Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate
Hindi translation of chap-7 of the article "कौन से कानून ड्राफ्ट मंदिरों के प्रशासन में सुधार ला कर सभी हिन्दू सम्प्रदायों को सिख धर्म की तरह सशक्त बना सकते हैं?"
Chap- 7. मंदिरों की संपत्ति पर मिशनरियों के कब्जे में उत्तराधिकार प्रथा किस प्रकार सहायक हुई?
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For link to translation of chap-1 to chap-3 pls see above link. This post has translation of chap-3. Trnslation is done by a friend of mine
मंदिरों में उत्तराधिकार ने एक दीर्घस्थायी समस्या को जन्म दिया। मैं यहाँ एक मंदिर का उदाहरण बिना उसका नाम लिए देना चाहूंगा। यह मंदिर लगभग 1000 वर्ष पूर्व निर्मित हुआ था, तथा उसका एक महंत था। उसके 5 बेटे थे जो कि उसके बाद महंत बने। उनमें से प्रत्येक कुछ समय के अंतराल पर चक्रीय क्रम से महंत की गद्दी पर बैठता था। फिर उन 5 में से प्रत्येक को 2 या 3 पुत्र हुए, यानी कुल मिलकर लगभग 12 पुत्र। उन पाँचों के मृत्योपरांत उनके ये 12 पुत्र, यानी प्रथम महंत के प्रपौत्र उत्तराधिकारी बने। अब ये 12 भी बारी बारी से कुछ समय के अंतराल पर चक्रीय क्रम से महंत की गद्दी पर बैठते थे। किन्तु उनकी भागीदारी समान नहीं रहती हो सकती थी। जैसे- यदि A के 2 पुत्र A1 तथा A2 थे एवं B के 4 पुत्र B1, B2, B3 तथा B4 थे। ऐसी स्थिति में A1 या A2 की भागीदारी B1, B2, B3 या B4 की तुलना में ठीक दोगुनी हो जायेगी। अक्सर ऐसा भी होता है कि किसी महंत का कोई पुत्र न हो और उसकी मृत्यु हो जाये। अब ऐसे में यदि उसने पुत्र गोद लिया है या पुत्र का जन्म उसकी मृत्यु के उपरान्त हुआ हो तो यह ऐसे में वह महंत बनेगा या नहीं इस पर कानूनी विवाद चल सकता है। साथ हीं भागीदारी पर भी विवाद हो सकता है। अतः इस तरह से तो आज से लगभग 20- 30 पीढ़ियों के बाद मंदिर के लगभग 500 महंत हो सकते हैं। साथ हीं उत्तराधिकार सम्बन्धी 50 से अधिक अनसुलझे मुकदमे भी न्यायालय में चल रहे होंगे। इन मुकदमों का बहाना बनाकर भारत सरकार मंदिरों का अधिग्रहण कर सकती है। चूँकि भारत के प्रमुख राजनीतिक दल मिशनरी के दलाल हैं, अतः मंदिरों की दान द्वारा प्राप्त आय मिशनरियों द्वारा चलायी जा रही धर्मार्थ संस्थाओं के पास चली जाती हैं। इस प्रकार मिशनरियों को मंदिरों से पैसे प्राप्त होते हैं जिसका उपयोग वे हिन्दूओं का धर्मपरिवर्तन कर उन्हें क्रिश्चियन बनाने में करते हैं।
इस प्रकार मंदिरों में उत्तराधिकार के चलते दसियों विवाद खड़े होते हैं जिससे कि सरकार द्वारा मंदिरों की संपत्ति पर कब्ज़ा करना आसान हो जाता है।