Pawan Jury BhilwaraRj

1992 में मस्जिद गिराई गयी जिसकी प्रतिक्रिया में मुंबई धमाके हुए ।
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1992 में अटल-आडवाणी-आरएसएस-विहिप के नेताओ ने पूरे देश से लाखों श्रधालुओ को बुलवाकर मस्जिद गिरा दी। सब कोई जानते है कि टारगेट मस्जिद गिराना था मंदिर बनाना नही।
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मस्जिद गिराने से हिन्दू धर्म मजबूत नही हुआ, देश भी मजबूत नही हुआ और मंदिर भी नही बना।
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जो हुआ वह यह कि :
1. मुंबई बम धमाके हुए
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2. भारत ने पूरे विश्व में यह भ्रम फैलाया कि भारत में इस्लाम का दमन किया जा रहा है।
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3. भारत के मुस्लिमो को भड़काया
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4. सऊदी अरब, पाक और अन्य मुस्लिम संगठनों ने भारत पर 'ध्यान' देना शुरू किया, और उन्होंने अपनी घुसपेठ भारत में बढ़ाई।
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5. भारत में इन लोगो को नेटवर्क बनाने के लिए जिन लोगो की आवश्यकता थी वो उन्हें उपलब्ध हो गए।
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6. तब से अब तक मुंबई धमाको को शामिल करते हुए दर्जनों आतंकवादी घटनाएं हुयी और सैंकड़ो जाने गयी।
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7. भारत के 'पीड़ित' मुस्लिमो को संबल देने के नाम पर आज मिडिया, नेता, मस्जिद, मदरसों आदि में सऊदी अरब और अन्य संगठनो ने अपना अच्छा खासा नेटवर्क बना लिया है।
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ध्रुवीकरण हुआ और बीजेपी ने इसे अपनी नीति बनाकर भुनाया। सत्ता में आकर बीजेपी ने उन सभी कानूनों का विरोध किया जिससे भारत में इस्लाम के बढ़ते गैर वाजिब प्रभाव को कम किया जा सके, साथ ही उन कानूनों को भी खारिज कर दिया जिससे हिन्दू धर्म मजबूत हो।
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जिन्होंने यह जहर बोया वो ही अब इसे काटने से इनकार कर रहे है। जिन्हें समस्या के समाधान के लिए बुलाया उन्होंने समस्या को और भी बढ़ा दिया ताकि उनकी जरुरत बनी रहे। मतलब हमे टोटल लोस हो गया। न तो खुदा मिला न विसाले सनम।
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