Pawan Jury BhilwaraRj
आंदोलनों के दौरान होने वाली हिंसा एवं इसका निपटान :
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यदि आप सरकार में है और कोई संगठन सड़को पर उतर कर आंदोलन कर रहा है तो सरकार 5000 लोगो की इस भीड़ में अपने 100-50 लोग भेज सकती है। भीड़ का स्वभाव संक्रामक होता है। अत: जब ये 100-50 लोग नारेबाजी करते हुए दंगा शुरू कर देंगे तो 5000 के इस शान्ति प्रिय समूह के लोग भी प्रेरित होकर हिंसा करने लगेंगे। यदि कोई आंदोलन एक बार हिंसक हो जाता है तो सरकार इन आंदोलन कारियो पर हिंसक एवं दंगाइयों का लेबल लगा सकती है। दंगे एवं तोड़फोड़ में सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान होगा जिससे आम नागरिक इस समूह के खिलाफ हो जाएंगे। इस तरह आंदोलन का मूल विषय एवं मांगे नेपथ्य में चली जायेगी।
यदि सरकार चाहती है कि आंदोलनकारियो के वोट भी नहीं बिगड़े तो उन्हें इस दंगे को विपक्ष की साजिश बता देना चाहिए। इससे आंदोलन कारियो को कुछ भी समझ नहीं आएगा और वे कन्फ्यूज हो जाएंगे। उन्हें लगेगा कि अच्छे भले ढंग से आंदोलन आगे बढ़ रहा था, लेकिन न जाने कैसे गड़बड़ शुरू हो गयी !! और एक बार कोई आंदोलन हिंसक हो जाता है तो सरकार के पास इसका दमन करने का वाजिब कारण होगा।
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यदि विपक्ष चाहे तो वे भी किसी आंदोलन में अपने 100-50 आदमी शामिल करके ऊपर दिए गए तरीके से आंदोलन को हिंसक बना सकते है। बाद में विपक्ष हिंसा फैलाने का ठीकरा सरकार के सिर डाल दे। मतलब यह कहने लगे कि सरकार ने अपने आदमियों को आंदोलन में घुसा दिया और हिंसा करवा दी। हिंसा होगी तो सरकार दमन करेगी। और फिर विपक्ष चुनावों में इस मुद्दे को कई तरह से भुना सकता है।
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और आंदोलन कारियों को एक बात समझ लेनी चाहिए कि अगर में समूहों के रूप में सड़को पर उतरेंगे तो अल्टीमेटली हिंसा होनी ही है। हर 5-10 हजार की भीड़ में 100-200 हिंसातुर लोग निकल ही आते है। और इतने लोग काफी है। यदि ये लोग हिंसा नहीं करेंगे तो सरकार या विपक्ष पूरी कोशिश करेगा कि आंदोलन हिंसक हो जाए।
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आंदोलन कारियो को इस स्थिति से निपटने के लिए निम्न उपाय करना चाहिए :
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उन्हें सरकार से ऐसी प्रक्रिया की मांग करनी चाहिए जिससे नागरिक बिना सड़को पर उतरे अपनी मांग शान्ति प्रिय तरीके से सरकार के सम्मुख रख सके। ऐसी प्रक्रिया दिए गए लिंक पर देखी जा सकती है।
पारदर्शी शिकायत प्रणाली के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
https://web.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/529823220529210
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किन्तु यदि सरकार ऐसी किसी भी प्रक्रिया को लागू करने से इंकार कर दे तो कार्यकर्ताओ के पास क्या उपाय है ? पहली बात यह कि कार्यकर्ता देश के करोडो नागरिको तक इस प्रक्रिया की जानकारी पहुचाये और उन्हें ऐसी प्रकिया की मांग करने के लिए सहमत करे। जब नागरिको का बहुमत ऐसी स्पष्ट प्रक्रिया की मांग करने लगेगा, तो सरकार को इसे लागू करना होगा। यदि नागरिको के बहुमत द्वारा मांग किये जाने के बावजूद सरकार इसे लागू नहीं करती तो जो हिंसा होगी वो निर्णायक होगी।
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