Pawan Jury BhilwaraRj
नोट बदलवाने की सीमा 4500, हो या 2000, पैसा निकालने की सीमा 20,000 प्रति सप्ताह हो या 24,000 हो। एक ही बात है।
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क्योंकि बैंको में पैसा ही नहीं आ रहा है, मतलब ऊंट के मुह में जीरे की तरह आ रहा है। और जो आ रहा है वह बैंक कर्मियों को ही पूरा नहीं पड़ रहा। बांटेंगे कहाँ से। पिछले 3 दिनों से भीलवाडा की ब्रांचो में पैसा बहुत कम आ रहा है। कुछ ब्रांच की जानकारी जो मुझे मिली। उन्हें 4 लाख, 5 लाख और 2 लाख रुपया प्रतिदिन मिला है। कुछ को 8 लाख भी मिला है। हालात यह है कि, बैंक खुलने से पहले जो लोग इकट्ठे हुए पड़े है उन्हें भी वापिस लौटना पड़ रहा है। 4,000 की सीमा के बावजूद सिर्फ 2,000 रूपये दिए जा रहे है। लेकिन एंट्री 4 हजार की होती है। शेष 2,000 बैंको से सेटिंग करने वालो के काम आ जाते है।
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चेक से रुपया निकालने वालो को भी बैंक रुपया नहीं दे रहे। मेरे एक परिचित परसों बैंक की लाइन में लगे। उनके पास 20,000 का चेक था, करंट एकाउंट का। नम्बर आने पर उनसे कहा गया कि, आपको सिर्फ 5,000 ही मिल सकता है। सभी आपको दे दिया तो बाकी को क्या देंगे। उनके पास अतिरिक्त चेक नहीं था। तो 4 घंटे लाइन में लगकर वापिस लौटना पड़ा। आज फिर से वे लाइन में लगे, 50,000 का चेक भुनाने के लिए। नम्बर आने पर उन्हें कहा गया कि सिर्फ 2,000 ही दे सकते है। चेक बुक उनके साथ थी तो उन्होंने 2,000 का चेक काटा और 2 हजार निकाल कर लाये।
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अब ऐसी हालत में आप क्या करेंगे जब बैंक कहे कि, इतना है है, लेना हो तो लो।
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अन्य ब्रांचो में भी यही हालात है। सीमा क्या है, इससे कोई लेना देना ही नहीं है। बैंको को पैसा ही नहीं दिया जा रहा, तो आप निकालेंगे कैसे ? और यदि आप चेक से पैसा निकालते है तो बैंक वालो को नुकसान हो जाता है। क्योंकि एक्सचेंज करने की एंट्री दिखाने से ही वे घपला कर पाते है, खाते से निकासी होने पर नहीं।
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यहाँ सवाल विमुद्रीकरण का नहीं है, सवाल यह है कि इसे लागू भी बदतरीन तरीके से किया जा रहा है। पैसा निकालने की सीमा सिर्फ टीवी और अखबारों में ही दिख रही है, बैंको में पैसा नदारद है।
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राष्ट्रीयकृत बैंको की हालत बहुत ज्यादा खराब है।
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लेकिन कतारो को देश भक्ति से जोड़ दिया गया है। कतारे जितनी ज्यादा लम्बी दिखाई देगी नागरिको की देशभक्ति भी उतनी ही उभरकर सामने आएगी। प्रशासनिक कुशलता किस चिड़िया का नाम है !!!
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