Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate

मॉरीशस मार्ग तथा काला धन के मुद्दो में अंतर: मॉरीशस मार्ग काला धन की तुलना में 100 गुना अधिक गंभीर समस्या है--- राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, आआपा, कांग्रेस, भारत स्वाभिमान ट्रस्ट कार्यकर्ता आदि काला धन के विरोध में दिन में 100 बार शोर मचाते हैं, किन्तु इस तथ्य को छिपा लेते हैं कि वे सभी मॉरीशस मार्ग का समर्थन कर रहे हैं।
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भारत ने मॉरीशस के साथ एक संधि की, जो कि 1992 से प्रभाव में आया। इस संधि के अनुसार, यदि कोई कंपनी जिसका पता मॉरीशस का है, भारत के शेयर बाजार में निवेश करती है जिसपर उसे लाभ प्राप्त होता है, तो भारत सरकार उससे कोई भी पूँजी लाभ कर नही लेगी। यह काला धन से बिलकुल अलग है, क्योंकि यदि निवेशक विदेश का नागरिक है, तो भारत में उसका पैसा सफ़ेद धन है। इस मार्ग का उपयोग विदेशों द्वारा भारत की पूँजी को भारत से बाहर ले जाने के लिए किया जाता है।
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राजीव दीक्षित जी ने इस मॉरीशस मार्ग को समाप्त करने की मांग की थी। किन्तु अब राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ तथा भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के कार्यकर्ता मॉरीशस मार्ग को जारी रखना चाहते हैं। यही कारण है कि इन्होने मॉरीशस मार्ग को समाप्त करने की मांग करने के लिए समाचारपत्रों में विज्ञापन देने से इंकार किया। तथा मॉरीशस मार्ग के पक्ष में अपने समर्थन की बात को छिपाने के लिए ये सभी दिन में 108 बार चिल्लाते हैं--- "काला धन वापस लाओ, काला धन वापस लाओ, काला धन वापस लाओ"…!! आआपा एवं कांग्रेस के कार्यकर्ता तो पहले दिन से ही मॉरीशस मार्ग के समर्थक रहे हैं।
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अतः यदि आप मॉरीशस मार्ग को समाप्त करना चाहते हैं तो कृपया भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के कार्यकर्ताओं तथा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यकर्ताओं के साथ अपना समय व्यर्थ नही करें। कृपया राइट टू रिकॉल ग्रुप में शामिल हों। हमारा ग्रुप ही एकमात्र है जो कि नागरिकों को मॉरीशस मार्ग के सम्बन्ध में जानकारी दे रहा है, तथा इसे समाप्त करने हेतु सही मायनो में प्रयास कर रहा है।