Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate
1. दिल्ली में एके का मत प्रतिशत दिसंबर- 2013 के 27% की तुलना में बढ़कर मई- 2014 में 33% तक पहुँच गया!! अतः वे आगामी विधानसभा चुनावों में जीत सकते हैं। इसका उपाय है बिकाऊ मीडिया मुक्त भारत, जो कि राइट टू रिकॉल दूरदर्शन चेयरमैन, तथा दूरदर्शन कर्मचारियों पर ज्यूरी सिस्टम लागू करने पर संभव है।
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2. यदि गडकरी, या उनकी ओर से कोई और व्यक्ति न्यायाधीश अथवा उससे जुड़े किसी वकील को पैसे नही देते तो न्यायाधीश मात्र तारीख पर तारीख देता जायेगा, और कभी यह देखने की जहमत नही उठाएगा कि आरोपी उपस्थित हो रहा है या नही। जब तक कोई न्यायाधीश को पैसे नही देता तब तक न्यायालय में कुछ भी आगे नही बढ़ता। अतः आवश्यक निर्णयों को पाने के लिए किसी न किसी व्यक्ति ने न्यायाधीश को पैसे दिए होते है। संभव है, एके ने स्वयं को गिरफ्तार कराने के लिए न्यायाधीश को पैसे दिए हों ताकि उनका प्रचार हो सके। किन्तु गडकरी के वकील के पास भी यह विकल्प था कि वे न्यायाधीश से अनुरोध करते कि वे एके द्वारा न्यायालय में उपस्थित होने की दी जा रही स्व- गारंटी को स्वीकृत कर लें। इस सन्दर्भ में गडकरी ने शायद जानबूझकर यह गलती की।
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3. नमो के पास अपने शपथ ग्रहण के अवसर पर भव्य समारोह आयोजित करने का बहुत समय है। किन्तु उनके पास जनगणना विभाग से यह कहने का समय नही है कि वे जनगणना- 2011 के धर्म/ भाषा सम्बन्धी आंकड़े जारी करें। नमो- भक्तों के पास भी उनसे इन आंकड़ों को जारी करने के लिए कहने का समय नही है।
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1. दिल्ली में एके का मत प्रतिशत दिसंबर- 2013 के 27% की तुलना में बढ़कर मई- 2014 में 33% तक पहुँच गया!! भाजपा का मत प्रतिशत भी बढ़ा जिससे उसे लोकसभा की सभी 7 सीटों पर विजय प्राप्त हुई। किन्तु आगामी विधानसभा के पुनः- आयोजित चुनावों में, जो कि अक्टूबर- 2014 के आस- पास संभावित है, नमो लहर नही होगी। अतः सब कुछ इस बात पर निर्भर होगा कि बिकाऊ मीडिया के प्रायोजक किस प्रकार के राग का आलाप करते हैं। यदि वे चाहेंगे कि दिल्ली विधानसभा चुनावों में एके की जीत हो, तो वे गैस कीमतों के बढ़ने के मुद्दे का जोर- शोर से प्रचार करेंगे जिससे जनमानस में एके नायक तथा नमो खलनायक के रूप में उभरेंगे। किन्तु यदि नमो बहुराष्ट्रीय कंपनियों के शर्तों पर चले तो बिकाऊ मीडिया एके को कम महत्व देगा जिससे उन्हें वोट भी कम मिलेंगे।
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राजनीति में मतदाता तक पहुंचना सबसे महत्वपूर्ण है। एके की मतदाताओं तक प्रत्यक्षतः पहुँच लगभग शून्य है, और उनकी पहुँच पूरी तरह फोर्ड फाउंडेशन एनजीओ के माध्यम से है, जो कि सऊदी पैसे से चलने वाले मौलवियों व बिकाऊ मीडिया के द्वारा गरीबों के बीच काम करते हैं। किन्तु भाजपा तथा नमो की प्रत्यक्ष पहुँच मतदाता तक मात्र 5% है-- जो कि शाखा जानेवाले समर्थक तथा उनके नजदीकी रिश्तेदार एवं मित्र होते हैं। उदहारण के लिए राष्ट्रिय स्वयं सेवक संघ एवं विहिप द्वारा प्रकाशित मासिक पत्रिका की पूरे गुजरात में 100,000 से भी कम प्रतियां बिकती हैं!! भाजपा तथा नमो की बाकी की पहुँच मतदाता तक बिकाऊ मीडिया के माध्यम से ही है। अतः बिकाऊ मीडिया किसी भी दिन दिल्ली में सत्ता परिवर्तन करा सकता है।
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राष्ट्र एक तरह से विदेशी पैसों से बिके मीडिया के ठगों के हाथों बंधक है। इसका कोई समाधान नमो के पास नही है। वस्तुतः पिछले 6 महीने में नमो ने जितनी अधिक बिकाऊ मीडिया द्वारा दिए गए कवरेज का उपयोग किया है, उससे पता चलता है कि उन्होंने भी इस बिकाऊ मीडिया पर निर्भर होना स्वीकार कर लिया है।
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इसका एक ही समाधान मै प्रस्तावित करता हूँ, और वह है- "बिकाऊ मीडिया मुक्त भारत।" जहाँ बिकाऊ मीडिया पर कोई कानूनी प्रतिबन्ध तो नही होगा, किन्तु इसका असर लोगों पर पड़ना काफी कम हो जायेगा। कैसे? ऐसा दूरदर्शन के चेयरमैन पर राइट टू रिकॉल, दूरदर्शन कर्मचारियों पर ज्यूरी सिस्टम आदि लागू कर के संभव है। कृपया अधिक जानकारी के लिए rahulmehta . com / 301.htm का अध्याय- 10 देखें।
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2. न्यायाधीश ने एके से 10000 रू. की जमानत की राशि जमा करने को कहा, जबकि एके स्व- अनुबंध/ स्व- गारंटी पर अड़े रहे। गडकरी के वकील के पास यह विकल्प था कि वे एके की यह स्व- गारंटी स्वीकार कर लेते। मुझे पता नही उन्होंने इस विकल्प का उपयोग किया या नहीं। यदि नही तो उन्होंने एक बड़ी युक्तिपूर्ण गलती की। ऐसी गलतियां तब होती हैं जब नेता ने स्वयं कभी भी कार्यकर्ता के तौर पर काम नही किया हो, तथा वह संभ्रांत वर्ग के समर्थन से सीधे सत्ता में आ गया हो। गडकरी को इसलिए एके की लोकप्रियता बढ़ाने के लिए रास्ता बनाने के लिए ऐसा करना पड़ा।
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3. नमो के पास अपने शपथ ग्रहण के अवसर पर भव्य समारोह आयोजित करने का बहुत समय है। किन्तु उनके पास जनगणना विभाग से यह कहने का समय नही है कि वे जनगणना- 2011 के धर्म/ भाषा सम्बन्धी आंकड़े जारी करें। नमो- भक्तों के पास भी उनसे इन आंकड़ों को जारी करने के लिए कहने का समय नही है।समाधान? मैं किसी अन्य पोस्ट में इस सम्बन्ध में लिखूंगा।
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