Pawan Jury BhilwaraRj

चाइनीज़ सामानों का आयात करने वाले कुछ कारोबारियों का कहना है कि, चीन से आयात किए जाने वाले ज़्यादातर निम्न स्तर की उपभोक्ता वस्तुओं के निर्माता भारतीय ही है !
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मतलब, भारतीय कारोबारी यहाँ से चीन जाते है और इच्छित उत्पाद जैसे झालर, लाइटें, आतिशबाज़ी, मूर्तियाँ, दीपक, मोमबत्तियाँ, बल्ब, ट्यूब लाइट्स, पेन ड्राइव, मेमोरी कार्ड तथा इसी तरह की अन्य इलेक्ट्रिक, इलेक्ट्रोनिक उपभोक्ता वस्तुओं का ओर्डर चीनी इकाइयों को देते है । ये चीनी इकाइयाँ सेम्पल के अनुसार तय अवधि में माल बनाकर इन भारतीय कारोबारियों को दे देती है । भारतीय कारोबारी इसी माल को भारत के बाज़ार में उतार देते है । ग़ौरतलब बात यह है कि, भारत के ये कारोबारी मझोले स्तर के जबकि चीनी निर्माण इकाइयाँ छोटे दर्जे की है ।
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तो सवाल यह है कि, "मेक इन इंडिया" योजना के लागू होने के बावजूद भारतीय कारोबारी इंडिया में उत्पादन करने की जगह चीन में जाकर सामान क्यों बनवा रहे है ? और जाने, बनवाने और फिर से लाने के ख़र्चे जोड़ने के बावजूद उनकी लागत भारत में बनाई वस्तुओं से कम क्यों आ रही है ?
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मेरे विचार में, चीनी सामानों का बहिष्कार करने की जगह इस प्रश्न का जवाब खोजने में शक्ति लगाना ज़्यादा बेहतर होगा ।
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