Pawan Jury BhilwaraRj

मोदी सरकार ने शरिया बांड जारी करने का फैसला पलट दिया है ।
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भास्कर का शीर्षक :
'देश का पहला धर्म आधारित सरकारी म्युचुअल फंड टला'
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and credit grabs by PAID 'DAINIK BHASKAR' !!!!
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हिन्दी के सबसे बड़े समाचार पत्र दैनिक भास्कर ने मुख्य पृष्ठ पर समाचार प्रकाशित किया है कि, SBI शरिया बांड्स ज़ारी नही करेगा । पेड भास्कर के अनुसार उन्होंने सरकार और बेंक को मेल किये तथा इन बांड्स के औचित्य के मुद्दे को उठाया था । ध्वनित कुछ इस तरह किया गया कि, यह फैसला पेड भास्कर की वजह से पलटा गया है, ऐसी हिंदूवादी मिश्रित सेकुलर सरकार पहली बार सत्ता में आई है ।
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ज्ञातव्य है कि SBI ने शरियत बांड्स जारी करने का फैसला पिछले सप्ताह किया था, जिसके विरोध में प्रजा अधीन राजा समूह ने अपने स्तम्भ में नागरिको को इस विषय पर जानकारी दी, तथा नागरिको से अपने क्षेत्र के सांसद को इस फैसले को रद्द करने के लिए SMS द्वारा आदेश भेजने की अपील की थी ।
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बहरहाल, प्रजा अधीन राज़ा समूह यह दावा नही करता कि, इस फैसले को पलटने का क्रेडिट समूह को दिया जाए, लेकिन हम यह जायज प्रश्न पूछना चाहते है कि, जब बांड्स जारी करने का फैसला किया गया था, तब पेड भास्कर ने करोड़ो नागरिको से यह खबर क्यों छुपायी ?
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ज्ञातव्य है कि पेड भास्कर ने इस फैसले को लिए जाने के सम्बन्ध में न तो नागरिको को कोई सूचना दी थी, न ही इस खबर को प्रकाशित किया था । जब सरकार ने महसूस किया कि, इस से जनता में गलत प्रतिभाव आ रहा है, तो सरकार ने फैसला पलट दिया, और दैनिक भास्कर और बीजेपी इसका क्रेडिट लेने के लिए दौड़ पड़े ।
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मोदी साहब ने इस फैसले को क्यों पलटा ?
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मोदी साहब ने राम, कृष्ण, काशीविश्वनाथ देवालय, समान नागरिक संहिता, अनुच्छेद 370, से यू टर्न ले लिया है ।
कत्लखानो की मशीनरी पर आयात शुल्क 10% से घटाकर 6% किया, मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कराने के वादे को 2014 के मेनिफेस्टो से हटा दिया, मंदिरों से सोना लूटा, नेशनल आईडी सिस्टम क़ानून को ठन्डे बस्ते में पहुंचा दिया, 2011 के धर्म और भाषा के आंकड़े प्रकाशित करने से मना कर दिया और हिन्दू मंदिरों के प्रबंधन को सुधारने के लिए आवश्यक हिन्दू देवालय ट्रस्ट अधिनियम को खारिज कर दिया ।
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ऐसे में नागरिको में यह सन्देश जाता है कि, मोदी साहब हिन्दू हितो की वांछित समस्याओं के निराकरण के लिए आवश्यक क़ानून पास नहीं कर रहे है ।
निदान, इस तरह का भ्रम खड़ा किया जाए कि मोदी सरकार हिन्दू हितो की रक्षा के लिए कार्य कर रहे है ।
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इन बांड्स की प्रक्रिया UPA सरकार ने शुरू की थी, अत: मोदी साहब ने इसे पास किया, लेकिन पेड मिडिया को निर्देश/भुगतान किया कि इस खबर को प्रमुखता से नही दिखाया जाए । एक सप्ताह बाद फैसले को पलट दिया गया, तथा पेड मिडिया को भुगतान/निर्देश किया गया कि, फैसला पलटने की खबर को प्रमुखता से छापा जाए । इस से यह सन्देश गया कि मोदी साहब हिन्दू हितो के सरक्षण के लिए कार्य कर रहे है ।
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इस प्रकरण में लगे हाथ पेड मिडिया ने भी बहती गंगा में हाथ धोने के लिए, क्रेडिट की एंट्री अपने खाते में कर ली ।
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अब यदि आप मोदी भक्तो (अंध) से पूछेंगे तो उनका कहना होगा कि मोदी साहब के रहते ऐसे बांड्स नही आ सकते, वहीँ पेड मिडिया कहेगा कि स्वतंत्र मिडिया ने इस विषय को उठाया और फैसला पलट दिया गया ।
संभावना है कि कुछ समय बाद SBI फिर से ऐसे बांड्स को अनुमति दे दे, किन्तु तब फिर से मिडिया ऐसे फैसलों को प्रमुखता से कवर नही करेगा ।
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इस अपवादित प्रकरण को छोड़ भी दे तो यह देखा गया है, कि छोटे छोटे कार्यकर्ता जिस विषय पर वर्षो मेहनत करते है, उस मुद्दे के हॉट होने पर बड़े नेता उस मुद्दे का क्रेडिट लेने के लिए प्रकट हो जाते है । इस से कार्यकर्ताओं को पहचान नही मिल पाती और इस अवतारवाद को बढ़ावा मिलता है कि अमुक सारे परिवर्तन नेताजी के पुरषार्थ से ही आये है ।
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ताजा उदाहरण राष्ट्रपिता महात्मा सुभाष चन्द्र बोस का है ।
कार्यकर्ता कई दशक से नागरिको में यह जानकारी फैला रहे है कि, हमें आज़ादी मुंबई के नेवी विद्रोह, अहिंसा मूर्ती महात्मा उधम सिंह, तथा आज़ाद हिन्द फ़ौज के कारण मिली थी, मोहन गांधी का आजादी की लड़ाई से कोई लेना देना नही था। यह जानकारी देश के करोडो नागरिको तक पहुंचे, इसलिए नेताजी से सम्बंधित 31 वर्गीकृत(classified) फाइलों को सार्वजनिक किया जाए ।
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बीजेपी ने विपक्ष में रहते खुद भी इन फाइलों को सार्वजनिक करने की मांग की थी, किन्तु सत्ता में आते ही बीजेपी ने इन्हें सार्वजनिक करने से इंकार कर दिया है। बीजेपी का कहना है कि, ऐसा करने से भारत के सम्बन्ध अन्य देशो से बिगड़ सकते है, जैसा कि कोंग्रेस पूर्व में कोंग्रेस कई बार कह चुकी है ।
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इसी बीच सुब्रमनियम स्वामी इस मांग का नेतृत्व करने के लिए मंच पर प्रकट हुए है । इस मुद्दे को लपकने के लिए सुब्रह्मनियम स्वामी अब अचानक मांग करने लगे है कि, नेताजी से सम्बंधित दस्तावेज सार्वजनिक किये जाए ।
लेकिन कोई भी सुब्र्ह्मनियम स्वामी से यह नही पुछ रहा है कि, जब तीन दशक से कार्यकर्ता यह मांग उठा रहे थे, तब वो कहाँ थे ।
जहाँ तक स्वामी का इस मुद्दे से सरोकारों का प्रश्न है, तब से स्वामी दो बार मंत्री रह चुके है, किन्तु मंत्री रहते उन्होंने हमेशा इस मांग का विरोध किया, और अब हाशिये पड़े होने के कारण, इस मुद्दे को हाइजेक करने के लिए कुलबुला रहे है ।
यह तय है कि, यदि मोदी साहब कल सुबह स्वामी को मंत्रिमंडल में शामिल कर लेते है, तो शाम होते होते स्वामी नेताजी की फाइलों को सार्वजनिक करने से इनकार कर देंगे ।

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समाधान : अपने क्षेत्र के सांसद को SMS द्वारा यह आदेश भेजें :

Hon MP I order you to print mention law drafts in gazette.
tinyurl. com/DdAdhyaksh
tinyurl. com/NetajiDiscloseFiles
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प्रजा अधीन राजा @ pk