Pawan Jury BhilwaraRj

अब सिने तारिका अनुष्का शर्मा को भी दिवाली पर की जाने वाली आतिशबाज़ी से तकलीफ़ होने लगी है । हालाँकि उन्हें समस्या स्वयं नही है, बल्कि वे दिवाली पर की जाने वाली आतिशबाज़ी से जानवरो को होने वाली तकलीफ़ से पीड़ित है ।
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https://goo.gl/4CGx97
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हिन्दू धर्म की खिल्ली उड़ाने और हिन्दू श्रद्धालुओं को धर्म से विमुख करने के उद्देश्य से मिशनरीज़ द्वारा प्रायोजित फ़िल्म "PK" में अभिनय करने के बाद अब मिशनरीज़ के आदेश पर अनुष्का हिंदुओं के सबसे बड़े त्योहार पर आतिशबाज़ी न करने की सलाह देने का अभियान चला रही है ।
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उनके द्वारा बनाया गया बहाना यह है कि, आतिशबाज़ी जनित शोर से कुत्ते और पक्षी सकते में आ जाते है !!
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पार साल मोदी साहेब ने मिशनरीज़ के इशारे पर स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन को आदेश दिया था कि वे दीपावली को धूम्र प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए इस तरह का बयान जारी करे कि, "दीपावली पर आतिशबाज़ी नही करनी चाहिए । क्योंकि इससे वायु प्रदूषण होता है" ।
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दिल्ली के पर्यावरण मंत्री ने दीपावली पर आतिशबाजी के खिलाफ अभियान चलाने के निर्देश दिए और मनीष सिसोदिया ने स्कूलों को पत्र लिखा कि वे बच्चो को आतिशबाजी न करने के लिए प्रोत्साहित करें : https://goo.gl/06boRW
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पिछले वर्ष हर्षवर्धन ने दीपावली पर आतिशबाजी न करने की अपील की : https://goo.gl/0ZT2bc
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हर्षवर्धन यह समझाते हुए कि किस तरह सिर्फ दीपावली पर आतिशबाजी करने से स्वास्थ्य को नुक्सान होता है : https://goo.gl/i0h75S
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और चुनाव जीतने पर यही हर्षवर्धन खुद खड़े होकर आतिशबाजी करवा रहे है : https://goo.gl/1Co32N
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अरविन्द गाँधी ने खुद भी आतिशबाजी मुक्त दीपावली मनाने की अपील जारी की : https://goo.gl/efKq58
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पेड टाइम्स ऑफ़ इण्डिया नामालूम व्यक्तियों का हवाला देकर आतिशबाजी से दूर रहने की सलाह दे रहा है : https://goo.gl/KSy60B
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अब मिशनरीज़ के कहने पर अनुष्का आतिशबाज़ी से होने वाले श्रव्य प्रदूषण को बहाना बना रही है । यदि कहा जाता कि, आतिशबाज़ी से नागरिकों के कानो में दर्द होता है तो उन्हें सभी दिशाओं से जवाब यह मिलता कि, "हम साल में एक दिन आने वाले इस उत्सव के उपलक्ष्य में यह दर्द सहने को ख़ुशी ख़ुशी तैयार है" । इसीलिए मोर्चे पर अब पक्षियों व कुत्तों को निकाला गया है ।
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दरअसल, इस प्रकार के सारे प्रपंचों के पीछे एफ़डीआई है । जहाँ भी बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ जाती है, अपने साथ मिशनरीज़ को भी ले आती है । भारत में जैसे जैसे बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ मजबूत हो रही है वैसे वैसे मिशनरीज़ का प्रभाव बढ़ता जा रहा है ।
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भारत का मीडिया पूरी तरह से बहुराष्ट्रीय कम्पनियों और मिशनरीज़ के नियंत्रण में है, और आज के दौर में सभी नेता और अभिनेता मीडिया पर बुरी तरह से निर्भर करते है । इसीलिए अपने कैरियर को बढ़ाने और बनाए रखने के लिए नेता/अभिनेता/बुद्धिजीवी आदि मिशनरीज़ के निर्देशों का पालन करते है ।
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ईसाईयत फैलाने के लिए यह ज़रूरी है कि स्थानीय धर्म और परम्पराओं को शिथिल किया जाए । मंदिर गामी श्रद्धालुओं को मंदिर जाने और दान दाताओ को दान देने से हतोत्साहित करने के लिए 'PK', 'OMG', 'धर्म संकट में', जैसी फ़िल्मों को प्रायोजित किया जाता है । नेताओ अभिनेताओं के माध्यम से मंदिरो में दान न देने, देवालय से पहले शौचालय बनाने, मूर्तिपूजा न करने आदि के संदेश प्रसारित करवाए जाते है । दिवाली पर आतिशबाज़ी को ध्वनि-वायु प्रदूषण से व होली को जल के अपव्यय से जोड़ देने व दही हांडी प्रतियोगिता को नीरस बनाने के लिए इसकी ऊँचाई कम करना आदि मिशनरीज़ के इसी एजेंडे का हिस्सा है ।
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मिशनरीज़ का प्रभाव क्षेत्र बहुत बड़ा है । अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए ये नेताओं, अभिनेताओं, जजों, कबुद्धिजीवियो के साथ साथ संघ जैसे छद्म हिंदुवादी संगठनों का इस्तेमाल करती है । ये संगठन हिंदुओं को अपने धर्म से विमुख करने वाले ऐसे बयानों का समर्थन करते है और ख़ुद भी ऐसे बयान देते है जिससे धार्मिक परपराएँ और धर्म शिथिल हो ।
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समाधान ?
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राईट टू रिकॉल दूरदर्शन, ज्यूरी सिस्टम, टी सी पी आदि क़ानूनो को गेजेट में प्रकाशित करके देश में बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के बढ़ते नियंत्रण को कम किया जा सकता है । उपरोक्त कानूनो के प्रस्तावित ड्राफ़्ट देखने के लिए कृपया, मेरे फ़ेसबुक कवर पेज को क्लिक करें और डिस्क्रिप्शन में दर्ज लिंक को पढ़े ।
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अनुष्का जैसी नकटी और इन जैसे अन्य लोगों की बातों में न आए और सुरक्षा मानको का पालन करते हुए आतिशबाज़ी का आनंद ले ।
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आतिशबाज़ी युक्त दीपोत्सव की शुभकामनाएँ ।
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