) बाद में, भारत सरकार के सभी विभागों को भी ये मशीने लगाने के लिए कहा जा सकता है।
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(5) भारत सरकार ऐसे निजी कारोबारियों को भी ये मशीने लगाने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है, जो नकद लेनदेन करते है ।
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तो इस व्यवस्था के आने के बाद यदि कोई व्यक्ति नकली नोट को चलाने के कोशिस करेगा तो बैंक या सरकारी विभाग में यह नोट जाने से सम्बंधित बैंक/विभाग पुलिस को सतर्क कर सकेगा। यदि किसी व्यक्ति के पास ज्यादा संख्या में नकली नोट पाए जाते है तो नागरिको की ज्यूरी उनका नारको टेस्ट ले सकती है। नारको टेस्ट सार्वजनिक रूप से किया जाएगा।
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इन उपायों से नकली नोटों के चलन में कमी आएगी।
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अंतिम उपाय तो यही है कि ऐसे देश पर हमला करके उसे ध्वस्त कर दिया जाए जो नकली नोटों का उत्पादन करके भारत में इन्हें चला रहा है।
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लेकिन नोटबंदी का उद्देश्य कुछ और है। नोटबंदी का असली उद्देश्य भारत के मझौले और छोटे कारोबारियों को कमजोर करना है, ताकि FDI के जरिये निवेश करने वाले विदेशियों को लाभ पहुँचाया जा सके, और जमीनों की कीमतों को फौरी तौर पर गिराना है ताकि मोरिशस की कम्पनिया इन्हें सस्ते दामो में खरीद ऊँचे दामो में बेचकर कर मुक्त मुनाफा कमा सके !!!
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समाधान ?
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वर्त्तमान और पूर्वकालिक किसी भी रिजर्व बैंक गवर्नर ने नोट स्केन करने की इस वयवस्था को इसीलिए लागू नहीं किया, क्योंकि इनमे से ज्यादातर गवर्नर भ्रष्ट है। निवर्तमान गवर्नर मंदिरों का सोना लूटने में काफी रुचि लेते थे, और वर्तमान गवर्नर की रुचि कोर्पोरेट से गठजोड़ बनाकर नोटबंदी करने में है।
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समाधान -- "राईट टू रिकॉल-रिजर्व बैंक गवर्नर" क़ानून के लागू होने से नागरिक जल्दी ही ऐसा गवर्नर ढूंढ निकालेंगे जिसकी रुचि इस समस्या के समाधान में हो। अत: यदि आप समाधान चाहते है तो Rtr-Rbi के कानून को गेजेट में छपवाने की मांग करे। और यदि आप जादू देखना चाहते है तो, सोनिया-मोदी-केजरीवाल के अंध भक्तो को ये समाधान बताये, तब वे आपको बताएँगे कि गवर्नर को नौकरी से निकालने का अधिकार नागरिको के पास बिलकुल नहीं होना चाहिए, और जहां तक नकली नोटों का प्रश्न है, इसका सबसे सरल उपाय यह है कि, हर 5-7 साल में नोट बंदी करके इन्हें बदलते रहा जाए !!
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राइट-टू-रिकॉल-रिज़र्व बैंक गवर्नर के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
www.facebook.com/pawan.jury/posts/814288365356068
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