Pawan Jury BhilwaraRj
Ashok Jain VotevapsiCm:
~ राईट टू रिकॉल पार्टी ~
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कॉग्रेस और आम आदमी पार्टी के लोग जो EVM का विरोध कर रहे हैं वो झूठे और नौटंकीबाज़ हैं । उनको बस इतना करना है की संसद में एक प्रस्ताव रखें की " चुनाव आयोग EVM इस्तेमाल नहीं कर सकती और कागज़ के मतपत्र का इस्तेमाल मतदान के लिए अनिवार्य है | "
उनको राष्ट्रपति , चुनाव आयोग से मिलने या संसद में हल्ला मचाने की कोई जरुरत नहीं ।
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पहली बार 1988 या उसके आस पास चुनाव में EVM इस्तेमाल हुआ ।
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सर्वोच्च न्यायालय ने इसके बाद ये फैसला दिया की " जन प्रतिनिधित्व अधिनियम सिर्फ कागजी मतपत्र के इस्तेमाल के बारे में बोलता है कोई इलेक्ट्रॉनिक यंत्र के बारे मे नहीं इसलिए जब तक संसद इस अधिनियम में परिवर्तन नहीं करती चुनाव आयोग इसका इस्तेमाल नहीं कर सकती | "
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इसके एक वर्ष बाद तत्कालिन प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी जी ने सांसदों को इस अधिनियम में परिवर्तन कर एक धारा जोड़ने के लिए के लिए बाध्य किया जिसके अनुसार शब्द "मतपत्र " | और EVM को समानार्थक माना जाए ।
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उसके बाद ही EVM का इस्तेमाल कानूनन हुआ ।
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तो सांसद अभी उस धारा को हटा सकते हैं और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम में ये लिख सकते हैं की "चुनाव आयोग सिर्फ कागजी मतपत्र का ही इस्तेमाल करे और कोई भी इलेक्ट्रॉनिक या कागज़ ना इस्तेमाल होनेवाले तरीके मतदान कराने के लिए ना करें | "
और ऐसे EVM पर प्रतिबंध लग जाएगा ।
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परन्तु इस दिशा में काम करने की बजाए जैसा की हम देख रहे हैं आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के सांसद सिर्फ हल्ला मचा रहे हैं ।
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इससे हम ये कह सकते हैं कि वो सब असलियत में EVM का समर्थन करते हैं और सिर्फ इसलिए हल्ला मचा रहे हैं ताकि EVM का विरोध करने वाले कार्यकर्ता इनसे आकर्षित हों और EVM हटाने की दिशा में कोई असरदार कदम ना उठाएं ।
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इसलिए
अगर आप EVM के विरोधी हैं तो आम आदमी पार्टी या कांग्रेस के सांसदों के साथ समय बर्बाद ना करें और RSS के लोगों के साथ भी समय बर्बाद ना करें ।
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इनको समाधान में रूचि नहीं है सिर्फ समस्याओं की व्याख्या कर नागरिकों का समय बर्बाद करना है |
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समाधान :-
राईट टू रिकॉल चुनाव आयोग आयुक्त |