Pawan Jury BhilwaraRj
मोदी साहेब ने SBI चेयरमेन को आदेश दिया है कि वे खाताधारको द्वारा रखी गयी आवश्यक न्यूनतम राशि एवं बैंक व्यवहार के शुल्क में इजाफा करे। और SBI चेयरमेन ने मोदी साहेब के हुकुम का पालन किया। इस फैसले के पीछे मोदी साहेब की मंशा बढ़ते एनपीए को छुपाने की है।
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संघ (*) के अंधसेवको एवं मोदी साहेब के अंध भगतो का कहना है कि इस हरकत के लिए सिर्फ SBI चेयरमेन को ही दोष दिया जाना चाहिए और मोदी साहेब का इस फैसले से कोई लेना देना नहीं है।
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( * संघ = संघ + बीजेपी, यानि गंगाधर = गंगाधर + शक्तिमान। बाजार में कुछ 215 के लगभग ऐसे शोध ग्रन्थ मौजूद है जो इस तथ्य को साबित कर देते है कि गंगाधर एवं शक्तिमान दो अलग अलग व्यक्ति है। और इन्ही 215 शोधार्थियों की लगभग 215 पुस्तके बाजार में मौजूद है जो तकनिकी तौर पर इस तथ्य की पुष्टि करती है कि संघ और बीजेपी भी अलग अलग है। लेकिन इन पुस्तको को समझने के लिए किसी व्यक्ति का आई क्यू लेवल कम से कम 4000 अंको का होना चाहिए। पर मेरा आई क्यू लेवल सिर्फ 107 अंको का है। इसीलिए मैं इन पुस्तको को कूड़ेदान के हवाले कर देता हूँ। )
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हमारे द्वारा प्रस्तावित समाधान :
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(1) बैंको पर एनपीए लादने वाले प्रत्येक खाताधारी का नाम सार्वजनिक किया जाए, और उनकी सम्पत्ति को जब्त किया जाए -- मोदी साहेब ने इन शाही कर्जदारों के नाम सार्वजनिक करने से साफ़ इनकार कर दिया है और उनकी सम्पत्ति जब्त करने की कार्यवाही का भी विरोध किया है।
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(2) प्रत्येक एनपीए धारक एवं ये कर्जे देने वाले बैंक के शीर्ष अधिकारियों का नागरिको की ज्यूरी द्वारा पब्लिक में नारको टेस्ट लिया जाए, ताकि यह मालूम हो कि क्या ये कर्जे घूस खाकर दिए गए थे -- यदि भ्रष्टाचार पाया जाता है तो इनकी संपत्ति को जब्त किया जाए। अब यहाँ पर सोनिया और केजरीवाल भी मोदी साहेब के फैसले का अनुमोदन कर रहे है। ये तीनो ही उन बैंक अधिकारियों का पब्लिक में नारको टेस्ट लेने की खिलाफ है, जिन्होंने घूस खाकर मनमाने कर्जे बांटे।
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(3) अब से एक सरकारी नियंत्रण एवं स्वामित्व वाले वैकल्पिक बिट कोइन जैसे सिस्टम को लागू किया जाए, जहाँ सारे लेनदेन सार्वजनिक होंगे। इस प्रणाली की लागत बेहद कम है तथा नुकसान या फायदा यह होगा कि सभी लेनदेन सार्वजनिक हो जायेंगे एवं बैंको पर बढ़ रहे भार में कमी आएगी।
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(4) सभी राष्ट्रीयकृत बैंको का एसबीआई में विलय किया जाए, ताकि सिर्फ एक ही बैंक एसबीआई रहे।
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(5) राष्ट्रीयकृत बैंक सिर्फ घर, दवाइयां एवं शिक्षा के लिए है गैर जमानती ऋण देंगे, तथा शेष सभी कर्जे गारंटर एवं स्थायी जमाओ की प्रतिभूति की एवज में दिए जायेंगे। इससे बैंको के कर्जे डूबने ( मतलब घोटालो ) का जोखिम लगभग शून्य हो जाएगा, व आइन्दा एनपीए नहीं बढेगा।
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इसके अलावा और भी कई सुझाव है जिनसे बैंको को ठीक किया जा सकता है।
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कार्यकर्ताओ से मेरा आग्रह है कि वे सोनिया-मोदी-केजरीवाल की लपेट से बाहर आये और इन प्रस्तावों को लागू करवाने के लिए प्रयास करे।
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वरना सोनिया-मोदी-केजरीवाल के पास एनपीए बढ़ने की समस्या का बेहद आसान उपाय है --- बैंको में पैसा रखने वाले सामान्य खाता धारको को चूना लगाकर एनपीए की भरपाई करो।
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