Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate

रक्षा क्षेत्र में एफडीआई (विदेशी प्रत्यक्ष निवेश) से चीन के साथ हमारे युद्ध छिड़ने की संभावनाएं कम होंगी। किन्तु यूएसए के साथ हमारे संभावित युद्ध की स्थिति में हमारी स्थिति बदतर हो जाएगी। बहुत से लोग मानते हों कि अमेरिका कभी भी भारत पर आक्रमण नही करेगा। किन्तु यही लोग कभी यह भी कहा करते थे कि अमेरिका कभी भी इराक, लीबिया आदि पर आक्रमण नही करेगा।
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हमारे पास भारत में अमेरिका तथा जापान द्वारा निर्मित हथियार होंगे, और इनसे हम चीन के आक्रमणों से अपनी सुरक्षा अवश्य ही कर पाएंगे। किन्तु यदि अमेरिका कभी भारत पर आक्रमण करेगा तब ये हथियार कोई काम नही आएंगे!!! साथ ही जब चीन के साथ युद्ध छिड़ेगा तो अमेरिकी तथा जापानी कम्पनियाँ हथियारों के पार्ट्स तथा मरम्मत के लिए इतनी बड़ी कीमत की मांग करेंगे कि लगभग पूरा देश ही इसके लिए बिक जायेगा।
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जबकि फैक्टरी मालिकों की क्षमता बढ़ाने का प्रस्ताव---- ज्यूरी सिस्टम, सभी पदों पर राइट टू रिकॉल, संपत्ति कर, डीडीएमआरसीईएम( नागरिकों के खातों तथा सेना में खनिज रॉयल्टी को सीधे जमा करना) = एमआरसीएम तथा अन्य कानून ड्राफ्ट---- ये सभी चीन अथवा अमेरिका दोनों में से किसी के साथ भी युद्ध छिड़ने की स्थिति में हमारा बचाव करेंगे।
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राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, आआपा, कांग्रेस, भाजपा, आदि के शीर्ष नेता तथा अनेक बिकाऊ- कार्यकर्ता आदि ज्यूरी सिस्टम, संपत्ति कर आदि का विरोध करते हैं, इसका कारण यह है कि इनका कैरियर तथा मीडिया द्वारा चलाया जानेवाला प्रचार अभियान आपराधिक तथा अनैतिक कार्यों में संलिप्त रहने वाले संभ्रांत वर्ग (elit) पर निर्भर करता है, जिनकी स्वार्थ- पूर्ति इन कानून ड्राफ्टों के भारत में लागू होने से बाधित हो जाएगी।