Pawan Jury BhilwaraRj

लोकतंत्र के भ्रम : किश्त - 1

'वंश दे रहे दंश'

कैसे स्थापित पार्टियां लाखों कार्यकर्ताओं का शोषण कर रही है ?
- पिछले महीने आम आदमी पार्टी से निराश सैकड़ो कार्यकर्ताओं ने पार्टी से बगावत कर के 'आप वोलंटियर एक्शन मंच' (AVAM) की स्थापना की है । इन युवाओं का कहना है कि उन्हें पार्टी में अपनी बात रखने का मंच नही दिया जा रहा है, और पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र नही है ।
ज्ञातव्य है कि इन युवाओं में अधिकतर छात्र है , जिन्होंने देश में बदलाव लाने की उम्मीद में अपने करियर को तवज्जो न देते हुए आम आदमी पार्टी में अपने दो वर्ष खपा दिए ।
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किसी भी लोकसभा क्षेत्र में लगभग 8-10 लाख मतदाता और 3-4 मुख्य राजनेतिक दल होते है ।
राजनेतिक दलो के मुखिया बंद कमरों में बैठ कर उम्मीदवार का चयन करते है और नागरिको को उन 'चुने हुए' उम्मीदवारों में से किसी एक उम्मीदवार को चुनने के लिए दबाव डाला जाता है ।
पार्टी में शीर्ष स्तर पर बैठे आधा दर्ज़न नेताओं का पूरी पार्टी पर कब्ज़ा होता है और वही तय करते है कि उनके किस चमचे को टिकेट देने से उनकी चवन्नी चलती रहेगी । उम्मीदवार के विजय होने पर कहा जाता है कि इसे जनता ने 'चुना' है ।
जबकि जनता सिर्फ 4 में से 1 को ही चुन रही है । 10 लाख में से कौन 4 चुनाव लड़ने वाले है उसका फैसला कुछ दर्जन भर नेताओं द्वारा जनता पर थोप दिया जाता है ।
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माफ़ कीजिये, पर यह लोकतंत्र नही है , यह पोपातंत्र है ।
यह कुछ वैसी ही परिस्थिति है कि कई डॉक्टर्स का समूह आप पर फल खाने का दबाव बनाए किन्तु विकल्प को तौर पर आपके सामने दो सड़े हुए केले और दो सड़े हुए सेब रखे ।
चुनाव आयोग और कुबुद्धि जीवी चुनावी मौसम में हमारे भेजे में ये 'ड्रिलिंग' करते रहते है कि हमने वोट नही दिया ( पढ़े सड़े फल नही खाए) तो हम लोकतंत्र का अपमान कर रहे है ।
नतीजा - पिछले 67 सालो से ये सड़े हुए फल खा खा कर हम देश का हाजमा खराब कर रहे है ।

समाधान - अन्तरदलीय लोकतंत्र (internal party democracy) के कानूनी ड्राफ्ट को गेजेट में छाप कर राजनेतिक दलों के इस पोपातंत्र को हटा कर लोकतंत्र की स्थापना की जा सकती है ।
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ये उन व्यक्तियों की सूची है जो देश के पैदाइशी कर्णधार है किन्तु :

- इन्होने गरीबी सिर्फ किताबो में पढ़ी और फिल्मो में देखी , ये विदेशो और महानगरो में ही रहे है और ज़्यादातर औसत दर्जे के छात्र रहे ।
- ज़्यादातर ने जीवन में किसी वस्तु का अभाव नही देखा ,जन्म के साथ ही सामंत और राजा की तरह जीवन जिया ।
- बचपन से जवानी तक कई क़ानून तोड़े पर रसूख दार परिवारों से ताल्लुक होने से कभी दोषी नही पाए गए ।
- किसी प्रकार का प्रशाशनिक, सांघर्शीक अनुभव इन्हें नही मिला ।
-फलस्वरूप ,लापरवाही, बेदर्दी, उद्दंडता, सामंतवाद इनकी प्रकृति का हिस्सा है और 'सुरक्षित' सीट इनका जन्म सिद्ध अधिकार ।
ये पोचे , खोखले, अनुभवहीन और रईस हमारे शाषक है और आगे भी यही रहने वाले है :

- अखिलेश डिम्पल,मुलायम, रामगोपाल यादव। मीसा भारती, साधू यादव, तेजस्वी यादव। चिराग रामविलास पासवान । अनुराग ठाकुर। दीपेंदर, भूपिंदर, रणबीर हुड्डा । अजय, अभय ॐ प्रकाश चौटाला। दुष्यंत वसुंधरा सिंधिया। वरुण मेनका गांधी। जितिन जीतेन्द्र प्रसाद। सचिन राजेश पायलट। ज्योतिरादित्य माधवराव सिंधिया। मानवेन्द्र जसवंत सिह ।पंकज राजनाथ सिंह। जयवर्धन दिग्विजय सिंह। गौरव तरुण गोगोई। प्रवेश साहिब सिंह वर्मा। अमित अजित जोगी। आकाश कैलाश विजयवर्गीय। के कविता चंद्रशेखर राव। हेमंत शिबू सोरेन। गगनजीत,सुरजीत सिंह बरनाला। बादल खानदान। अमरिंदर सिंह की औलादे। करुणानिधि की औलादे। बाल ठाकरे की औलादे। यशवंत सिन्हा की। महामहिम प्रणब जी की औलाद। रमण सिह की औलाद। अजित सिह की औलाद।
और भी बहुत सारे घुसे हुए है युवा और महिलाओ के नाम पे, पता नही कितने है । या तो ये हारते है या जीतते है , लड़ते यही लोग है ।
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पेड मिडिया और राजनेतिक दलों द्वारा फैलाया गया भ्रम :

× किसी भी व्यक्ति को चुनाव लड़ने का अधिकार लोकतंत्र की स्थापना कर देता है । भ्रम है ।

√ स्थापित पार्टिया राजनेतिक ब्रांड की तरह होती है, इनके पास लाखो कार्यकर्ताओं का संघठन और इतिहास होता है, करोडो का चंदा देने वाले पूँजीपतियों और इनके द्वारा पोषित पेड मिडिया का गठजोड़ होता है । इसलिए चुनाव को 2 या 4 ब्रांड्स के युद्ध की तरह लिया जाता है, स्वतंत्र उम्मीदवार के जीत जाने पर भी वह सरकार नही बना पायेगा, इस तथ्य को मतदाता समझते है । अत: वोट खराब हो जाने के 'भय' से पार्टी के उम्मीदवारों को ही वोट करते है ।

× किसी भी व्यक्ति को नयी पार्टी के गठन का अधिकार है । शोषक और सामन्तवादी दृष्टिकोण है ।

√ कोई भी पार्टी नेता की मिल्कियत नही हो सकती । लाखो कार्यकर्ता और नागरिको के परिश्रम से पार्टी खड़ी होती है, उन कार्यकर्ताओं को दूसरी पार्टी बनाने की सलाह देना उनका शोषण करना है ।यह ज्यादा आसान है कि ऐसा क़ानून लागू किया जाए कि मौजूदा पार्टियों में पारदर्शी लोकतंत्र की स्थापना हो , बजाय इसके कि फिर से दशको तक परिश्रम कर के नयी पार्टी खड़ी की जाए । वैसे भी क़ानून के अभाव में नयी पार्टी भी उसी ढर्रे पर आ जाएगी जिस पर पुरानी पार्टिया चल रही है ।
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तथ्य यह है कि पिछली लोकसभा में 543 में से 156 सांसद राजनेतिक घरानों से आये थे और इस लोकसभा में भी एक तिहाई (30%) सांसद नेताओं की संताने है ।
31 से 40 वर्ष की उम्र के सांसदों में ये आँकड़ा 56% है ।
नमो की केबिनेट में 24% मंत्री वंशवाद से है और 28% सीएम राजनेतिक घरानों से आये है ।
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कोंग्रेस, बीजेपी और आम पार्टी का स्टैंड :
कोंग्रेस - सिर्फ नाम ही काफी है ।
बीजेपी - बीजेपी को शीर्ष स्तर पर कोई खानदान अब तक 'उपलब्ध' नही हुआ है, किन्तु सांसद और विधायको को वंशवाद के आधार पर टिकेट देने की दर कोंग्रेस के बराबर ही है । (सूची देखे )
बीजेपी वंशवाद का सारा ठीकरा 'गांधी खानदान' पर फोड़ कर इस मुद्दे को साईड में करती रही है लेकिन बीजेपी ने कभी भी राजनेतिक दलों में आंतरिक लोकतंत्र की स्थापना के लिए कानूनी ड्राफ्ट नही दिये, और न ही कभी इसकी मांग कोंग्रेस से की ।
आम पार्टी - अरविन्द केजरीवाल ने कार्यकर्ता करण सिंह को जुलाई में पार्टी से निकाल दिया ।
वजह ..??
असल में करण ने पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र न होने से नाराज़ लोगो के लिए आनलाईन प्लेटफोर्म 'आप वालिंटीयर एक्शन मंच' (AVAM) का गठन किया था
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दलों में उम्मीदवारों के चयन के लिए आतंरिक स्तर पर लोकतंत्र न होने से समर्पित और ईमानदार कार्यकर्ता वर्षो के परिश्रम के बावजूद उम्मीदवारी की दौड़ से उसी प्रकार बाहर हो जाते है, जिस प्रकार खराब मुद्रा की आवक अच्छी मुद्रा को चलन से बाहर कर देती है ।
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¶ समाधान :
प्रजा अधीन राजा समूह ने इस सर्कस से छुटकारा पाने के लिए कानूनी ड्राफ्ट का प्रस्ताव किया है ।
जिसके अनुसार उम्मीदवार के चयन के लिए चुनाव आयोग पार्टी के भीतर चुनाव आयोजित करेगा, अमुक पार्टी के कार्यकर्ता इस चुनाव में अपनी उम्मीदवारी के लिए चुनाव लड़ सकेंगे, जिसमे अमुक पार्टी के ही कार्यकर्ता वोट करेंगे और नतीजे चुनाव आयोग पार्टी अध्यक्ष को सोंप देगा ।

इस क़ानून का विस्तृत ड्राफ्ट दिए गए लिंक से मुफ्त डाउनलोड करे :

rahulmehta . com / 301 . htm

(internal party democracy, chapter 40.14)

सभी कार्यकर्ताओं से अपील है कि यदि आप किसी पार्टी से सम्बद्ध है तो अपनी पार्टी के नेताओं को ये कानूनी ड्राफ्ट देवे ,तथा अपने सांसद को SMS द्वारा इस ड्राफ्ट को गेजेट में छापने का ऑर्डर भेजे ताकि आगामी विधान सभा चुनावों में निष्पक्ष,ईमानदार और कर्मठ उम्मीदवारों का चयन हो सके ।

प्रजा अधीन राजा @ pk