Pawan Jury BhilwaraRj
प्रवीण तोगड़िया एवं सुब्रह्मनियम स्वामी ऐसे वकील है जो पान के गल्ले पर बहुत जोर शोर से बहस करते है किन्तु अदालत में खामोश हो जाते है !!! तोगड़िया पिछले कई दशको से भारत में बढती मुस्लिम आबादी के बारे में चिंता जता रहे है लेकिन इन्ही तोगड़िया ने संघ (*)/विहिप के सांसदों को टू चाइल्ड पॉलिसी क़ानून पास करने के लिए कहने से इनकार कर दिया है !!! और सुब्रह्मनियम स्वामी ने भी ऐसा कोई क़ानून संसद में रखने से इनकार कर दिया है जिससे मुस्लिमो में बढती जनसँख्या को नियंत्रित किया जा सके !!!
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(* संघ = संघ + बीजेपी = बीजेपी , यानि कि -- गंगाधर = गंगाधर + शक्तिमान = गंगाधर )
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मान लीजिये कि आप अपना मुकदमा लड़ने के लिए एक वकील करते है, और यह वकील आपके मुकदमे के पक्ष में बहुत ही तथ्यपरक और जोरदार बहस करता है। लेकिन ये महाशय इस तरह की बहस सिर्फ पान के गल्ले पर ही करते है, और अदालत में जाते ही खामोश हो जाते है। ऐसे वकील से आप किस तरह पेश आयेंगे ?
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1991 में भारत में मुस्लिम आबादी 9% के आस पास थी। लेकिन मुस्लिमो में ऊँची जन्म दर एवं बांग्लादेशियों की अवैध घुसपैठ के कारण आज यह प्रतिशत 16 से 18 के आस पास है।
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1991-1992 में संघ के पास लगभग 100 सांसद थे तथा इनमे से कई विहिप से थे।
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इनमे से एक भी सांसद ने संसद में टू चाइल्ड पॉलिसी का ड्राफ्ट नहीं रखा !!!
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और कल्कि अवतार मोदी साहेब को शामिल करते हुए इनमे से एक ने भी कभी देश में टू चाइल्ड पॉलिसी क़ानून लागू करने की मांग नहीं की !!!
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और इस बात को छिपाने के लिए कि वे मुस्लिमो की ऊँची जन्म दर को रोकने के लिए आवश्यक टू चाइल्ड पॉलिसी का विरोध कर रहे है उन्होंने एक बहुत ही अव्यवहारिक और बकवास राग अलापना शुरू किया कि -- "हिन्दू महिलाओं को 10 बच्चे पैदा करने चाहिए" !!!
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और तोगड़िया ने अपनी जिन्दगी में कभी भी विहिप के सांसदों से नहीं कहा कि वे टू चाइल्ड पॉलिसी क़ानून लागू करे या इस क़ानून को निजी बिल के रूप में संसद में रखे !!!
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कहने की जरूरत नहीं है कि -- भारत में मुस्लिम एवं हिन्दू जनसख्या की वृद्धि दर में भारी अंतर है और यह एक गंभीर समस्या है। और मोदी साहेब, तोगड़िया जैसे संघ के नेता इस मुद्दे को उठाकर सिर्फ वोट बटोरना चाहते है। उनकी रुचि इस समस्या को ख़त्म करने के लिए आवश्यक क़ानून लाने में नहीं है।
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राईट टू रिकॉल पार्टी ने इस समस्या के समाधान के लिए टू चाइल्ड पॉलिसी का ड्राफ्ट दिया है और जल्द ही हम इसके प्रचार के लिए समाचार पत्रों में विज्ञापन एवं प्रधानमंत्री को ट्विट भेजने का अभियान चलायेंगे। इस क़ानून को संसद में मनी बिल के रूप में प्रस्तुत करके पास किया जा सकता है। मनी बिल का ठप्पा लगाने के बाद इसे राज्य सभा से पास करने की जरुरत नहीं होगी।
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सुब्रह्मनियम स्वामी की भी यही हालत है। उन्होंने इवीएम को बेन करने के लिए संसद में क़ानून रखने से मना कर दिया है, और उन्होंने संसद में ऐसे किसी क़ानून ड्राफ्ट को रखने से भी मना कर दिया है जो यह कहता हो कि, "यदि इवीएम में पेपर ट्रेल (VVPAT) न हो तो चुनाव आयोग अनिवार्य रूप से मत पत्रों का इस्तेमाल करे। और अब सुब्रह्मनियम स्वामी कह रहे है कि, "आयकर को ख़त्म किया जाना चाहिए" !!! तो उनसे पुछा जाना चाहिए कि जब वे आयकर खत्म करना चाहते है तो उन्होंने इसे ख़त्म करने के लिए संसद में कोई क़ानून प्रस्तुत क्यों नहीं किया है ? और इतना ही नहीं, उन्होंने अयोध्या में राम, मथुरा में कृष्ण एंव काशी में विश्वनाथ मंदिर के निर्माण के लिए आवश्यक क़ानून को भी संसद में रखने से साफ़ मना कर दिया है !!
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सार की बात यह है कि, कृपया ऐसे वकीलों की चपेट में आने से बचे जो पान के गल्ले पर बड़े भयंकर ऐलान चलाते है किन्तु कोर्ट में जाते ही खामोश हो जाते है। इसीलिए कृपया कोंग्रेस/बीजेपी/संघ/आम आदमी पार्टी के नेताओं से आशा रखकर अपना समय बर्बाद न करे। ये सभी नेता रेलियो एवं साक्षात्कारों में बढ़ चढ़ कर बोलते है किन्तु संसद में अमुक कानूनों को रखने से इनकार कर देते है। कृपया राईट टू रिकॉल पार्टी के कार्यकताओ के साथ काम करे, जिन्होंने देश की समस्याओ के समाधान के लिए लिखित कानूनी ड्राफ्ट दिए है।
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"वेल्थ टेक्स ग्रुप"
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