Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate

नमो,एसआई, तथा एजे ने 1 अरब डॉलर= लगभग 6000 करोड़ रूपये का कर्ज डब्ल्यूटीओ से बच्चों की शिक्षा के नाम पर लिया, तथा भारत को और अधिक कर्ज के जाल में फंसा दिया।
.
कमेंट में लिंक देखे- jagranjosh . com/current-affairs/india-signed-loan-agreement-with-world-bank-for-sarva-shiksha-abhiyan-iii-1401428253-1
.
सभी कर्ज अच्छे हैं, ये बुरे तब लगते हैं जब इन्हे ब्याज सहित चुकाने का समय आता है। सरकार पर चढ़ने वाला कर्ज तो और भी अच्छा है, वर्तमान सरकार इस कर्ज का इस्तेमाल कर खुले हाथों से खर्च करती है, तथा अगली सरकार या अगली पीढ़ियों को उसकी कीमत चुकानी होती है। यदि यह कर्ज रूपये के रूप में हो तो चलेगा, चूँकि भारत सरकार किसी भी समय रूपये छाप सकती है। किन्तु भारत सरकार पर चढ़नेवाला डॉलर का कर्ज चुकाने का समय आने पर विदेशी मुद्रा की भारी कमी की समस्या से जूझना पड़ेगा, जिसके कारण सरकार/ राष्ट्र को सभी खनिजों को बेचना पड़ेगा, मिशनरियों को अनुमति देनी पड़ेगी तथा उनकी शर्तें माननी होंगी, जिससे हमारे देश में गणित/ विज्ञान/ अभियांत्रिकी आदि की शिक्षा को भी भारी क्षति होगी। इसे संक्षेप में "विदेशी मुद्रा कर्ज का जाल" कह सकते हैं।
.
एफडीआई तो कर्ज के इस जाल से भी अधिक बुरा है, जिसका वर्णन मैंने कुछ दिनों पहले अपने स्टेटस में किया है।
.
1950 के दशक से ही भारत के सभी नेता सारे दुष्परिणाम जानते हुए भी डॉलर के रूप में कर्ज लेते आये हैं। 29 मई 2014 को इस दिशा में एक और कदम उठाते हुए नमो, एसआई तथा एजे ने भारत सरकार द्वारा 1 अरब डॉलर= लगभग 6000 करोड़ रूपये का कर्ज डब्ल्यूटीओ से बच्चों की शिक्षा जैसे अच्छे काम के नाम पर लेने के लिए कागजातों पर हस्ताक्षर किये। वास्तविकता यह है कि कई जरूरी तथा गैरजरूरी आयातों के फंड के लिए डॉलर की आवश्यकता है। अतः नमो सरकार ने कर्ज लेने का फैसला किया। अब यदि यह कर्ज चुकाया नही गया तो इसका खामियाजा अगली सरकार या अगली पीढ़ियों को भुगतना होगा।
.
इस कर्ज को लेने का बहाना यह बनाया गया कि "सरकार के पास शिक्षा में खर्च करने के लिए पैसा नही है"। यदि ऐसा है तो सरकार हमेशा संपत्ति कर लगाकर तथा उत्पादन कर, वैट, जीएसटी आदि को हटा कर फंड एकत्र कर सकती है। किन्तु नमो/ कांग्रेस/ आआपा के पास संपत्ति कर लगाने के लिए न तो ताकत है न ही इच्छा। अतः विभिन्न अच्छे कारण गिना कर विदेशी मुद्रा का कर्ज लेना जारी है, बिलकुल उसी तरह जैसा कांग्रेस ने किया तथा आआपा भी यही करता। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ आलाकमान, तथा उनके स्वदेशी जागरण मंच ने हमेशा कांग्रेस द्वारा डॉलर के रूप में लिए गए कर्ज का विरोध किया। अब वही नमो द्वारा डॉलर के रूप में लिए गए कर्ज का समर्थन कर रहे हैं!!!
.
भारत पर अभी लगभग 300 अरब डॉलर विदेशी मुद्रा का कुल कर्ज है। अतः 1 अरब डॉलर का यह ऋण भारत को बस 0.3% और अधिक गड्ढे में धकेलेगी। किन्तु अभी और कर्ज लिए जायेंगे और भारत और भी गहरे गड्ढे में जाता जायेगा।
.
इसका समाधान मैं प्रस्तावित करता हूँ कि एक ऐसा कानून लागू किया जाये जिससे सरकार और अधिक कर्ज न ले सके। इसका नैतिक आधार है--- किसी भी व्यक्ति द्वारा लिया हुआ कर्ज उसी के साथ समाप्त हो जाना चाहिए। सरकार द्वारा लिया गया कर्ज एक सरकार से दूसरे को हस्तांतरित होता है, अतः यह अनैतिक है। अधिकांश बिकाऊ अर्थशास्त्री इस कानून का विरोध करते हैं।
.
यदि आप नमो द्वारा डॉलर के रूप में लिए जाने वाले कर्ज का समर्थन करते हैं, तब तो ठीक है। किन्तु यदि आप इसका विरोध करते हैं तो कृपया अपने सांसद को एसएमएस द्वारा उपयुक्त यूआरएल के साथ इस डॉलर कर्ज को रद्द करने का आदेश भेजें।