Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate
Pawan Jury BhilwaraRj:
मिस्टर 'क' कहते है कि 'मैं राईट टू रिकॉल कानूनो का समर्थन करता हूँ'। क्या वास्तव में 'क' राईट टू रिकॉल कानूनो के समर्थक है, या वो कार्यकर्ताओ को रिझाने के लिए समर्थन का भुलावा दे रहे है ?
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राईट टू रिकॉल कानूनो के समर्थको की सूची बहुत लम्बी है। इसके समर्थको में लालू यादव, नितीश कुमार और यहां तक कि अटल बिहारी वाजपेयी और मोदी साहेब भी शामिल है !!! हाँ 1977 में वाजपेयी सार्वजनिक रेलियों में राईट टू रिकॉल कानूनो के समर्थन में ऐलान देते रहते थे। और इससे पहले जनसंघ का जिस जनता पार्टी में विलय हो गया था, उस जनता पार्टी के चुनावी मेनिफेस्टो में राईट टू रिकॉल विधायक और सांसद के कानूनो को लागू करने का वादा किया गया था। और मोदी साहेब भी उसी जनता पार्टी के सदस्य रह चुके है। अत: तकनिकी रूप से मोदी साहेब भी 1977 में राईट टू रिकॉल कानूनो के समर्थक रहे है !!! लेकिन सभी को मालूम है कि इन सभी महानुभावो ने प्रधानमन्त्री और मुख्यमंत्री बनने के बाद कितने राईट टू रिकॉल कानून पास किये है !!! कुल मिलाकर 'मैं राईट टू रिकॉल कानूनो का समर्थन करता हूँ', के हवाई जुमले उछालना यह साबित नहीं करता कि कोई व्यक्ति राईट टू रिकॉल कानूनो का समर्थन करता है।
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तो हम ये कैसे जान सकते है कि कोई व्यक्ति राईट टू रिकॉल कानूनो का सच्चा समर्थक है या फर्जी ?
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कृपया मिस्टर 'क' की फेसबुक प्रोफाइल पर उनके 'पब्लिक पोस्ट्स' देखे। अब मान लीजिये कि भारत के 20 से 50 कार्यकर्ता जो न आपको जानते है न ही मिस्टर 'क' को, यदि मिस्टर 'क' की फेसबुक प्रोफाइल पर 'पब्लिक पोस्ट्स' देखते है, तो क्या उन्हें राईट टू रिकॉल कानूनो के ड्राफ्ट्स (ड्राफ्ट्स--ड्राफ्ट्स--ड्राफ्ट्स) के बारे में कोई जानकारी मिलती है ? यदि हाँ, तो इसका मतलब है कि मिस्टर 'क' राईट टू रिकॉल कानूनो का सच्चा समर्थक है। किन्तु यदि ऐसी कोई भी जानकारी उन्होंने अपनी फेसबुक प्रोफाइल पर साझा नही की है तो इसका अर्थ है कि मिस्टर 'क' राईट टू रिकॉल कानूनो के फर्जी समर्थक है !!!
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राईट टू रिकॉल कानूनो के सभी फर्जी समर्थक हमेशा ड्राफ्ट्स का विरोध करते है, जबकि एक सच्चे समर्थक के पास हमेशा ड्राफ्ट्स होते है।
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इसलिए किसी भी व्यक्ति के राईट टू रिकॉल कानूनो का समर्थक होने की सच्चाई जानने के लिए कार्यकर्ताओ को अमुक व्यक्ति की फेसबुक प्रोफाइल पर रखे गए 'पब्लिक पोस्ट्स' को देखना चाहिए। यदि आप सिर्फ उनके बयानों को सुनकर फैसला करेंगे तो वे निश्चय ही आपको मूर्ख बनाने में सफल रहेंगे।
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