Pawan Jury BhilwaraRj
सचिन बिकाऊ तेंदुलकर -- अ मिलियन ड्रिम्स
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"सबके जैसे होकर भी बाइज़्ज़त है बस्ती में,
कुछ है लोगों का सीधापन कुछ है अपनी एय्यारी भी" -- निदा फ़ाज़ली
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१. तब भारत रत्न खेल की श्रेणी में नही दिया जाता था । सचिन चाहते थे कि चूँकि वे भगवान है अतः इस तरह के नियम उन पर लागू नही होने चाहिए । अतः सचिन को भारत रत्न देने के लिए रातों रात इस पुरस्कार में खेल की श्रेणी को लागू किया गया ।
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सचिन जब रिटायर होने को थे तो उनकी प्रयोजक बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ क्रिकेट को प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें भारत रत्न दिलाना चाहती थी । कोंग्रेस ने इसके लिए शर्त रखी कि यदि वे कोंग्रेस ज्वाइन कर ले तो आसानी हो जाएगी । लेकिन आज कोंग्रेस ज्वाइन करो और कल ही भारत रत्न मिलने से एक तो यह बात खुलकर सामने आती थी कि सचिन को भारत रत्न कोंग्रेस ज्वाइन करने के एवज़ में दिया गया है और दूसरी तरफ़ यह भी साफ़ नज़र आता था कि भारत रत्न बिकाऊ है ।
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पर सचिन ने ज़िद पकड़ ली कि मुझे भारत रत्न तुरंत ही चाहिए, बाद को नही । वे अपने सन्यास समारोह को भव्य एवं यादगार बना देना चाहते थे । अतः उन्होंने तत्काल रूप से कोंग्रेस ज्वाइन की और खुले आम भारत रत्न ख़रीद लिया । जहाँ तक कोंग्रेस की बात है कोंग्रेस के लिए पुरस्कारों की ऐसी नीलामी कोई नयी बात नही है ।
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सचिन को भारत रत्न वैसे भी मिल जाता था, लेकिन वे इंतज़ार नही करना चाहते थे । उन्होंने भारत रत्न लपकने के लिए पूरे देश के सामने इस पुरस्कार की रही सही गरिमा को भी नष्ट कर दिया । उन्होंने यह पुरस्कार बेहद अशोभनिय ढंग से झपटा , जिसकी कोई ज़रूरत नही थी । उन्होंने एक तमग़ा ख़रीदने के लिए अपना सम्मान गँवाने से कोई गुरेज़ नही किया और भारत रत्न ख़रीदने के लिए ख़ुद को खुले आम बेचा ।
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२. सचिन को फ़रारी कम्पनी ने २००२ में एक कार गिफ़्ट की थी । इम्पोर्टेड कार पर सचिन को १ करोड़ इम्पोर्ट ड्यूटी चुकानी थी । पर सचिन का मानना था कि वे भगवान है अतः उन्हें इसमें छूट मिलनी चाहिए । सरकार ने उन्हें बताया कि ड्यूटी तब माफ़ की जाती है जब यह पुरस्कार आपको किसी प्रतियोगिता में मिला हो । लेकिन यह एक प्राइवेट गिफ़्ट है अतः आपको ड्यूटी चुकानी होगी । सचिन ने तब वित्त मंत्री मेजर जसवंत सिंह से कहा कि शायद आप टीवी बराबर नही देखते है, अतः आपको यह पता नही है कि मैं भगवान हूँ । यदि मौजूदा नियमों के तहत ड्यूटी माफ़ नही हो सकती तो आप अपने नियम बदलिए ।
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जसवंत सिंह जी ने तब क़स्टम एक्ट में एक संशोधन [ 25 (3) ] तुरंत किया, जिसके अनुसार यदि सरकार चाहे तो किसी विशेष मामले को देखते हुए पुरस्कार पर ड्यूटी की छूट देने के सम्बंध में अपने विवेक से फ़ैसला ले सकती है । इस तरह बिकाऊ सचिन तेंदुलकर को कर दाताओ से वसूले गए पैसे में से १ करोड़ १३ लाख की राहत दी गयी । यह राहत उन्हें इसीलिए नही दी गयी क्योंकि उनके पास ड्यूटी चुकाने के पैसे नही थे, बल्कि इसीलिए दी गयी क्योंकि वे भगवान है, अतः नियमो से ऊपर है । और सचिन ने उपहार में मिली इस कार का क्या किया ? उन्होंने कुछ वर्षों बाद इसे सूरत के एक व्यापारी को बेच दिया !!
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कपिल को भी इसी तरह से दो कारे गिफ़्ट में मिली थी, पर उन्हें सरकार ने एक धेले की भी छूट नही दी । उन्हें ड्यूटी के पूरे पैसे चुकाने पड़े । और गोल्फ़र अमरिंदर को जब गिफ़्ट में कार मिली तो उन्हें इसे विदेश में ही बेचना पड़ा !! क्योंकि सरकार ने ड्यूटी माफ़ नही की और ड्यूटी चुकाना वे वहन नही कर सकते थे ।
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३. क्रिकेट मैच तो हमेशा से ही फ़िक्स थे लेकिन जब यह बात खुलकर सामने आयी कि अजहरूद्दीन, जडेजा समेत लगभग सभी खिलाड़ी मैच फ़िक्सिंग में शामिल है पर तब भी सचिन शक के दायरे से बाहर रहे । मैं भी इस बात में मानता हूँ कि सचिन फ़िक्सिंग में शामिल नही रहे होंगे लेकिन यह भी तय है कि उन्हें इस बात की पूरी जानकारी रही होगी कि भारत के खिलाड़ी मैच फ़िक्सिंग में शामिल है । लेकिन उन्होंने इसे देश के सामने रखने की जगह दूसरा सुविधा जनक रास्ता चुना । वे ख़ामोश बन कर इसे होने देते रहे ।
"समर शेष है, नही पाप का भागी केवल व्याघ्र,
जो तटस्थ है, समय लिखेगा उनके भी अपराध" -- दिनकर
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लेकिन सचिन में बहुत कुछ सकारात्मक भी है । वे बेहद प्रतिभाशाली, बेहद अनुशासित और बेहद शालीन व्यक्तित्व के धनी है । लक्ष्य के प्रति उनका समर्पण असाधारण है । उदाहरण के लिए 1998 में हर्ष भोगले को दिए गए अपने साक्षात्कार में जब उनसे पूछा गया था कि अंतराष्ट्रीय क्रिकेट में उनके लक्ष्य क्या है ? तो उन्होंने जवाब दिया था कि -- मेरा लक्ष्य शतक लगाना है !! भोगले ने पूछा कि, कितने शतक ? सचिन ने जवाब दिया -- ढेर सारे ।
और सचिन ने अंतराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे अधिक शतक लगाने का कीर्तिमान बनाया । यह लक्ष्य के प्रति उनके समर्पण की दिखाता है कि किस तरह वे बरसो पहले बनाए अपने लक्ष्य पर टिके रहे ।
(यह बात और है कि हर्ष भोगले उनसे ज़्यादा ज़िम्मेदार जवाब जैसे कि भारतीय टीम को क्रिकेट में नम्बर एक बनाना या विश्व कप जिताना आदि की उम्मीद कर रहे थे )
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"वेल्थ टेक्स ग्रुप"
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