Pawan Jury BhilwaraRj
सवाल ये नही है कि गोरखपुर में हादसा कैसे और क्यों हुआ । योगी आदित्यनाथ से असली सवाल यह पूछा जाना चाहिए कि --
सत्ता में आने के बाद सरकारी अस्पतालों की दशा सुधारने के लिए उन्होंने कितने क़ानून पास किए है ?
शून्य !! अस्पताल जिस तरीक़े से और जिन व्यवस्थाओं पर अखिलेश सरकार के दौरान चल रहे थे उसी तरीक़े से आज भी चल रहे है । यूपी ही नही सभी राज्यों के सभी सरकारी अस्पतालों की यही दशा है । और किसी भी राज्य के मुख्यमंत्री के सामने आप आत्मदाह भी कर लेंगे तो वह सरकारी अस्पतालों और सरकारी स्कूलों की दशा सुधारने के लिए कोई क़दम नही उठाएगा । औक़ात नही है इनकी । कुर्सी पर बैठते ही इनकी खाल कुर्सी से चिपक जाती है । उठेंगे तो उधड़ जाएँगे ।
सरकारी स्कूलों / अस्पतालों के उजड़ने से ही निजी स्कूल / अस्पतालों का धंधा चलता है । इसी धंधे से चुनावी चंदा आता है । और पैड मीडिया के मालिक व मिशनरीज़ कभी नही चाहते कि भारत में सरकारी स्कूलों / अस्पतालों की दशा सुधरे । ये जो बच्चे मरे है और इसे जो मीडिया कवरेज मिला है इससे प्राइवेट अस्पतालों के ग्राहक पूरे देश में कई गुना बढ़ गए है । ऐसी घटनाएँ इस तथ्य को हर बार और भी पुख़्ता करती है कि सरकारी अस्पतालों में मौत किसी भी वजह से हो सकती है । बीमारी से बचोगे तो अव्यवस्था मार डालेगी । ये बिज़नेस है ।
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समाधान - यदि आप राईट टू रिकॉल ग्रुप द्वारा प्रस्तावित Rtr-स्वास्थ्य मन्त्री, Rtr-मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं Rtr-शिक्षा अधिकारी का ड्राफ़्ट पढ़ेंगे तो आप जान जाएँगे कि इस क़ानून के आने के छह महीने के भीतर सरकारी स्कूलों और अस्पतालों की दशा निजी अस्पतालों / स्कूलों से बेहतर हो जाएगी ।
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अन्य कोई उपाय नही है ।
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"वेल्थ टेक्स ग्रुप"
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