Pawan Jury BhilwaraRj
राजस्थान पिछड़ा आयोग ने रिपोर्ट जारी की है जिसके अनुसार अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल 81 जातियों में से सिर्फ 5 जातियों ने आरक्षण का फायदा उठाकर 75% नौकरियां हासिल की। शेष जातियों के हिस्से में 25% नौकरियां ही आयी।
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ये पांच जातियां गुर्जर, जाट, माली, कुमावत और यादव है। गत दस वर्षो में इन पांच जातियों ने मेरिट के आधार पर सामान्य वर्ग की 22% सीटों से भी नौकरियां हासिल की।
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यही स्थिति SC और ST वर्ग के साथ भी है। सभी आरक्षित वर्गो में 15-20% जातियों का स्तर उठ रहा है जबकि शेष जातियों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नही मिल रहा है।
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इसका नतीजा यह होगा कि यदि आरक्षण अगले 50 साल भी जारी रहा तो आरक्षित वर्ग की ज्यादातर जातियां पिछड़ी ही रहेगी, और उन तक आरक्षण का लाभ नही पहुंचेगा।
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इस समस्या का समाधान इन आरक्षित जातियों का आर्थिक आधार पर वर्गीकरण करके किया जा सकता है, ताकि संपन्न पिछडी हुयी जातियों का कोटा तय करके अधिक पिछड़ी हुयी जातियों को आरक्षण का लाभ उपलब्ध कराया जा सके। इसे आरक्षित वर्ग की सभी जातियों को अवसर की समान उपलब्धता बनी रहेगी और सामाजिक न्याय होगा।
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राईट टू रिकाल ग्रुप ने इसके लिए क़ानून प्रस्तावित किया है, जिसे इस लिंक पर देखा जा सकता है :
tinyurl. com/AarakshanGhatao2
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यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो अपने सांसद को इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करने का आदेश SMS द्वारा भेजे।
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