Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate

जो लोग वाजपेयी युग के बारे में नही जानते---- राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ आलाकमान तथा भाजपा आलाकमान हमेशा कांग्रेस की गलत नीतियों को कोसते हैं, लोगों का रक्तचाप बढ़ाते हैं, उनके आक्रोश को वोटों के रूप में भुनाते हैं--- तथा फिर वह सब करते हैं जो कभी कांग्रेस ने किया था!!! समाधान? कृपया अंतिम पैराग्राफ देखें।
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रक्षा क्षेत्र में 100% एफडीआई शुरू करना भी इसी का उदाहरण है। जब कांग्रेस ने रक्षा क्षेत्र में 26% एफडीआई शुरू किया तो राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ आलाकमान तथा भाजपा आलाकमान उनके बिकने की बात चीख- चीख कर कह रहे थे। आइये, हम थोड़ा पीछे चलते हैं- 1990 के दशक में।
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जब मनमोहन सिंह ने यह कानून लागू किया कि मॉरीशस कंपनियों को निवेश पर प्राप्त दीर्घकालीन तथा अल्पकालीन लाभ के लिए कोई कर नही देना होगा, तब भाजपा आलाकमान, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ आलाकमान, तथा उनके स्वदेशी जागरण मंच ने उनके बिकने की बात कह कर काफी हो- हल्ला मचाया। (उस समय आम निवेशकों के दीर्घकालीन लाभ पर कर लागू था)। जब अटल बिहारी वाजपेयी सत्ता में आये तो वह तथा स्वदेशी जागरण मंच प्रमुख यशवंत सिन्हा ही मॉरीशस कंपनियों को करों में छूट मिलने के सबसे बड़े मुखर समर्थक थे!!
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इसी प्रकार, भाजपा आलाकमान तथा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ आलाकमान 1990- 1998 ई. तक बांग्लादेशी घुसपैठ के खिलाफ सर्वाधिक मुखर रहे। तथा 1998 में, यही भाजपा तथा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ आलाकमान बांग्लादेशियों को रोकने हेतु आवश्यक राष्ट्रीय आईडी(पहचान पत्र) प्रणाली के सर्वप्रमुख विरोधी बन गए।
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इसी तरह, भाजपा तथा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के बड़े नेता आज से 1 साल पहले तक एफडीआई का विरोध कर रहे थे, तथा कांग्रेस ने जब रक्षा क्षेत्र में 26% एफडीआई को लागू किया तब उनके बिकने की बात जोरदार तरीके से कही। अब नमो भी इस मुद्दे को हल नही कर रहे।
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जिन लोगों को अटल बिहारी वाजपेयी के V- टर्न के बारे में याद है, या उसके बारे में उन्होंने पढ़ा है, उनके लिए नमो का M- टर्न कोई नयी बात नहीं।
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और यह मत भूलिए कि एके को यदि अवसर दिया जाये तो वे कांग्रेस+ भाजपा से भी बदतर साबित होंगे।
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इसका समाधान मैं प्रस्तावित करता हूँ कि यही समय है जब कार्यकर्ताओं को व्यक्ति- पूजा छोड़कर अच्छे कानून ड्राफ्टों के लिए अभियान छेड़ना चाहिए। नमो- भक्त तथा अरविन्द- भक्त राइट टू रिकॉल, ज्यूरी सिस्टम आदि सभी कानून ड्राफ्टों का विरोध यह दावा करते हुए करते हैं कि " एफडीआई, मिशनरियों, बहुराष्ट्रीय कंपनियों के मालिकों आदि सभी समस्याओं से निबटने के लिए मात्र नमो या एके को लाना ही काफी है, किसी कानून ड्राफ्ट की कोई जरूरत नही।" अच्छी बात है, किन्तु मोदी के पास कोई जादू की छड़ी नही। अतः कृपया मोदी अथवा एके के प्रति अपनी अंध- भक्ति छोड़ें, तथा यह बताएं/ पोस्ट करें कि आपकी नज़र में कौन से कानून ड्राफ्ट इन समस्याओं का हल कर सकते हैं।