Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate

सोनिया/ नमो/ एके सिंगापुर मार्ग को प्रश्रय देना चाहते हैं, मानो सिर्फ मॉरीशस मार्ग ही काफी नही था!! समाधान? अंतिम पैराग्राफ देखें।
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सोनिया गांधी ने सिंगापुर संधि का ड्राफ्ट तैयार कराया जिससे आगे चलकर मॉरीशस मार्ग जैसे एक अन्य कानून का रास्ता साफ़ हुआ!! यह भी अब स्पष्ट है कि नमो भी इसे समाप्त करने की जगह और अधिक बढ़ावा देना चाहते हैं!!
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मॉरीशस मार्ग क्या है? वस्तुतः इसका तात्पर्य है कि ऐसी कंपनी जिसका पता मॉरीशस का है, उसे भारत में कोई कर नही चुकाना पड़ेगा। मॉरीशस की जनसँख्या 13 लाख है तथा उनका निवेश भारत में 78 अरब डॉलर है, यानी प्रति मॉरीशस वयस्क एवं बच्चे पर 60000 डॉलर! जाहिर है यह सारा पैसा बाहर से आया है न कि हमारे देश का है। समस्या यह है कि प्रत्येक भारतीय को अपने निवेश के रिटर्न पर कर जमा करना होता है, जबकि मॉरीशस कंपनियों को कोई कर नही देना होता। फलस्वरूप भारतीयों पर करों का बोझ बढ़ जाता है। और भारतीय फैक्टरियों का विकास नही हो पायेगा।
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सोनिया गांधी एक अन्य मार्ग बनाना चाहती थी-- सिंगापुर मार्ग!! ऐसा प्रतीत होता है कि नमो भी इसे समाप्त करने की जगह जारी रखना चाहते हैं। सिंगापुर के साथ संधि में भी
मॉरीशस संधि के समान ही प्रावधान हैं। इसके अनुसार सिंगापुर की कंपनी द्वारा भारत में प्राप्त किये गए लाभ पर कोई कर नही लगाया जायेगा!!
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अब सवाल यह है कि वैश्विक निवेशक सिंगापुर मार्ग को क्यों चाहते हैं, वे क्यों नही मॉरीशस मार्ग का उपयोग कर लेते हैं? क्योंकि मॉरीशस पर ब्रिटिश बैंकिंग माफिया रोथ्स्चिल्ड तथा अमेरिकी बैंकिंग माफिया रॉकफेलर का अधिकार है। अतः जापानी तथा चीनी निवेशक उनपर भरोसा नही करते। उनके बैंकिंग माफिया सिंगापुर में हैं। अतः भारत सरकार उनके हितों को देखते हुए उनके लिए सिंगापुर मार्ग बना रही है।
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इन तथाकथित निवेशों से सिर्फ क्षणिक समृद्धि आएगी। ऐसे परिवार की कल्पना करें जिसने अपनी सारी जमीन बेचकर बहुत सारे पैसे प्राप्त किये तथा वे पैसे अनाप- शनाप खर्चों में उड़ा दिए। ऐसे में तो वह कंगाल ही होगा। एफडीआई आदि का प्रभाव भी कुछ ऐसा ही है। इनसे भारतीयों की योग्यता नही बढ़ रही। अंत में कभी न कभी कम्पनियाँ अपने पैसे व लाभ वापस मांगेंगी। इससे विदेशी मुद्रा का गंभीर संकट उत्पन्न होगा।
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इसका समाधान है कि सभी प्रकार के कर राहतों पर अंकुश लगाया जाये। सभी कंपनियों पर समान कर लागू हों। यही कानून अमेरिका में भी है। आप भी अमेरिका में व्यवसाय आरम्भ कर सकते हैं, किन्तु आपको भी अमेरिकनों की तरह ही समान कर देना होगा। साथ ही हमें फैक्टरी मालिकों की अक्षमता कम करने हेतु कुछ अच्छे कानून ड्राफ्टों पर भी ध्यान केंद्रित करना होगा, जैसे-- टीसीपी, डीडीएमआरसीएएम= एमआरसीएम, ज्यूरी सिस्टम, राइट टू रिकॉल, संपत्ति कर, उत्तराधिकार कर आदि।
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कृपया ध्यान रहे कि भाजपा, आआपा, सीपीएम, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, भारत स्वाभिमान ट्रस्ट, आदि मॉरीशस मार्ग का समर्थन कर रहे हैं। सिर्फ हमारा राइट टू रिकॉल ग्रुप ही मॉरीशस मार्ग आदि का विरोध कर रहा है। अतः यदि आप इस प्रकार के करों के घोटाले को रोकना चाहते हैं तो कृपया राइट टू रिकॉल ग्रुप में शामिल हों। इसका लिंक मेरे प्रोफाइल में मिल जायेगा।