Pawan Jury BhilwaraRj

1. जो महानुभाव कह रहे है कि evm को हैक किया जा सकता है उनसे अनुरोध है की जल्द से जल्द चुनाव आयोग पहुंच कर EVM को हैक करके सच देश के सामने लाये एवं चुनाव आयोग के चेलेंज को स्वीकार करे ---- evm भगत, मोदी भगत एवं चुनाव आयोग भगत उवाच
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2. राईट टू रिकॉल पार्टी के कार्यकर्ता बीजेपी के विरोधी है। इसीलिए वे evm का मुद्दा उठा कर केजरीवाल का समर्थन कर रहे है ?
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नोट - स्पष्टीकरण आम नागरिको एवं सामान्य समझ रखने वाले मनुष्यों के लिए रखा जा रहा है। अंध भक्तो का आई क्यू लेवल या तो 70 से निचे होता है या 140 से पार निकल गया होता है। अत: यह स्पष्टिकरण उनके लिए नहीं है।
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emv अपने आप में स्वतंत्र एवं पूर्ण इकाई है। यह किसी अन्य मशीन या उपकरण के साथ कम्युनिकेट नहीं करती है। अत: इसे इंटरनेट या रिमोट से हैक नहीं किया जा सकता है। किन्तु क्योंकि यह एक इलेक्ट्रोनिक उपकरण है अत: इसके डिस्प्ले या चिप को यदि बदल दिया जाए या इसमें कोई रिसीवर लगा दिया जाये तो रिमोट द्वारा इसे कमांड दी जा सकती है।
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इसे इस तरह समझे कि केलकुलेटर एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन है। उसमे एक चिप है जिसमे कि केलकुलेट करने का प्रोग्राम फीड किया हुआ है, एवं इस केलकुलेशन को दिखाने के लिए एक डिस्प्ले होता है। जब तक आप केलकुलेटर के डिस्प्ले या चिप के साथ छेड़खानी नहीं करेंगे केलकुलेटर हमेशा सही गणना दिखायेगा। जब तक आपको केलकुलेटर के ओरिजिनल डिस्प्ले को बदलने का अवसर नहीं मिले तब तक आप कुछ भी करके केलकुलेटर के फलित में गड़बड़ नहीं कर सकते।
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किन्तु यदि केलकुलेटर के ओरिजिनल डिस्प्ले/चिप को हूबहू दिखने वाले डुप्लीकेट डिस्प्ले/चिप से बदल दिया जाए एवं इसमें एक रिसीवर लगा दिया जाए तो केलकुलेटर को यह कमांड दी जा सकती है कि वह 2+2 = 5 दिखा दे। इसी तरह से आपके टीवी का चेनल सिर्फ आप ही बदल सकते है, किन्तु यदि इसमें कम्पनी एक रिसीवर और लगा दे तो दुसरे रिमोट द्वारा भी इसे ओपरेट किया जा सकता है।
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केलकुलेटर एवं टीवी की तरह ही evm भी एक इलेक्ट्रोनिक उपकरण है, जिसमे चिप एवं डिस्प्ले का इस्तेमाल किया जाता है। चिप में कोई जीव नहीं है, यह निर्जीव है। evm का डिस्प्ले भी निर्जीव है। इनमे जो कमांड रखी जाती है ये उसी कमांड के अनुसार परिणाम देते है। जैसी कमांड का प्रोग्राम होगा वैसा ही परिणाम ये उपकरण दिखा देंगे।
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पहली बात, किसी भी इलेक्ट्रोनिक उपकरण को तब तक रिमोट से संचालित नहीं किया जा सकता जब तक कि इसके साथ इच्छित परिणाम पाने के लिए छेड़खानी नहीं की जाए। अत: जब तक evm या केलुलेटर या टीवी के साथ छेड़खानी नहीं की जाए तब तक इन्हें मेनिपुलेट नहीं किया जा सकता।
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यदि evm के साथ छेड़खानी की जाए तो क्या इसे मेनिपुलेट किया जा सकता है ?
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चुनाव आयोग का स्पष्ट मानना है कि -- हाँ। यदि किसी व्यक्ति को evm के साथ छेड़खानी करने का अवसर मिले तो वह इसे मेनिपुलेट कर सकता है एवं इसके वोटो की गणना को रिमोट द्वारा प्रभावित कर सकता है। इसीलिए चुनाव आयोग evm टेबल पर रख कर यह कहता है कि --- बिना छेड़खानी किये इसे मेनिपुलेट करके दिखाओ !!
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तो देश के विभिन्न तकनीशियन एवं चुनाव आयोग इस बात पर सहमत है कि किसी भी evm को तब तक मेनिपुलेट नहीं किया जा सकता जब तक कि इसके चिप/डिस्प्ले के साथ छेड़खानी नहीं कर दी जाए।
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और देश के विभिन्न तकनीशियन एवं चुनाव आयोग इस बात पर भी सहमत है कि यदि evm के साथ छेड़खानी कर दी जाए तो evm को मेनिपुलेट किया जा सकता है।
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पर विवाद का बिंदु यह है कि -- देश के विभिन्न कार्यकर्ताओ का मानना है कि चुनाव आयोग के पास evm से छेड़खानी करने के पूरे अवसर मौजूद है एवं चुनाव आयोग के पास इसके साथ छेड़खानी करने का कानूनी अधिकार भी है अत: हमें चुनाव आयोग पर भरोसा न करते हुए evm को चुनावी प्रक्रिया से निकाल देना चाहिए।
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किन्तु चुनाव आयोग का कहना है कि चुनाव आयोग के सभी अधिकारी जजों की तरह ही फ़रिश्ते है और उनकी ईमानदारी पर शुबहा करना घटिया हरकत है। चुनाव आयोग का यह भी दावा है कि सिर्फ चुनाव आयोग ही नहीं बल्कि BEL के सभी अधिकारी -- जहाँ evm का निर्माण होता है -- , जिले के सभी कलेक्टर्स --- जहाँ evm को स्टोर किया जाता है -- , एवं बैगलोर से evm को ट्रको में लादकर देश के विभिन्न कोनो में पहुचाने वाले सभी ठेकेदार आदि भी बला के इमानदार एवं फ़रिश्ते है !!!
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मतलब चुनाव आयोग का स्पष्ट एलान है कि --- हाँ evm के साथ छेड़खानी की जा सकती है, किन्तु आप हम पर विश्वास कीजिये हम कभी इसके साथ छेड़खानी नहीं करेंगे !!!
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अत: चुनाव आयोग द्वारा evm को बिना छेड़खानी किये हैक करने की चुनौती देना अप्रासंगिक है। छेड़खानी न करने की शर्त लगा देना ही इस बात का साक्ष्य है कि चुनाव आयोग खुद मानता है कि इसे छूकर मेनिपुलेट किया जा सकता है।
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रिकालिस्ट श्री राहुल मेहता जी ने सबसे पहले 1999 में evm का विरोध किया था। किन्तु उस समय इंटरनेट वगेरह कुछ भी उपलब्ध नहीं होने से इसका साक्ष्य उपलब्ध नहीं है।
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आईआईटी इंजिनियर श्री राहुल मेहता जी एवं 1999 से ही लगातार evm का विरोध कर रहे थे एवं नागरिको तक यह जानकारी पहुंचा रहे थे कि evm को हैक किया जा सकता है।
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2008 में राईट टू रिकॉल पार्टी के मेनिफेस्टो में अध्याय 40 में यह मांग रखी गयी कि evm को बेन किया जाना चाहिए।

साक्ष्य - rahulmehta.com/301.h.htm ( अध्याय 40 देखें )
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श्री राहुल मेहता जी ने गणितीय विश्लेषण द्वारा इसका विवरण रखा गया कि कैसे evm को हैक किया जा सकता है।

साक्ष्य - rahulmehta.com/evm.pdf
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श्री हरि प्रसाद जी ने 2010 में चुनाव आयोग की evm चुराई एवं उसे हैक करने का वीडियो बनाकर यु ट्यूब पर रखा। इस वीडियो के आने से पहली बार देश के सामने यह साक्ष्य आया कि evm को हैक किया जा सकता है। इस वीडियो में तकनीकी सहयोग श्री राहुल मेहता जी का भी था। साक्ष्य के लिए श्री हरि प्रसाद जी के वीडियो के अंत में "क्रेडिट" सूची देखें।
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31 जुलाई 2009 को श्री राहुल मेहता जी ने इन्डियन एक्सप्रेस के अहमदाबाद, मुंबई, दिल्ली एवं अन्य शहरो के संस्करण में इस विषय पर विज्ञापन दिया कि -- कैसे बड़े पैमाने पर evm को हैक किया जा सकता है।

साक्ष्य -- https://www.facebook.com/photo.php?fbid=10151109562951922&set=a.10150470080606922.369631.704201921&type=3&theater

( यह विज्ञापन तीसरे पृष्ठ पर दिया गया था, क्योंकि इन्डियन एक्सप्रेस ने पहले पेज पर इस विषय पर विज्ञापन देने से इनकार कर दिया था। )
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नवम्बर 2012 में गुजरात समाचार के प्रथम पेज पर evm को बेन करने के संबध में श्री राहुल मेहता जी ने फिर विज्ञापन दिया।

साक्ष्य - https://www.facebook.com/photo.php?fbid=10151113987121922&set=a.10150470080606922.369631.704201921&type=3&theater
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और 2012 से राईट टू रिकॉल के विभिन्न कार्यकर्ता अपनी फेसबुक वाल पर यह लिख रहे है कि evm को बड़े पैमाने पर हैक किया जा सकता है अत: इसे बेन कर दिया जाना चाहिए। तथा साथ ही यह अभियान भी चला रहे है कि evm को बेन करने के लिए अपने सांसद को sms द्वारा आदेश भेजे। अब sms अभियान की जगह ट्विट ने ले ली है।
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सबक - कृपया पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर निष्कर्ष न निकाले। ऐसा करने से आप या तो बेवकूफ नजर आते है या अल्प्ग्य। आरोप लगाने से पहले जानकारी जुटाएं।
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दरअसल, केजरीवाल इन सब घटनाओं से पिछले 20 साल से परिचित है। वे अच्छी तरह से जानते है कि श्री हरिप्रसाद जी ने 2010 में ही चुनाव आयोग की असली एवम को सिर्फ 2 मिनिट में हैक करके दिखा दिया था। और इसका वीडियो भी यू ट्यूब पर रख दिया था। किन्तु केजरीवाल एक कपटी मनुष्य है। उन्होंने अपने जीवन में जितनी बार भी evm का जिक्र किया उतनी ही बार कार्यकर्ताओं से श्री हरिप्रसाद जी के बारे में जानकारी छुपा ली। और अब एक नकली evm को विधानसभा में बचकाने तरीके से हैक करके वे सूरमा बनना चाहते है। ऐसे कमीने नेता कार्यकर्ताओं की वर्षो से की गयी मेहनत को हडप कर उसका क्रेडिट ले जाने का कारोबार करते है। पर केजरीवाल धोखेबाज आदमी भी है। इस आदमी ने अपने सांसदों को यह स्पष्ट निर्देश जारी कर रखे है कि -- वे संसद में इस तरह का कोई निजी बिल प्रस्तुत नहीं करे जिससे भारत में evm को बैन किया जा सके।
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'वेल्थ टेक्स ग्रुप'
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