Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate

(Hindi translation by friend of mine. Th original English post was written 4 days ago)

वाराणसी नरेंद्र मोदी (नमो), हिंदूवाद, एवं स्वदेशी के लिए एक असुरक्षित सीट है। नमो के समर्थकों को उन्हें यह सलाह जल्दी से जल्दी देनी चाहिए कि वे वाराणसी की जगह गुजरात की जगह १०- १५ सुरक्षित सीटों में से किसी से भी चुनाव लड़ें।

२००९ में मुरली मनोहर जोशी ने वाराणसी से मात्र ३१% वोट प्राप्त किये थे।

इस सीट पर लगभग ३०% "गैर हिन्दू" मतदाता हैं। साथ ही लगभग १०% दलित तथा २०% अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाता हैं। अभी नमो की काफी लोकप्रियता दलितों एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के बीच है। किन्तु दलितों, अन्य पिछड़ा वर्ग, एवं गैर हिन्दुओ तक कार्यकर्त्ता स्तर पर भाजपा की पहुँच बहुत नही है। गैर हिन्दुओ के बीच मुख़्तार अंसारी जैसे अपराधियों की पहुँच है। दलितों के बीच कांग्रेस व बसपा की पैठ है, वहीँ अन्य पिछड़ा वर्ग के बीच मुलायम सिंह यादव का मजबूत नेटवर्क है। इतना हीं नहीं, हिन्दू मध्य वर्ग के मतदाताओं के बीच अरविन्द केजरीवाल की लोकप्रियता से स्थिति और भी चिंताजनक हो जाती है। अतः वाराणसी से चुनाव लड़ने की सूरत में नमो बिकाऊ मिडिया पर बहुत ज्यादा निर्भर हो जायेंगे ताकि अरविन्द केजरीवाल को हिन्दू मध्य वर्ग के मतदाताओं के बीच बहुत प्रभावशाली तरीके से पेश न किया जाये। तथा यह भी जरुरी होगा कि सपा/ बसपा यह सुनिश्चित करें कि उनके वोट कांग्रेस की ओर न जाएँ।

यदि नमो वाराणसी से भाजपा के उम्मीदवार होते हैं तो वे अगले २ महीने तक हिंदुत्ववाद का 'ह' तथा स्वदेशी का 'स' तक का उच्चारण नही कर पाएंगे। अतः मेरे विचार से नमो, हिंदूवाद एवं स्वदेशी के लिए वाराणसी गलत चयन है। गुजरात में सामान्य कोटे की २० सीटें हैं। इनमें से १५ पर नमो बिना किसी प्रयास के जीत सकते हैं। साथ ही पूरे भारत में भी सुरक्षित सीटें हैं। वाराणसी सुरक्षित सीट नही है। नमो तक यह सुझाव पहुँचाना चाहिए कि वे अपने निर्णय पर पुनर्विचार करें।