Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate
कांग्रेस भारतीय अर्थव्यवस्था को अमेरिकी संभ्रांत वर्ग को सौपना चाहती थी। क्या अब नमो अर्थव्यवस्था को जापानी संभ्रांत वर्ग को सौपना चाहते हैं? इसके समाधान हेतु मेरा प्रस्ताव है कि बिना किसी को करों में कोई छूट दिए सब पर समान कर प्रणाली लागू की जाये, जिससे विकास और उन्नति का मार्ग प्रशस्त होगा।
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शुरूआती दृश्य से लगता है कि नमो की योजना जापानी संभ्रांत वर्ग को करों में छूट देने की है, ठीक उसी प्रकार जैसा कि कांग्रेस ने यूएसयूके संभ्रांत वर्ग के लिए किया था।
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कांग्रेस द्वारा यूएसयूके संभ्रांत वर्ग को दिए जाने वाले कर राहतों से एक बड़ी समस्या उठ खड़ी हुई। इसके कारण भारतीय नागरिकों पर करों का बोझ बढ़ जाता है। जैसे हर बार जब सेज़ के अंतर्गत अथवा मॉरीशस की कोई कंपनी करों में छूट प्राप्त करती है तो उसकी कीमत अन्य व्यक्तियों को बढ़ी हुई दर से कर देकर चुकानी पड़ती है। हर बार जब यूएसयूके संभ्रांत वर्ग को सरकारी भूभाग कम कीमत पर प्राप्त होता है, किसी अन्य भारतीय को उसके बदले भूमि के लिए बढ़ी हुई कीमत अथवा अधिक कर चुकाना पड़ता है। कर राहत के गणित में योग हमेशा शून्य होता है-- जब X कम कर चुकाएगा, तो Y को ज्यादा कर चुकाना होगा।
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अतः यदि नमो की योजना जापान तथा कोरिया के संभ्रांत वर्ग को करों में छूट देने की है, तो---
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(a) यदि अमेरिकी संभ्रांत वर्ग की तुलना में जापानी संभ्रांत वर्ग कम बुरा साबित होता है, तो नमो भी कांग्रेस से कम बुरे साबित होंगे।
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(b) यदि जापानी संभ्रांत वर्ग भी अमेरिकी संभ्रांत वर्ग जितना ही बुरा साबित होता है, तो नमो भी कांग्रेस जितने ही बुरे साबित होंगे।
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जो लोग यह सोचते हैं कि अमेरिकी संभ्रांत वर्ग की तुलना में जापानी संभ्रांत वर्ग कम बुरा है, वे नाजी युद्ध तथा पूर्वी एशिया एवं सुदूर पूर्व एशिया के युद्धों के बारे में कृपया पढ़ कर जानकारी लें।
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इसके लिए मेरा प्रस्तावित समाधान यह है कि हम कार्यकर्ता मतदाताओं से अनुरोध करें ताकि वे अपने सांसद को एसएमएस द्वारा आदेश भेजें कि सभी कंपनियों के लिए समान दर से कर लागू हो, चाहे वे किसी भी स्थान की हों, चाहे वे सेज़ के अंतर्गत हों अथवा नहीं। साथ ही कम्पनियाँ रूपये, स्वर्ण अथवा चांदी के रूप में लाभ लेकर जा सकती हैं, किन्तु सरकार उन्हें डॉलर नहीं देगी। तथा स्वर्ण एवं चांदी जैसे धातुओं पर 20% का एग्जिट कर लागू होना चाहिए। इसके अतिरिक्त हमें ऐसे कानून ड्राफ्टों की भी आवश्यकता है जो हम नागरिकों को यह समझने में समर्थ बनाये कि कौन सी कंपनी तथा उसका कितना हिस्सा विदेशी है। अतः सभी कंपनियों का स्वामित्व सम्बन्धी विवरण सार्वजनिक होना चाहिए। इस कानून की विस्तृत जानकारी के लिए rahulmehta . com \ 301.htm पर WOIC शब्द डालकर सर्च करें। तथा विदेशी कंपनियों पर भारत की निर्भरता कम करने के उपाय जानने के लिए कृपया अध्याय- 20 देखें।