Pawan Jury BhilwaraRj

देव पुरुष अक्षय कुमार -- दोयम दर्जे की अभिनय क्षमता के बावजूद कैसे अक्षय कुमार जी ने अपनी सहज बुद्धि एवं लगन से फिल्म इंडस्ट्री में ऊँचा मुकाम हासिल किया ?
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तब अक्षय कुमार जी की फिल्में कुछ खास अच्छा नहीं कर रही थी। सीमित कमाई में से भी जब एक बड़ा हिस्सा कर के रूप में सरकार को चुकाना पड़ जाता है तो व्यक्ति इसे बचाने का प्रयास करता ही है। उनके कर सलाहकार ने सुझाया कि -- "भारत एवं मोरिशस के बीच हुयी ट्रिटी के अनुसार यदि कोई विदेशी नागरिक मोरिशस में कम्पनी खोलकर भारत में निवेश करे तो भारत में होने वाली कमाई पर उसे कोई भी टेक्स नहीं चुकाने होते है"। अत: यदि आप अपनी आय का 30% बचाना चाहते है तो भारत की नागरिकता छोड़ कर किसी अन्य देश की नागरिकता ले लीजिये।
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साहस एवं निर्लिप्त व्यावसायिक बुद्धि :

अक्षय कुमार जी ने सलाह पर अमल करते हुए भारत की नागरिकता छोड़कर कनाड़ा की नागरिकता ग्रहण की। इसमें किसी विशेष कौशल की बात नहीं है। कोई भी व्यक्ति जो भारत देश की नागरिकता छोड़ना चाहे छोड़ सकता है। किन्तु कई व्यक्ति रुपया बचाने के चक्कर में इतना साहसिक कदम नहीं उठा पाते, और टेक्स चुकाने का घाटा खाते रहते है। तब उनके कुछ स्वजनों ने उन्हें सलाह दी थी कि भगवान का दिया सब कुछ है, अत: चंद रुपयों के लिए देश की नागरिकता छोड़ देना ..... ! किन्तु अक्षय कुमार जी का आर्थिक दृष्टिकोण परिपक्व था, और इसीलिए वे यह साहसिक फैसला कर पाए। एक भीरु व्यक्ति देश राग आदि के चकमे में आकर शायद अपना फैसला पलट देता। इस फैसले से हमें उनके चरित्र में साहस एवं एक अच्छी व्यावसायिक बुद्धि दोनों गुणों का समान मिश्रण देखने को मिलता है।
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क़ानून व्यवस्थाओ के बारे में सूचना रखना :

अक्षय कुमार जी ने कनाडा का नागरिक बनकर मोरिशस में अपनी कुछ कम्पनियां खोली एवं उनके माध्यम से भारत में निवेश करने लगे। इस निवेश से होने वाली आय पर उन्हें कोई टेक्स नहीं चुकाने होते थे। साथ ही उनकी फिल्मे भारत से बाहर जो व्यवसाय करती थी उन पर भी उन्हें भारत में कोई टेक्स नहीं चुकाने होते थे। और उन्हें इस आय पर कनाडा में भी कोई टेक्स नहीं चुकाने होते थे। क्योंकि मोरिशस ट्रीटी के अनुसार यदि कोई विदेशी नागरिक मोरिशस की कम्पनी के माध्यम से भारत में आय करता है तो उसे या तो भारत में टेक्स चुकाने होते है या मोरिशस में। और चूंकि मोरिशस में आयकर १-२% है अत: अक्षय कुमार जी आयकर मोरिशस में ही चुका देते थे। इस तरह उन्हें कनाडा में भी टेक्स नहीं चुकाना होता था।
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यह उनके इन्फोर्मेशन नेटवर्क को दर्शाता है। भारत में कई अभिनेताओ की जानकारी का दायरा सिर्फ अभिनय तक ही सीमित है। उन्हें यह जानकारी ही नहीं है कि किस देश में क्या क़ानून है और इनका इस्तेमाल करके कैसे पैसा बचाया जा सकता है। और इसी वजह से आप देखेंगे कि नाना पाटेकर एवं उनके जैसे कई कलाकार जानकारी के अभाव में टेक्स चुकाने का यह घाटा उठा रहे है। लेकिन अक्षय कुमार जी ने न सिर्फ अपने इतने बीजी शेड्यूल के बावजूद यह जानकारी जुटा कर क़ानून व्यवस्थाओ में मौजूद लूप होल्स का पता लगाया बल्कि इन पर अमल भी किया। और इस तरह जहाँ अन्य अभिनेता सिर्फ पैसा बना रहे थे वहीँ पर अक्षय कुमार जी पैसा बना भी रहे थे और बचा भी रहे थे।
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मिडिया मेनेजमेंट और चतुराई :

चाहे आप न जानना चाहे तब भी मीडिया आपको यह बताते रहता है कि अमुक अभिनेता को तुरई की सब्जी और लौकी का भरता बहुत पसंद है और वह चड्डी कौनसे ब्रांड की वापरता है। अक्षय कुमार जी 2009 से कनाडाई नागरिक है किन्तु क्या आपने कभी किसी भी मेन स्ट्रीम मीडिया में इस बारे में पढ़ा है ? आप समाचार पत्रों एवं टीवी पर अक्षय कुमार जी के बारे में तमाम सूचनाएं पढ़ एवं देख सकते है। सिवाय एक सूचना के -- कि वे भारत की नागरिकता छोड़कर कनाडा की नागरिकता ले चुके है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे जादूगर है। दरअसल यह उनका मीडिया प्रबंधन है। आप कल्पना कर सकते है कि अक्षय कुमार जी ने किस कौशल से इस तथ्य को फैलने से रोका होगा कि वे भारतीय नहीं है। विदेशी है।

पिछले 8 वर्षो में वे दर्जनों इंटरव्यू दे चुके है और उन पर टनो लेख लिखे जा सके है। किन्तु आज तक उन्हें इस सवाल का सामना नहीं करना पड़ा कि वे भारत की नागरिकता क्यों छोड़ चुके है !!! इतने लम्बे अरसे के दौरान सिर्फ दो बार वे मुश्किल में फंसते नजर आये। पहली दफा जब वे ब्रिटिश एयरपोर्ट पर धर लिए गए थे और इकोनोमिक टाइम्स ने इस बारे में एक ऑनलाइन आर्टिकल लिख दिया था और यह भी जिक्र कर दिया था कि उनके पास कनाडाई पासपोर्ट है। पर आर्टिकल अंग्रेजी में था और सिर्फ ऑनलाइन प्रकाशित हुआ था और अक्षय कुमार जी के ज्यादातर प्रशंसक सिर्फ हिन्दी प्रिंट अखबारों और हिंदी न्यूज चैनल्स से ही "फीडिंग" लेते है अत: उन्हें खास दिक्कत पेश नहीं आयी।
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दूसरी दफे एक प्रेस कोंफ्रेंस के दौरान किसी नामालूम सी पत्रकार ने उनसे नागरिकता के बारे में सवाल कर दिया था। किन्तु अक्षय कुमार जी ने बहुत ही सफाई से और बहुत ही संक्षेप में यह जवाब दे दिया कि -- its honorary ! कोंफ्रेंस में मौजूद प्रत्येक व्यक्ति यह जानता था कि कनाड़ा द्वारा अब तक सिर्फ 8 आदमियों को होनोरेरी नागरिकता दी गयी है। और अक्षय कुमार उन आठ में शामिल नहीं है। किन्तु अक्षय कुमार जी ने बाद को अपनी त्वरित बुद्धि से इस बात को तत्काल मेनेज किया कि भारत के किसी भी मुख्य मिडिया समूह में इस आशय की खबर प्रकाशित नहीं की जाए कि --

१) अक्षय कुमार जी भारत की नागरिकता कभी के छोड़ चुके है और वे एक विदेशी व्यक्ति है,
२) अक्षय कुमार जी ने यह बात कभी भी नहीं* बतायी है कि वे कनाडाई नागरिक है,
३) अक्षय कुमार जी इस बात को लगातार छुपाते आ रहे है कि वे भारत की नागरिकता छोड़ चुके है ,
४) और जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो वे झूठ भी बोल रहे है !!
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(*) दरअसल एक्टिविस्ट सर्किट में विवाद बढ़ने पर उन्होंने एक प्रायोजित इंटरव्यू में यह बात स्वीकार की कि -- "भारत की तुलना में कनाड़ा की सड़के चौड़ी एवं खुली है, कनाड़ा की जलवायु भी पोषक है। मैं कनाड़ा को अपने दिल के करीब पाता हूँ। इसीलिए मैंने कनाडा की नागरिकता ले ली है"। किन्तु अपने प्रशंसको की नब्ज पर अक्षय कुमार जी पकड़ इतनी गहरी है कि उन्होंने यह साक्षत्कार भी अंग्रेजी में ही अग्रेजी अखबार को ही दिया। इसका कोई वीडियो उपलब्ध नहीं है।

अक्षय कुमार जी इस बात को जानते है कि उनके प्रशंषक सिर्फ हिन्दी में "देखते" है। अत: वीडियो होने से और वह भी हिंदी में होने से यह सूचना भारत भर में फैले उनके प्रशंसको तक पहुँच जायेगी और उनकी फोलोइंग घट जाएगी। किन्तु कुछ भी नहीं कहने से मामला तूल पकड़ेगा। अत: उन्होंने अपनी सूक्ष्म बुद्धि से इसे इस तरह मैनेज किया कि कह भी दिया किन्तु इस सूचना को व्यापक होने से रोक दिया।
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मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि, अक्षय कुमार जी में अद्भुत प्रबंधकीय गुण है। जितना उन्होंने मेनेज किया है उतना करना किसी असाधारण व्यक्ति के लिए भी आसान नहीं है। तो आखिर अक्षय कुमार मीडिया को इतने अच्छे से मेनेज कैसे कर पाते है ? उन्होंने अनुशासन के साथ इस बात पर काफी मेहनत की है कि मीडिया को संचालित करने वाले लोगो से मधुर सम्बन्ध बना कर रखे जाए।
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दूरदृष्टा :
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तब बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के मालिक एवं मिशनरीज ने भारत में हिन्दू धर्म की खिल्ली उड़ाने और इस पर प्रहार करने के लिए ओह माय गॉड नामक फिल्म में मुख्य भूमिका के लिए विभिन्न कलाकारों को एप्रोच कर रहे थे। किन्तु कुछ इतनी गलीज़ पटकथा पर काम करने को राजी नहीं थे और कुछ फिल्म की थीम देखकर इस वजह से पीछे हट गए थे कि उन्हें हिंदूवादी संगठनो के हाथो सचमुच में जूतें खाने पड़ सकते है। फिल्म में आरती के दीपक को फूंक मारकर बुझाये जाने, मूर्ती को तोड़ने से लेकर श्री श्री रविशंकर का उपहास करने, साधुओ को चोर-उच्चका-अय्याश बताने, शिवलिंग पर दूध न चढाने की प्रेरणा देने आदि की तरह के कई गलीज दृश्य दिखाए जाने थे। अक्षय कुमार जी को जब सूचना हुयी तो उन्होंने इस फिल्म के लिए लॉबीइंग शुरू कर दी। और इसकी मुख्य भूमिका हासिल करने में सफल भी हुए।
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अक्षय कुमार जी ने इस बात को ताड़ लिया था कि यदि वे इस भूमिका को लपक लेते है तो उनके कैरियर में उतना उछाल आ जाएगा जितना वे पूरी जिन्दगी में हासिल नहीं कर पायेंगे। वे जानते थे इस फिल्म को मिशनरीज प्रायोजित कर रही है और भारत का सारा मीडिया मिशनरीज एवं बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के नियंत्रण में है। यदि मिशनरीज उनसे खुश हो जाए तो उनके आशीर्वाद से उन्हें आने वाले समय में अच्छे निर्देशकों के साथ काम करने के असीमित अवसर मिलेंगे, क्योंकि पूँजी निवेशको की कोई कमी नहीं रह जायेगी। साथ ही यदि मीडिया मालिक चाहे तो वे किसी भी कलाकार की छवि पूरे देश में सकारात्मक बना सकते है। कुल मिलाकर उन्होंने इसमें मौजूद एक बड़े अवसर को देख लिया था।
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मिशनरीज द्वारा संचालित कम्पनी वायाकोम द्वारा फंडेड यह फिल्म हिट रही। और अक्षय कुमार जी का कैरियर चमक उठा। हालांकि फिल्म को UAE एवं मलेशिया में बैन का सामना करना पड़ा था।

अच्छी फिल्मे बनना अलग बात है किन्तु इस फैसले से अक्षय कुमार जी ने यह सुनिश्चित कर लिया था कि उन्हें पेड मीडिया से सकारात्मक कवरेज मिलता रहेगा, उनकी छवि बेहतर करके पेश की जायेगी, उनकी फिल्मो को अच्छा प्रमोशन मिलेगा और इन सबके नतीजे में उनका प्रशंसक वर्ग बढेगा।
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अक्षय कुमार जी का राष्ट्रवादी चरित्र :
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फिल्मो से इतर अपना प्रशंषक वर्ग बढ़ाने के लिए और चर्चा में बने रहने के लिए कई समझदार कलाकार कुछ गैर फ़िल्मी गतिविधियाँ भी संचालित करते है। सामजिक समस्याओ को "उठाने", मानवतावाद और चैरिटी आदि के धंधे में तब आमिर खान , सलमान खान आदि अभिनेता पहले से जमे हुए थे। हिन्दुवादी के जेस्चर एडोप्ट करने में समस्या यह है कि इससे मिशनरीज एवं बहुराष्ट्रीय कम्पनियों का समर्थन खोना पड़ता है तथा साथ ही सरकारे बदलने के साथ यह वाद ट्रेंड से बाहर-अंदर होते रहता है। साथ ही यह जब यह एक वर्ग को जोड़ता है तो एक अन्य वर्ग को दूर भी छिटका देता है।

किन्तु राष्ट्रवाद कभी ट्रेंड से बाहर नहीं होता। और यह सभी वर्गों को हर हाल में अपील करता है। विभिन्न वादोंयो के बीच "राष्ट्रवादी" का एक अलग और सबसे ऊँचा मुकाम है। यह वाइल्ड कार्ड एंट्री की तरह है। धर्म की काट सिर्फ राष्ट्रवाद ही है। राष्ट्रवादी के पास विशेषाधिकार होते है। वह किसी भी व्यक्ति को गद्दार कह सकता है। देश छोड़कर जाने की सलाह दे सकता है आदि। कुल मिलाकर राष्ट्रवादी देशहित का सबसे बड़ा दावेदार होता है। यह तय है कि यदि आप किसी "राष्ट्रवादी" से सवाल भी करेंगे तो निश्चित ही आप जूते खायेंगे।
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अक्षय कुमार जी भारत राष्ट्र की नागरिकता छोड़ चुके थे और इस सूचना के सामने आने से उन्हें एवं उनके प्रशंषको को कभी भी विरोध का सामना करना पड़ सकता था। दूरदर्शिता दिखाते हुए उन्होंने राष्ट्रवाद से प्रेरित फिल्मे करना शुरू किया, एवं निजी जीवन में भी इस तरह की गतिविधियाँ करनी शुरू की जिससे उनका राष्ट्रवाद निकलकर आये । लेकिन यदि वे इन फिल्मो में समाधान मूलक वास्तविक सूचनाएं दे देते तो उन्हें बहुराष्ट्रीय कम्पनियो / मिशनरीज / धनिको / राजनेताओ / जजों आदि से प्रतिरोध का सामना करना पड़ता। अत: उन्होंने इस बात का ध्यान रखा कि ऐसी सूचनाएं जनता तक न जाए।
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उदाहरण के लिए उन्होंने अपने दर्शको को कभी नहीं बताया कि भारत की अदालतें इसीलिए भ्रष्ट एवं सुस्त है क्योंकि भारत के नागरिको के पास जजों को नौकरी से निकालने का अधिकार नहीं है। और अमेरिका की अदालतें इसी वजह से बेहतर काम करती है क्योंकि वहां के नागरिको के ऐसा अधिकार है। इसी तरह उन्होंने नानावटी मामले पर बनायीं गयी फिल्म में इस जानकारी को छिपा लिया कि जूरी मंडल ने नानावटी को इसीलिए निर्दोष ठहरा दिया था क्योंकि ज्युरर्स के पास सजा की अवधि तय करने का विकल्प नहीं था। यदि वे नानावटी को दोषी ठहराते तो उन्हें फांसी हो जाती। और नानावटी किसी भी लिहाज से मृत्युदंड के हकदार नहीं थे।
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इसी तरह उन्होंने शौचालय की समस्या को तो "उठाया" किन्तु फिल्म में इस बात की सूचना नहीं दी कि भारत में 30 करोड़ लोगो के पास पक्का घर नहीं है, पानी की लाइन नहीं है, बिजली नहीं है और उनकी आमदनी 100 रूपये प्रतिदिन से भी कम है। और इसकी मुख्य वजह यह है कि भारत में वेल्थ टेक्स का क़ानून नहीं है, युनिवर्सल मीटरिंग का क़ानून नहीं है और मेयर एवं सरपंच को नौकरी से निकालने का अधिकार नागरिको के पास नहीं है। इन कानूनों के अभाव के कारण भ्रष्टाचार है और इसी भ्रष्टाचार की वजह से भारत में सेनिटेशन की समस्या है। बल्कि उन्होंने इस बात का "प्रचार" किया कि भारत में लोगो को खुले में शौच जाने की लत है और आम भारतीय जाहिल, गंवार एवं असभ्य है।
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तो अक्षय कुमार जी ने इस मोर्चे पर सबसे कमाल का प्रदर्शन किया। उन्होंने भारत में फैली अदालतों, सेनिटेशन आदि समस्याओ को "उठाया" एवं उठाकर पूरे विश्व में बेहद मनोरंजक तरीके से "फैलाया" !! और अपने खाते में उन्होंने यह उपलब्धि दर्ज कर ली कि वे भारत की विभिन्न समस्याओ को उठाने पर काम कर रहे है। उन्होंने इस बात पर किसी का ध्यान ही नहीं जाने दिया कि वे समस्याओ को "उठाने एवं फैलाने" पर तो काम कर रहे है लेकिन समाधान पर खामोश है। ऐसा कर पाना आसान नहीं होता। मिसाल के लिए , मिशनरीज के पालतू आमिर खान ने पीके में हिन्दू धर्म का जमकर मजाक बनाया किन्तु उन्हें इसके लिए काफी गालियाँ पड़ी। किन्तु ओह माय गॉड में यही सब करने के बावजूद अक्षय उलटे प्रशंषा बटोर कर ले गए !!! किन्तु यह अक्षय कुमार जी के अभिनय का करिश्मा नहीं है। बल्कि मेरे विचार में अक्षय कुमार जी अन्य अभिनेताओ की तुलना में ज्यादा चतुर एवं बुद्धिशाली है।
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अक्षय कुमार जी का मास्टर स्ट्रोक : सैन्यवाद
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क्या जरुरी है करे शिव की तरह विषपान हम भी ,
सिर्फ जामुन खा लिए और होठ नीले हो गए ,

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तिरंगा और सेना। अक्षय कुमार जी इस बात को काफी पहले समझ गए कि यदि आप राष्ट्रवादी / देशभक्त है तो इसका सबसे बड़ा सबूत है आप सैनिको के साथ अपने फोटो खिंचवाएं, भारत की सेना को दान दें एवं 15 अगस्त / 26 जनवरी के अलावा भी तिरंगे का इफरात में इस्तेमाल करे। यह देशभक्ति की पराकाष्ठा है। अंतिम सीमा। तो अक्षय कुमार जी जानते थे कि यदि वे भारत के नागरिक रहते हुए टेक्स देते है तो इसके कोई मायने नहीं होते। क्योंकि आय पर टेक्स देने का क़ानून है। यदि कोई व्यक्ति यह कहता है कि उसने भारत सरकार को इतना टेक्स दिया है तो उसे यह जवाब सुनने को मिल सकता है कि आपने टेक्स देकर कोई अहसान नहीं किया है। आपने टेक्स दिया क्योंकि आय पर टेक्स देने का क़ानून है। किन्तु जब आप सेना को सीधे दान देते है तो यह बात चर्चा में आ जाती है। और आपको उन लोगो पर बढत मिल जाती है जो भारत को आपसे 10 गुना टेक्स दे रहे है किन्तु अलग से सेना को नहीं दे रहे है।
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तो अक्षय कुमार जी ने भारत की नागरिकता छोड़कर टेक्स के जो 10 करोड़ बचाए। उसमे से 10 लाख भारत की सेना को दान किया और 90 लाख मीडिया को दिया ताकि इस बात को भारत भर में पहुँचाया जा सके कि, देखो अक्षय कुमार जी भारत की सेना को किस तरह सपोर्ट करते है !! आप अक्षय कुमार जी की किसी भी तरह से कोई भी आलोचना करेंगे तो उनके कई प्रसंशक तुरंत आपको ऐसी लाखों तस्वीरे भेज देंगे जिनमे वे सैनिको के साथ फोटो खिंचवा रहे है, और ऐसे दर्जनों न्यूज लिंक भेजेंगे जिसमें यह लिखा होगा कि कब कब अक्षय कुमार जी ने भारत की सेना को दान दिया है ! और एक सीमा के बाद भी यदि यह बात कहते रहेंगे कि वे विदेशी नागरिक है तो उनके प्रसंशक आपको गद्दार तक ठहरा सकते है। क्यों ? क्योंकि अक्षय कुमार सेना को दान देते है। मास्टर स्ट्रोक !!
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संक्षेप में : अक्षय कुमार जी ने अपनी छवि को जितनी सफाई से बुना है वैसा करने में अद्भुत अनुशासन एवं मेधा की जरूरत होती है। उन्होंने भारत की नागरिकता छोड़ी, इस तथ्य को छिपाया, इस बारे में झूठ बोला, मोरीशश में कम्पनियां खोलकर अपना टेक्स बचाया, हिन्दू धर्म की खिल्ली उड़ाने के लिए ओह माय गॉड और भारतीयों का पूरी दुनिया में उपहास करने के लिए टॉयलेट-एक प्रेम कथा जैसी गलीज फिल्में बनायी, भारत की नागरिकता छोड़ने का कारण यहाँ की गन्दी एवं तंग सड़को एवं दमघोंटू वातावरण को ठहराया , और इतना करने के बावजूद वे आज भारत के सबसे प्रबल राष्ट्रवादी एवं देशभक्त नागरिक है। और अक्षय कुमार जी का कमाल यह है कि वे भारत के नागरिक भी नहीं है। वे पहले विदेशी है जिन्होंने भारत में इतना ऊँचा मुकाम हासिल किया है।
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अपने इसी कमाल, सहज बुद्धि, आर्थिक समझ, साहसिक फैसलों एवं व्यावहारिक बुद्धि के कारण अक्षय कुमार जी आज सफलतम अभिनेताओ में माने जाते है। उनकी प्रतिष्ठा एक राष्ट्रवादी, देशभक्त और नैतिक उपदेशक के रूप में भी है। करोड़ो युवा उनको फोलो करते है, लाखों उनकी भक्ति करते है और हजारो उनके लिए अपनी जान देने पर उतारू है।
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महत्त्वपूर्ण बात :

सबसे गंभीर खतरा जिसे हम लगातार अनदेखा कर रहे है -- हमारी सेना आत्मनिर्भर नहीं है और हम आयातित हथियारों पर अपनी सेना चला रहे है। जब कोई देश / कम्पनी हमें हथियार बेचती है तो इसका किल स्विच अपने पास रखती है। इस किल स्विच को एक्टिवेट करने से हथियार काम करना बंद कर देते है। और अमुक निर्यातक यह भी लिखकर देता है कि यदि इसमें कोई किल स्विच है तो हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं होगी !!
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कारगिल युद्ध के दौरान हमारी मिसाइलो के टाइमर्स ने काम करना बंद कर दिया था, क्योंकि रूस ने किल स्विच का प्रयोग करके मिसाइले निष्क्रिय कर दी थी। रूस ने हमें ये कोड देने से मना कर दिया और हमें अमेरिका के सामने गुटने टेकने पड़े। उनकी सभी शर्तें मानने के बाद ही हमें हथियारों की सप्लाई दी गयी थी। आज हमारे पास जो लड़ाकू विमान है, पन्दुब्बियाँ है, मिसाइले है, रडार है सभी आयातित है। इनके किल स्विच हमारे पास नहीं है। जब युद्ध होगा तो ये काम नहीं करेंगे। मतलब हमारी से सेना के पास जो हथियार है उनके रिमोट उन कंपनियों / देशो के पास है जिन्होंने ये हथियार बनाए है !! इसके अलावा बुलेटप्रुफ जेकेट से लेकर, दूरबीन, हेलमेट और बेटरी टोर्च तक सेना के सभी आधुनिक उपकरण आयातित है।
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यदि हमें भारत की सेना को आत्मनिर्भर बनाना है तो खुद के हथियारों का निर्माण करना होगा। ऐसे हथियार जिन्हें 100% भारत में और 100% भारतीयों द्वारा बनाया गया हो। जैसा की चीन करता है , जैसा की रूस एवं अमेरिका करते है। यदि कल चीन से हमारा युद्ध होगा तो हम बहुत बड़ी मुसीबत में आ जायेगे। क्योंकि चीन असीमित धन देकर हमारे हथियारों के किल स्विच खरीदकर हमारे हथियारों को डी एक्टिवेट कर सकता है। और तब हमें फिर से अमेरिका के सामने घटने टेकने पड़ेंगे। और तब फिर से अमेरिका हमसे मोटी कीमत वसूलेगा। जैसी कि उसने कारगिल के दौरान वसूली थी।
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समाधान ?
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वेल्थ टेक्स, एम आर सी एम्, WOIC, ज्यूरी सिस्टम , राईट टू रिकॉल शिक्षा अधिकारी, राईट टू रिकॉल प्रधानमंत्री एवं सार्वजनिक नारको टेस्ट के कानूनों के अलावा ऐसा कोई रास्ता नहीं है जिससे हम अपने खुद के स्वदेशी हथियारों के निर्माण की क्षमता जुटा सके। इसके अलावा एक महत्वपूर्ण कानून हथियारबंद नागरिक समाज* की रचना है।
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तो यदि आप चाहते है कि हम स्वदेशी हथियारों का उत्पादन करके हमारी सेना को आत्मनिर्भर बना सके ताकि युद्ध में हम टिके रह सके , तो उपरोक्त कानूनों को गेजेट में छपवाने के लिए प्रयास करे। इन प्रस्तावित कानूनों के विवरण इस लिंक पर देखें जा सकते है -- https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/563544197157112
#WealthTax
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(*) हथियार बंद नागरिक समाज की जरुरत हमें पाकिस्तान से निपटने के लिए है। पाकिस्तान टेक्टिकल बम बना चुका है जबकि हमारे पास यह बम नहीं है। जब भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध होगा तो पहले चरण में पाकिस्तान की सेना हारने लगेगी। और अंततोगत्वा वे भारत की सेना पर टेक्टिकल बम चलायेंगे। इससे भारत की सेना रुपी दीवार टूट जायेगी और पाकिस्तान की सेना को रोकने का भार आम नागरिको पर आ जायेगा। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए हमें हथियार बंद नागरिक समाज की रचना की सबसे ज्यादा जरुरत है।
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तो यदि आपका सामना ऐसे व्यक्ति से हो जो भारत की सेना पर तबसरा करता है तो, सबसे पहले उससे यह पूछे कि भारत की सेना को मजबूत बनाने के लिए उसने किन कानूनों का प्रस्ताव किया है या किन कानूनों का वह समर्थन करता है। आप पायेंगे कि भारत में जितने भी कथित राष्ट्रवाद के ठेकेदार है वे अपना पूरा जोर लगाकर इन उन सभी कानूनों का विरोध कर रहे है जिनसे भारत की सेना आत्मनिर्भर बने। पब्लिक को बुत्ता देने के लिए उन्होंने भारत की सेना को मजबूत बनाने का एक निराला तरीका निकाला है -- सैनिको के साथ फोटो खिंचवाओ, शहीदों का महिमा मंडन करो, सेना को दान दो और उन सभी कानूनों का विशेष रूप से विरोध करो जिससे भारत की सेना को वास्तविक रूप से मजबूत बनाया जा सके। दरअसल वे भारत की पूरी सेना का संचालन ही विदेशी हाथो में देना चाहते है। और अपने इन्ही कृत्यों को छिपाने के लिए सेना के नाम पर बढ़ चढ़कर नारे लगाते है। जबकि वे अच्छी तरह से वाकिफ है कि यदि सेना को मजबूत बनाना है तो इसके लिए हमें वांछित कानूनों की जरुरत है।
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"वेल्थ टेक्स ग्रुप"
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