Pawan Jury BhilwaraRj
यदि भारत में 1950 में जनमत संग्रह प्रक्रियाएं लागू कर दी जाती तो ज्यादा से भी ज्यादा संभावनाएं थी कि 1952 तक अयोध्या में राम, मथुरा में कृष्ण और काशी में विश्वनाथ देवालय का आम सहमती से निर्माण हो चुका होता।
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लेकिन तब 1950 में कोंग्रेस, संघ (*) और सीपीआई के सभी शीर्ष नेताओ की सर्वसम्मति इस बात पर ठहरी कि --- भारत में किसी भी हाल में जनमत संग्रह प्रक्रियाएं लागू नहीं की जानी चाहिए !!!
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( * संघ = संघ + बीजेपी, यानी गंगाधर = गंगाधर + शक्तिमान। और 1952 में बीजेपी को जनसंघ के नाम से जाना जाता था। )
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इन संगठनों के सभी शीर्ष नेताओ जैसे सरदार पटेल, महादुरात्मा गांधी, श्यामा प्रसाद मुखर्जी और नम्बूदिरीपाद आदि ने जनमत संग्रह प्रक्रियाओ को तब भारत के राजपत्र में प्रकाशित करने का सक्रिय विरोध किया था।
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और आज 60 साल बाद भी जनमत संग्रह के नाम से सोनिया-मोदी और केजरीवाल को बदन में चीटिंयां काटने लगती है। इसीलिए ये सब भी जनमत संग्रह प्रकियाओ को गेजेट में छापने का सर्वसम्मति से विरोध कर रहे है।
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यहाँ तक कि जब 1990 के दशक में राम, कृष्ण और विश्वनाथ मंदिर के निर्माण की मांग काफी जोर पर थी, तब भी कोंग्रेस-बीजेपी और वामियो ने जनमत संग्रह का विरोध किया !
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संघ के शीर्ष नेता और इनके अंध सेवक इस बात को अच्छे से समझते है कि यदि भारत में जनमत संग्रह प्रक्रियाएं आ जाती है तो सिर्फ एक वर्ष के भीतर ही राम-कृष्ण-विश्वनाथ देवालयो का निर्माण हो जाएगा। और इसी वजह से ये लोग 1980 से ही इस मुद्दे पर जनमत संग्रह करवाने का विरोध कर रहे है !!!
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कारण -- ये लोग इस मुद्दे को गरमा कर वोट बटोरना चाहते है, ताकि सत्ता में आकर ऊँचे पदों पर काबिज हुआ जा सके। जनमत संग्रह इनके इस अवसर को समाप्त कर देगा।
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आज राम मंदिर का आन्दोलन के बढ़ने की वजह संघ-बीजेपी नहीं है। यह मुद्दा संघ-बीजेपी द्वारा दरकिनार किये जाने के बावजूद बढ़ रहा है।
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इसके अलावा, आज संघ-बीजेपी ने कृष्ण-विश्वनाथ देवालय के मुद्दे को जनता की याददाश्त से बिलकुल बाहर कर दिया है। जैसे यह मुद्दे कभी थे ही नहीं !! 1988-1990 में कई कार्यकर्ता थे जो कृष्ण एवं काशी विश्वनाथ मंदिर निर्माण के लिए नागरिको में पर्चे बाँट रहे थे, लेकिन आज संघ के कार्यकर्ता इन दोनों मंदिरों का जिक्र करने से भी परहेज करते है !!
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मेरा बिंदु यह है कि -- यदि आप वाकई में अयोध्या में राम, मथुरा में कृष्ण एवं काशी में विश्वनाथ मंदिर निर्माण चाहते है तो सबसे पहले आपको सोनिया-मोदी-केजरीवाल-भागवत एवं कोंग्रेस-बीजेपी-आप-संघ से किनारा कर लेना चाहिए। इन लोगो से समाधान के नाम पर आपको सिर्फ बयान ही मिलेंगे। और इन मंदिरों के निर्माण के लिए भारत में जनमत संग्रह प्रक्रिया लागू करवाने के प्रयास करने चाहिए।
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