Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate

समृद्धि बढ़ाने के चार तरीके हैं- (a) आतंरिक अक्षमताओं को कम करना, (b) विदेशों से ऋण लेना, (c) विदेशों से निवेश को आमंत्रित करना, जो कि ऋण का ही दूसरा रूप है, चूँकि यहाँ लाभांश को विदेशी मुद्रा के रूप में चुकाने की प्रतिबद्धता होती है (d) किसी दूसरे देश को लूटना।
सबसे कठिन तरीका (a) है। (d) तभी संभव है जब (a) हो चुका हो। कांग्रेस/ अटल बिहारी वाजपेयी ने 1991 से लेकर अब तक सिर्फ (b) तथा (c) तरीके ही अपनाये हैं, तथा नमो भी उसी रास्ते पर चल रहे हैं। अब तक तो (a) को अपनाने की कोई योजना नही दिख रही है। समाधान? कृपया अंतिम पैराग्राफ देखें।
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1998 से अब तक मैं सभी कार्यकर्ताओं से अनुरोध करता आ रहा हूँ कि वे टीसीपी, डीडीएमआरसीएएम= एमआरसीएम, ज्यूरी सिस्टम, सभी पदों के लिए राइट टू रिकॉल, संपत्ति कर, उत्तराधिकार कर आदि के कानून ड्राफ्टों पर अपना ध्यान केंद्रित करें, ताकि आतंरिक अक्षमताएं कम की जा सकें। किन्तु कार्यकर्ताओं के अनुसार देश को अच्छे कानूनों की जगह मात्र एक चकाचक प्रधान मंत्री की आवश्यकता है, चाहे वे अटल बिहारी वाजपेयी हों, लाल कृष्ण आडवाणी, नमो या एके। अतः उन्होंने सभी कानून ड्राफ्टों का विरोध किया, तथा 1998 में वाजपेयी- भक्ति, 2004- 2009 में आडवाणी- भक्ति, तथा 2011-2014 में नमो- भक्ति एवं एके- भक्ति का सहारा लिया। नमो तो जैसे जादू की छड़ी माने जा रहे थे, जो कि बिना उपर्युक्त कानून ड्राफ्टों के तथा बिना एफडीआई/ ऋण के ही धन उत्पन्न कर देंगे।
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किन्तु अब यह स्पष्ट हो चुका है कि नमो के पास कोई जादू की छड़ी नही है, तथा उपर्युक्त कानून ड्राफ्टों को लागू करना उनकी सामर्थ्य से बाहर है। अतः उनके पास एफडीआई/ ऋण का ही एकमात्र रास्ता बचा। हाल में ही भारत ने विश्व बैंक से 1 अरब डॉलर का ऋण प्राथमिक शिक्षा के नाम पर लिया है। हम रेलवे, रक्षा तथा यहाँ तक कि समाचारपत्रों में भी एफडीआई को फैलते देख सकते हैं। लगभग 60,000 करोड़ रूपये आने वाले हैं, जापान भारत में बुलेट ट्रेन बनाने वाला है, तथा कई जापानी कंपनियों को वाराणसी तथा पूरे भारत में फ्लाईओवर बनाने का ठेका मिलने वाला है। यहाँ तक कि गंगा की सफाई का प्रोजेक्ट भी जापानी कंपनियों को मिलने की संभावना है।
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इस प्रकार, यह तथाकथित विकास हमारी अक्षमताओं को कम करके नही आ रहा, बल्कि सिर्फ विदेशी पैसे तथा विदेशी तकनीकों से आ रहा है। जापान द्वारा निर्मित बुलेट ट्रेन से कभी भी वास्तविक विकास नही हो सकता। वास्तविक विकास तो तब होगा जब पूरी ट्रेन सिर्फ भारतीयों द्वारा बनाई गयी हो। ऐसा विकास कहीं दिख नही रहा।
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अतः बड़े पैमाने पर रोजगार में वृद्धि होगी, विकास होगा तथा उच्च स्तर की समृद्धि दिखेगी, किन्तु उसे ऑन- ऑफ करने का स्विच तो विदेशियों के पास होगा। जिस दिन वे इस स्विच को ऑफ करने का निर्णय लेंगे, उस दिन उन्हें मात्र इतना करना होगा कि वे अपने निवेश पर लाभ तथा पूँजी को वापस मांगें, और इसी से भारत में विदेशी मुद्रा का इतना गंभीर संकट आ जायेगा कि सबकुछ धराशायी हो जायेगा।
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रक्षा क्षेत्र में एफडीआई का मतलब है कि जिस दिन अमेरिका भारत पर आक्रमण करेगा, हमारे पास आत्मसमर्पण के सिवा कोई विकल्प नही रह जायेगा। चूँकि उस समय अमेरिकी तथा जापानी कंपनियों द्वारा निर्मित अत्याधुनिक हथियार काम नही करेंगे। इसका वास्तविक समाधान यह है कि सभी हथियार, यहाँ तक कि सभी चिप तथा कोड भी 100% भारतीय कर्मचारियों द्वारा ही बनाये जाएँ। किन्तु 1991 से ही हम इस दिशा में कोई कदम नही उठा रहे तथा नमो शासन भी इसमें रुचि नही ले रहा।
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समाधान : दोस्तों, नमो के पास कोई जादू की छड़ी नही है। इसलिए अब समय आ गया है कि आप जाग जाएँ, तथा भारत में ऐसे कानून ड्राफ्ट लाने का प्रयास शुरू कर दें जिनसे आतंरिक अक्षमताएं कम की जा सकें तथा वास्तविक विकास लाया जा सके। कैसे? कृपया rahulmehta . com\301.htm. को डाउनलोड करें, तथा धारा- 1.3 में टीसीपी ड्राफ्ट, अध्याय- 5 में डीडीएमआरसीएएम= एमआरसीएम, ज्यूरी सिस्टम, संपत्ति कर, उत्तराधिकार कर आदि के ड्राफ्ट को पढ़ें।