Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate
Traslation of a Hindi post of mine . I had written this post around 7-sep-2012 , after I attended a speech by a Asam BJP leader on Bangladeshi problem in Asam. An RTR activist has translated this in Hindi.
Vinod Prajapat:
अवैध बांग्लादेशियो के मुद्दे पर कांग्रेस और आ आ पार्टी बीमारी है तो भाजपा टाइमपास डॉक्टर। पढ़िए पूरा पोस्ट।
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राइट टू रिकॉल ग्रुप राजीव भाई मेहता की असम के भाजप के सर्वोच्च नेता प्रदूत वोरा के साथ मीटिंग ! उनकी जुबानी - :
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मैंने (7-sep-2012) को इस बैठक में भाग लिया :- http://www.facebook.com/events/345449748877417
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यह बैठक भाजपा के असम के सर्वोच्च नेता प्रदूत वोरा ने आसाम की समस्या पर बुलाई थी !उनहोने 2 घंटे बात करी और आधे घंटे प्रश्नो के जवाब दिए ! 2 घंटे उन्होंने सिर्फ समस्याए बताई की कैसे ब्रिटिशर्स ने यह समस्या पैदा की , कैसे कांग्रेस ने इसे विकराल बनाया और कैसे आज यह विनाशक हो चुकी है ! और समाधाn के लिए कहा बांग्लादेशी भगाओ :- जैसे बांग्लादेशियो के चेहरे पे लिखा है में बांग्लादेशी हूँ और कोई झूट नहीं बोलेगा ! उन्होंने कोई समाधान नहीं बताया कैसे बांग्लादेशी मुस्लिम और भारतीय ,बंगाली मुस्लिम में अंतर किया जाये !
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मेने जब पूछा भाजपा ने 1998-2001 में कोई कानून लागु क्यों नहीं किया ? तो उन्होंने कहा सरकार तब पोखरण-२ , कारगिल युद्ध और पश्चिमी सीमा को सुरक्षित करने में व्यस्त थी !जैसे की पूरी सरकार पश्चिमी सीमा पर ही ध्यान केंद्रित कर रही थी !
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आखिर में जब मेने पूछा:- मन लीजिये में जिला कलेक्टर हूँ और 500 लोगो को मेरे सामने रख दिया बांग्लादेशी बनाके ! तो मुझे क्या प्रक्रिया पालन करनी चाहिए , क्या संहिता पालन करनी चाहिए ? और क्या भाजपा ने पार्लियामेंट में कोई ऐसा कानून रखा है जिससे में पता कर पाऊ ! उनका जवाब था 1951 के राष्ट्रीय जनसँख्या रजिस्टर (NPR-1951) का पालन करके ! कैसे ? व्यक्ति को अपने पिता या दादा का नाम एनपीआर में दिखाना पड़ेगा ! और उसे दस्तावेज दिखने को कहाँ जायेगा की उनके पिता का नाम क्या है ? मेने पूछा भाजपा ने पार्लियामेंट में ऐसा कोई कानून रखा है ? तो उनहोने जवाब नहीं दिया !
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ab मन लीजिये में बांग्लादेशी हूँ ! मेरी उम्र 50 साल है ! और मेरा नाम करीम है ! और मेरे पिता का नाम सलीम है और उनकी मृत्यु हो चुकी है। और में एनपीआर में कोई सलीम नाम ढूंढूंगा और दस्तावेज बता दूंगा तो हो गया में भारतीय नागरिक।
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और मन लीजिये मेरे पिताजी जीवित है और बांग्लादेश में रह रहे है। और मेरे दादा का नाम असलम है तो में दवा करूँगा की मेरे पिताजी की मृत्यु हो चुकी है ! और कोई असलम नाम एनपीआर में धुंध लूंगा ! बिंगो ! में हो गया भारीतय नागरिक।
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मैंने वोरा जी को कहा अपनी वेबसाइट पर विस्तृत प्रक्रिया डालिये ताकि कार्यकर्ताओ को मालूम चले वो किसे समर्थन कर रहे है। मुझे पता था वो ऐसा नहीं करेंगे। लेकिन में अप्प सबसे अनुरोध अकर्ता हूँ अपने भाजपा नेताओ से यह कहे ताकि अप्पको सच्चाई पता चले।
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उनसे अनुरोध करे ऐसी कोई प्रक्रिया अख़बार में विज्ञापन के रूप में देवे। मुझे यकीन है वो ऐसा भी नहीं करेंगे।
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अगर आपको इन टाइमपास नेताओ से भरोसा उठ जाये। और यह लगे की सिर्फ अप्प अकेले है। तो आपके पास कोई चारा नहीं है सिवाए अच्छे कानूनो को पढने का और अखबारों में उसका विज्ञापन देने का ! पर्चे बाटे उन कानूनो के और चुनाव लड़े खुद से। अगर आप आचे नेताओ का इनतजार कर रहे है तो यह सिर्फ टाइमपास है . औरजैसे जैसे समय बीतेगा बांग्लादेश देश में घुसते रहेंगे।
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1998 में भाजपा ने नारा दिया था बांग्लादेशी भगाओ और कहा था सरकार बानी तो 1000 बांग्लादेशियो को भगाएंगे बाकि सब अपने आप भाग जायेंगे और 2001 में वर्क परमिट !
2001 में भाजपा के नेता लाल कृष्णा आडवाणी ने बांग्लादेशियो का समर्थन करके उनके लिए वर्क परमिट का क्रियान्वन किया था। देखे http://business-standard.com/india/news/nitin-pai-fixingmigration-problem/481782/
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aur सरे नेता जैसे की वाजपेयी , शुष्मा , प्रमोद , अरुण जेटली , अरुण शौरी , आदि आदि लोगो ने समर्थन किया था। नमो तब राज्य स्तर पर थे , उनका विचार अज्ञात है।
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असल में सऊदी अरब से आना वाला पैसा था जिसने वर्क परमिट दिलवाया। गुजरात के अहमदाबाद में 30,000 बांग्लादेशी है और सूरत में 50,000 पर गुजरात सरकार में गुजरात से उन्हें निकलने के लिए कोई कानून नहीं दिया 12 साल में !
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सवाल यह आम नागरिको और कार्यकर्ताओ को क्या करना चहिये ?
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राइट टू ग्रुप का सुझाया हुआ कानून पढ़े और अपने MP/MLA से मांग करे वो यह कानून भारत के राजपत्र में छपे कृपया देखे अध्याय 33,1 ,6 13 http://rahulmehta.com/301.h.htm samadhan के लिए !