Pawan Jury BhilwaraRj
प्रश्न --- "क्या करेगा ये आदमी घूस का ? आजतक इसके परिवार का कोई सदस्य पद का दुरूपयोग करके कोई नौकरी कोई ओहदा तो लिया नहीं .. अपनी सारी बचत कर्मचारियों में बाँट देने वाला शख्स घूस लेगा..? " ( मोदी साहेब के बारे में )
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स्पष्टीकरण :
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भ्रष्टाचार के आधार पर आदमी के तीन प्रकार है :
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मनी करप्ट या धन लोलुप -- यह सबसे निम्न श्रेणी का भ्रस्टाचार है। इस किस्म के व्यक्ति को धन की साध होती है और वह धन कमाने के लिए भ्रस्टाचार करता है। धन कमाने का प्राथमिक उद्देश्य सुविधापूर्ण जीवन जीना है। पर आलिशान जीवन जीने के लिए एक सीमा के बाद धन की जरूरत नहीं होती। आदमी को यदि 10-20 करोड़ रुपया आ जाए तो वह अपना शेष जीवन बेहद सुविधापूर्ण ढंग से बिता सकता है। हद से हद यह सीमा 50-100 करोड़ है। किन्तु देखने में यह आता है कि जैसे जैसे आदमी खूब पैसा कमाने लगता है उसकी धन लिप्सा और भी बढ़ती जाती है। क्योंकि व्यक्ति की सबसे अदम्य इच्छा यह होती है कि --- "मैं जो चाहू वो कर्रूँ या जैसा मैं चाहू वैसा हो जाए।" और इस उद्देश्य की पूर्ती के लिए असीमित धन या "सत्ता" चाहिए।
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पॉवर करप्ट या सत्ता लोलुप -- सत्ता शक्ति का केन्द्रीय स्त्रोत है। सत्ता धन कमाने का अवसर भी देती है शक्ति भी देती है और ख्याति भी देती है। महत्त्वाकांक्षी व्यक्ति सत्ता में पीछे दौड़ लगाता है धन के पीछे नहीं। उदाहरण के लिए किसी जिले में 100 करोडपति हो सकते है किन्तु सांसद एक ही होता है। तो एक आला दर्जे का भ्रष्ट व्यक्ति जब भ्रष्टाचार करेगा तो वह बदले में धन नहीं मांगेगा बल्कि सत्ता मांगेगा। सत्ता आने के बाद व्यक्ति के धन कमाने की लालसा का एक हद तक शमन हो जाता है। किन्तु चूंकि उसे सत्ता में बने रहना है तो यह आदमी ऐसे तमाम समझौते करेगा जिससे वह सत्ता में बना रह सके।
उदाहरण के लिए एक सांसद यदि मंत्री बनना चाहता है और मंत्री बनने के लिए यदि उसे 100 करोड़ की जरूरत है तो यह आदमी अब या तो मौद्रिक भ्रष्टाचार करेगा या फिर उस आदमी की हर बात मानेगा जो इसे मंत्री बना दे। अब यदि ये मांगे देश हित में नहीं है तो भी इस व्यक्ति को कोई फर्क नहीं पड़ता। क्योकि इसे मंत्री बनना ही है। ऐसा भ्रष्टाचार ज्यादा खतरनाक है। क्योंकि इसके भ्रष्टाचार में नकदी का लेनदेन न होने से इसे आम तौर पर उजागर या साबित नहीं किया जा सकता।
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फेम करप्ट या ख्याति लोलुप -- शास्त्रों में कहा गया है ( कौनसी पुस्तक में पढ़ा था, वो मुझे याद नहीं ) कि -- "यश यानी मान यानी नाम की लिप्सा सबसे अंतिम बंधन है। जब तक आदमी की छाती पर लकड़े नहीं रखे जाते या उसे कब्र में नहीं उतार दिया जाता तब तक उसकी यह लिप्सा बनी रहती है। एक मरणासन्न व्यक्ति की भी अंतिम साध यह होती है कि उसके मरने के बाद उसका नाम चलता रहे और लोग उसके बारे में अच्छी बातें करे" !!
अपना नाम बनाए रखने या अपना नाम अमर बनाने के लिए व्यक्ति हर तरह का जतन करता है और इस उद्देश्य की पूर्ती के लिए वह किसी भी हद तक गिर सकता है। द अन्ना और महादुरात्मा गांधी ख्याति लोलुप व्यक्तियों के उदाहरण है। यह भ्रष्टाचार आसान नहीं है। इसके लिए पूरी उम्र संतो जैसा जीवन जीना पड़ता है, त्याग करना पड़ता है और अपनी सभी इन्द्रियों का शमन करना पड़ता है। बड़ी मेहनत के बाद ऐसा भ्रष्ट व्यक्ति निर्विवाद रूप से संत की तरह अपने आपको स्थापित कर पाता है।
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मोदी साहेब पॉवर करप्ट है। अत: वे धन का संग्रह नहीं करते। भाई भतीजा वाद एवं परिवार वाद को भी बढ़ावा नहीं देते। वे घूस के रूप में नकदी भी नहीं लेते। यदि वे ऐसा करेंगे तो उनका आभामंडल धूमिल होने लगेगा जिससे उनके वोट कटेंगे और वे सत्ता खो देंगे। तो मोदी साहेब जो भ्रष्टाचार करते है वह सिर्फ सत्ता में बने रहने के एवज में होता है। आप यदि उनके कार्यकाल में किये गए फैसलों की समीक्षा करेंगे तो आप जान जायेंगे कि उन्होंने ढेर सारे ऐसे फैसले किये जो देश हित के खिलाफ है और ढेर सारे ऐसे फैसलों को ख़ारिज कर दिया जिससे अवाम एवं देश का भला होता था। कारण यह है कि -- मोदी साहेब पॉवर करप्ट है। मोदी साहेब को सत्ता में बने रहने के लिए बहुराष्ट्रीय कम्पनियों एवं मिशनरीज के समर्थन की जरूरत है। और यही से उनका भ्रष्टाचार शुरू हो जाता है।
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[ एक अन्य पहलू है -- महत्त्वाकांक्षा का मोती निष्ठुरता की सीपी में पलता है। यदि आप यह देखना चाहते है कि कोई व्यक्ति किस हद तक गिर सकता है, तो इसकी सीमा देखने के लिए आपको किसी अति महत्वाकांक्षी व्यक्ति को ढूंढना चाहिए। एक अति महत्त्वाकांक्षी व्यक्ति पतन की निम्नतम सीमा है। ऐसे व्यक्ति का कोई परिवार नहीं होता, कोई देश नहीं होता, कोई धर्म नहीं होता, कोई जाती नहीं होती, कोई कुल नहीं होता, माँ नहीं होती, बाप नहीं होता, इसमें दया नहीं होती, संवेदना नहीं होती, भाव नहीं होते, नैतिकता वगेरह तो बहुत दूर की कौड़ी है। जो भी व्यक्ति, वस्तु, सिद्धांत इसकी महत्त्वाकांक्षा के आड़े आएगा यह व्यक्ति उसकी बलि ले लेगा।
इतिहास की सभी पुस्तके इन्ही चरित्रों से भरी है। यही लोग इतिहास रचते है या यूँ कहे कि इन्हें इतिहास में दर्ज होना होता है अत: ये लोग ये रास्ता ले लेते है। एक अति महत्त्वाकांक्षी व्यक्ति किसी का नहीं होता, कभी भी नहीं होता और यह कहीं का भी नहीं होता। चूंकि यह एक मनोवैज्ञानिक आध्यत्मिक पहलू है अत: इस विषय को केंद्र में रखकर नतीजा नहीं निकाला जा सकता। माने यह पता करने के कोई तरीका नहीं है कि अमुक व्यक्ति महत्त्वाकांक्षी है या अति महत्त्वाकांक्षी है या नहीं है। ये सिर्फ अनुमान की बाते है। अत: मैं व्यवहारिक राजनीती में इस तरह की थ्योरी को भार नहीं देता। यह सिर्फ के थ्योरी है। जिसके यथार्थ रूप से कोई मायने नहीं है ]
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मोदी साहेब की तरह ही मायावती, ममता बनर्जी, जयललिता आदि भी अविवाहित रही है। उनके भी कोई परिवार वगेरह नहीं है। अत: इस सिद्धांत के आधार पर किसी व्यक्ति के चरित्र का निर्धारण करना कि -- "यह आदमी अकेला है, अविवाहित है, इसके कोई आगे पीछे नहीं है अत: ये आदमी क्यों और किसके लिए भ्रष्टाचार करेगा", एक ओछा तर्क है। हमें किसी नीति नियंता का आकलन इस आधार पर करना चाहिए कि सत्ता में रहते हुए अमुक व्यक्ति जो फैसले ले रहा है उससे देश में वास्तविक रूप से सकारात्मक परिवर्तन आ रहे है या नकारात्मक है।
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तो मेरा कहना यह है कि बयानबाजी, स्टंट, लफ्फाजी, प्रचार आदि अपनी जगह है किन्तु मोदी साहेब के कार्यकाल को तीन वर्ष बीत चुके है पर उन्होंने देश हित में उन कानूनों को भी अब तक लागू नहीं किया है जिन्हें लागू करने के लिए सिर्फ तीन मिनिट की जरूरत थी !!! वजह -- मोदी साहेब के भ्रष्ट व्यक्ति है, और उन्होंने सत्ता में बने रहने के लिए बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के मालिको से समझौता कर लिया है। वे पेड मिडिया के माध्यम से यह सुनिश्चित का रहे है कि वे पीएम बने रहे और इसकी एवज में मोदी साहेब उनकी नीतियों पर काम कर रहे है।
और यह कहने की जरूरत नहीं है कि बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के मालिको के हितो एवं देश के हितो में परस्पर टकराव है। यह उसी तरह है कि एक युवा जब आइपीएस या आई ए एस ज्वाइन करता है तो निश्चित रूप से वह करप्ट नहीं होता। उसमे ईमानदारी से कार्य करने की भावना होती है। लेकिन पद सँभालते ही उसकी नैतिकता एवं कर्तव्य परायणता तिरोहित हो जाती है। क्योंकि वह जान जाता है कि यदि उसने वरिष्ठ अधिकारियों/नेताओं के निर्देशों ( और ज्यादातर ये निर्देश गलत होते है ) का पालन नहीं किया तो वह अपनी नौकरी खो देगा। तो वह अपना पद बनाए रखने के लिए भ्रष्ट हो जाता है और शेष जीवन भ्रष्ट जीवन व्यतीत करता है।
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कुछ उदाहरण :
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देश में 2 करोड़ से ज्यादा बांग्लदेशी मुस्लिम घुसपेठियो घुसे हुए है। यह भारत की सुरक्षा के लिए खतरा है। क्या वजह है कि मोदी साहेब ने इन्हें खदेड़ने का क़ानून लागू करने से इनकार कर दिया है ?
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भारत में धार्मिक जनसख्या का अनुपात बिगड़ता जा रहा है। क्या वजह है कि मोदी साहेब ने टू चाइल्ड पालिसी क़ानून लागू करने से मना कर दिया है ?
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भारत की अदालतों में 3 करोड़ मुकदमे लंबित है। धीमी अदालतें स्थानीय उद्योगों को निगल रही है। क्या वजह है कि मोदी साहेब ने पिछले 3 साल में अदालतों को सुधारने और जजों का भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए कोई भी क़ानून पास करने से मना कर दिया ?
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आरक्षण के कारण हर वर्ष कोई न कोई समूह सडको पर आकर हिंसक प्रदर्शन करता है, और काम काज ठप कर देता है। क्या वजह है कि मोदी साहेब ने आरक्षण की समस्या का निरापद हल करने के लिए आवश्यक कानूनों को पास नही किया ?
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और पुलिस एवं अन्य महकमो का भ्रष्टाचार सर्व विदित है। एकदम से खुला हुआ। लेकिन मोदी साहेब ने इन्हें सुधारने के लिए कौनसे क़ानून पास किये ?
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सरकारी स्कूल और सरकारी अस्पतालो की दशा निरंतर बदतर हो रही है। निजीकरण अलग विषय है। किन्तु मोदी साहेब सरकारी स्कूलों एवं सरकारी अस्पतालों की दशा सुधारने के लिए आवश्यक कानूनों को लागू क्यों नहीं कर रहे है ?
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वजह भ्रष्टाचार है। अमुक विषयों का समाधान निकालने से उन्हें वोटो की हानि होगी। अत: उन्होंने इन विषयों को साइड में कर देने का फैसला किया। ऐसा नहीं है कि उन्हें समस्या या इनका समाधान पता नहीं है। उन्हें पता है। किन्तु वे वोट गवाने का जोखिम नहीं उठाना चाहते। यह बात विशेष रूप से ध्यान देने वाली है कि इन सभी समस्याओं को हल करने के लिए आवश्यक कानूनों को एक ही दिन में लागू किया जा सकता है।
क़ानून लागू होने के बाद रातों रात परिवर्तन नहीं आएगा। इन कानूनों को निष्पादित करने के लिए वक्त लगेगा और उतना ही वक्त परिवर्तन आने में लगेगा। किन्तु यदि इन्हें लागू ही नहीं किया जा रहा तो परिवर्तन आने का सवाल ही पैदा नहीं होता। चाहे आप शासन में 6 साल रहो या 60 साल तक बने रहो। बात एक ही है।
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और सबसे जरुरी बात यह कि इन कानूनों को लागू करने के लिए राज्यसभा में भी बहुमत नहीं चाहिए और लोकसभा से भी इसे पास नहीं करना है। इन्हें मोदी साहेब कैबिनेट से अनुमोदित कर के सीधे गेजेट में प्रकाशित कर सकते है। तो क्या वजह है कि मोदी साहेब ने इन मुद्दों और ऐसे तमाम मुद्दों को लटका कर रखा है ? क्या वे ज्यादा व्यस्त है ? नहीं। वजह एक ही है -- वे एक भ्रष्ट व्यक्ति है। सत्ता लोलुप।
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"वेल्थ टेक्स ग्रुप"
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