Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate

एपल, माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, फेसबुक आदि कम्पनियाँ सैंकड़ो अच्छे सॉफ्टवेयर बनाती हैं। इसका कारण यह नही है कि इनके पास अच्छे सीईओ हैं, बल्कि इनके पास हजारों अच्छे प्रशिक्षित इंजीनियर हैं जो कि अच्छे सॉटवेयर ऍप्लिकेशन लिख सकते हैं तथा दूसरी कंपनियों के अच्छे सॉफ्टवेयर का विश्लेषण भी कर सकते हैं। ठीक इसी प्रकार किसी देश के राजनीतिज्ञ अच्छे कानून ड्राफ्ट सिर्फ तभी बना सकते हैं यदि दसियों हजार कार्यकर्त्ता ऐसे हों जो अच्छे कानून ड्राफ्ट लिखने तथा उनके विश्लेषण की योग्यता रखते हैं। दुर्भाग्य से, कांग्रेस, भाजपा, आआपा आदि सभी पार्टियां अपने कार्यकर्ताओं से अपने दिमाग बंद रखने, कानून ड्राफ्ट नही पढ़ने तथा दूसरे देशों के कानून ड्राफ्टों का विश्लेषण नही करने को कहते हैं। तथा कांग्रेस, भाजपा, आआपा आदि सभी पार्टियां अपने कार्यकर्ताओं से कहते हैं कि वे नेता के चेहरे का टैटू बनवाएं, नारेबाजी करें, टोपी पहनें, मुखौटे पहनें, झाड़ू लगाएं, तथा कुछ और न करें। अतः इस प्रकार की राजनीति कभी भी हजारों प्रशिक्षित दिमाग नही बना सकती जिनकी आवश्यकता राष्ट्र की उन्नति हेतु अच्छे कानून ड्राफ्ट बनाने के लिए होती है।
कल्पना कीजिये क्या होगा यदि माइक्रोसॉफ्ट के सभी इंजीनियर सिर्फ नारेबाजी करें तथा यह साबित करने की कोशिश करें कि बिल गेट्स ही सबसे अच्छा सीईओ है, और अपने प्रतियोगियों के कोड और सॉफ्टवेयर के बारे में जानकारी न रखें। अब कल्पना करें कि एप्पल कंपनी के सभी इंजीनियर एप्पल कैप पहनें या स्टीव जॉब्स की मास्क पहनना शुरू कर दें तथा कोड लिखने पढ़ने में समय न दें, तो क्या होगा। ऐसे में वह कंपनी एक भी अच्छा प्रोडक्ट नही बना सकती।

1998 से लेकर अब तक, मैं भारत में एकमात्र ऐसा सीनियर कार्यकर्ता रहा हूँ जिसने हमेशा अपने जूनियरों को प्रशिक्षित किया है कि वे शत्रु राष्ट्रों के ऐसे कानूनों को पढ़ें जिनके चलते ये राष्ट्र सशक्त बने, तथा ऐसे ड्राफ्टों को पढ़ें, समझें तथा विश्लेषण करें जो कि भारत में भी समान प्रकार की कानूनी व्यवस्था ला सकते हैं। अतः आज लगभग 100- 300 कार्यकर्ता ऐसे हैं जो कि राइट टू रिकॉल ड्राफ्ट, ज्यूरी सिस्टम ड्राफ्ट, संपत्ति कर ड्राफ्ट आदि के बारे में जानते हैं। अन्य सभी नेता अपने कार्यकर्ताओं से मात्र नारेबाजी आदि तक सीमित रहने को कहते हैं।

अतः संक्षेप में इसे इस प्रकार समझ सकते हैं कि भारतीय राजनीति एक कंपनी की तरह है, जहाँ कि अधिकांश कार्यकर्ता = इंजीनियर सिर्फ नारेबाजी, कैप लगाना, मास्क पहनना, झाड़ू लगाना, अपने नेता के चेहरे का टैटू लगाना आदि ही जानते हैं। अतः भविष्य अच्छा नही दिखता।

इसके लिए मैं यह समाधान प्रस्तावित करता हूँ कि कार्यकर्ता इस प्रकार की दिमाग बंद करने वाली गतिविधियों जैसे झाड़ू लगाना, मास्क पहनना, नारेबाजी, टोपी पहनना, आदि को बंद करें तथा समस्याओं का समाधान करने वाले ड्राफ्टों पर ध्यान केंद्रित करें। तथा मतदाताओं से भी अनुरोध करें कि सांसदों को URL के साथ एसएमएस द्वारा इन ड्राफ्टों के सम्बन्ध में आवश्यक आदेश भेजें। वरना हमारी राजनीति उस कंपनी की तरह हो जाएगी जहाँ इंजीनियर सिर्फ नारेबाजी जानते हैं और किसी कोड को लिखना न जानते हों।