Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate
जनसंघ का मूल झंडा (पताका) पूर्णतः नारंगी (भगवा) रंग का था। साथ ही यह चौकोर न होकर तिकोना था। क्योकि सभी हिन्दू राजाओं, संतों आदि के झंडे तिकोने ही होते थे, तथा चौकोर झंडा प्रायः पश्चिम में उपयोग किया जाता था।
1980 में जब भाजपा की स्थापना हुई, इसका झंडा चौकोर होने के साथ- साथ कुछ भाग हरे रंग का भी था। तथा हरा रंग नारंगी के पहले था। कई आधिकारिक तस्वीरों में कमल का रंग भी नारंगी है, किन्तु इसकी निचली बाह्य पंखुरियों का रंग हरा होता है !! और यह हरा रंग एक मुख्य कारण है जिसके चलते बलराज मधोक जैसे पुराने समय के कई जनसंघियों ने भाजपा में शामिल होने से मना कर दिया।
सारांश यह है कि 1980 ई. में भाजपा ने केसरिया रंग को फीका किया, तथा नए घोषणापत्र में तो इससे नाता ही तोड़ लिया। यहाँ तक कि बिलकुल ज्वलंत समस्याओं, जैसे सभी धर्मों में बाल विवाह पर रोक लगाने, तीन तलाक पर रोक लगाने, तथा बहु विवाह रोकने हेतु कोई समयसीमा नही दी गयी है।
2012 के आरम्भ में ही भाजपा ने नया लोगो बनाया जिसमें शीर्ष भाग तो नारंगी था तथा निचला हिस्सा हरा था, किन्तु पूरे कमल का रंग सफ़ेद था !! सफ़ेद रंग क्रिश्चियन धर्म का प्रतीक है !!
आनेवाले कुछ साल हिंदूवादियों के लिए आघात एवं चिंता का विषय होंगे। तीन मंदिरों की तो बात ही भूल जाओ, यहाँ तक कि सभी धर्मों में बाल विवाह पर रोक, बहुविवाह, तीन तलाक, न्यायालय को गुजारा भत्ता तथा जनसँख्या नियंत्रण आदि पर निर्णय का अधिकार देने आदि जैसे ज्वलंत मुद्दे भी सत्ता की खिड़की से बाहर फेंक दिए जायेंगे।
इसके लिए समाधान मैं प्रस्तावित कर रहा हूँ कि हिंदूवादी (तथा स्वदेशी एवं राष्ट्रवादी) अपनी संस्था भक्ति जैसे आरएसएस/ भाजपा/ विहिप आदि की भक्ति छोड़ दे। तथा इसकी जगह वे कानून ड्राफ्टों पर ध्यान केंद्रित करें, जिससे सभी मुद्दे हल हो जायेंगे। मेरे द्वारा कई कानून ड्राफ्ट प्रस्तावित किये गए हैं। कृपया rahulmehta . com / 301.htm को डाउनलोड करें। मैंने इस सम्बन्ध में अत्यंत महत्वपूर्ण कानून ड्राफ्ट प्रस्तावित किया है जो कि मंदिरों की व्यवस्था सुधारने के उद्देश्य से बनाई गयी है। यह फेसबुक पर facebook. com / note.php ? note_id=10151972436171922 के नोट में आप पढ़ सकते हैं।
लेकिन यदि कार्यकर्ता संस्था भक्ति तक सीमित रहते हैं तो विनाश अवश्यम्भावी है।