Pawan Jury BhilwaraRj

'संपत्ति कर'
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भारत में ज़मीन की कीमते पिछले 15 वर्षो में तेजी से बढ़ी है और शहरी इलाको में ज़मीनों की कीमते पिछले 10 वर्षो में लगभग 5 से 10 गुना हो गयी है जबकि विकास दर 8% रही है । ऊँची कीमतों के कारण रोज़गार के अवसर सिकुड़ रहे है, और बेरोज़गारी बढ़ रही है । मौजूदा क़ानून जारी रहे तो अगले 20 वर्षो में मिडिल क्लास तथा लोअर मिडिल क्लास के लिए शहरी क्षेत्र में एक मकान बनाने में उसकी पूरी जिंदगी की कमाई भी कम पड़ने वाली है । कीमते बढ़ने के निम्न लिखित मुख्य कारण है :
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गेट समझोते के कारण mnc ने देश में प्रवेश किया और तीव्र औद्योगिक विकास शुरू हुआ, पर शुरू के 20 वर्षो में तो फाउन्डेशन बना है, मोदी pro mnc है और fdi में अब और तेजी आने से इसमें और तेजी आएगी ।
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उच्च आय वर्ग अपना सारा पैसा ज़मीनों में निवेश कर रहा है , क्युकी न तो भारत में संपत्ति कर है और न ही कोई ज़मीनों का कोई सार्वज़निक रेकोर्ड है जिस से पता चले कि किसने कितनी ज़मीन दबा रखी है ।
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सभी भ्रष्ट राजनेता अपनी सारी ब्लेक मनी जमीनों में निवेश करते है ताकि उनके मतदाताओं को जानकारी न हो कि किस ने कितनी ज़मीन जनता की "सेवा" करते हुए खरीदी है ।
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कई व्यापारिक घराने सरकारी मशीनरी से गठजोड़ करके भूमी बेंक औने पौने दामो में बना रहे है ।
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जमीनों की होल्डिंग करने से कीमते लगातार बढ़ रही है और आगे भी इसी गति से बढ़ेगी ।

प्रजा अधीन राजा के ज़मीनो की कीमतों को काबू करने के लिए संपत्ति कर का प्रस्ताव कर रहा है :

1. DLC की दर का निर्धारण नीलामी प्रक्रिया से हो ( इस से जमीनों की वास्तविक कीमत ऑन रिकोर्ड आ जायेगी )
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2. कोई भी व्यक्ति को 25 वर्ग मीटर जमीन तक आवासीय भूमि रखने पर छूट होगी , यदि 5 व्यक्ति का परिवार है तो 125 वर्ग मीटर तक उसे टेक्स नही देना होगा , इस से अधिक भूमि का मालिक होने से व्यक्ति को भूमि की कीमत का 2%की दर से सालाना टेक्स देना होगा। मान लीजिये कि x के पास एक मकान है और दो आवासीय भू खंड अतिरिक्त है जिनकी कीमत 50 लाख है , तो उसे 1 लाख सालाना संपत्ति कर देना होगा। ( जिन लोगो ने ज़मीनों की होल्डिंग कर रखी है वो हतोत्साहित होंगे, और जमीन के अलावा गोल्ड, शेयर आदि में निवेश करने की और स्वत: ही प्रवृत होंगे ।
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3. भारत का क्षेत्रफल 33 लाख वर्ग किलोमीटर है, इस पूरी जमीन का नक्शा , मालिको के नाम के साथ ऑन लाइन किया जाए, ताकि कोई भी आम आदमी किसी भी व्यक्ति के पास कितनी जमीन कहाँ पर है वेबसाईट पर देख सके । सभी सांसदों, विधायको, न्यायधिशो, मंत्रियो, आइएएस अफसरों, सचिवो, पुलिस प्रमुखों का अलग से पोर्टल हो जिसमे उन के खुद के, उनके रिश्तेदारों के, उनके ट्रस्टो आदि के नाम कितनी जमीन कहाँ है इसकी जानकारी ऑन लाइन हो । ( इस से हमारे नेताओ में ज़मीनों को बेचने की भगदड़ मचेगी जिस से जमीनों की पूर्ती बढ़ जायेगी , क्योकि यदि ये करोडो की जमीन शो कर देते है तो लाखो का सालाना टेक्स देना पड़ेगा जिसका इनके पास कोई वेध स्त्रोत नही है )
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4. कृषि भूमि जिस पर कृषि नही की जा रही है , संपत्ति कर के दायरे में होगी ।
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5. पुश्तेनी जमीनो पर कोई सम्पति कर नही देना होगा ।
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: इस सम्बन्ध में अनुमान भी नही लगाया जा सकता कि संपत्ति कर के लागू होने से कितने राजस्व की आय होगी , क्युकी किसी भी विभाग के पास ये आंकड़ा कीमतों के अनुसार नही है ।
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संपत्ति कर का एक तिहाई सेना को बजट के रूप में दिया जाएगा ताकि भारत की सेना मजबूत बन सके तथा 2% 'सात्य प्रणाली' के अंतर्गत गणित और विज्ञान की शिक्षा पर खर्च किया जाएगा।
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यदि आप इन कानूनों का समर्थन करते है तो अपने क्षेत्र के सांसद को sms द्वारा ये आदेश दे कि संपत्ति कर के क़ानून को गेजेट में छापा जाये ।
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sms का नमूना :
I order you to print mentioned law in gazette :
tinyurl . com/sampattikar
voter no. ######
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प्रजा अधीन राजा @ pk