Pawan Jury BhilwaraRj

कोयला और 2G स्पेक्ट्रम घोटालो को उजागर करके कैग ने सरकार की किरकिरी कर दी थी। निदान - मोदी साहेब ने जीएसटी की ऑडिट से कैग को वंचित कर दिया है !! न रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी !!!
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१. कैग जीएसटी की सम्पूर्ण ऑडिट से वंचित

जीएसटी के पूर्ववर्ती ड्राफ्ट की धारा 65 में यह प्रावधान था कि कैग जीएसटी काउंसिल से उगाहे गए राजस्व के बारे में सूचनाएं मांग सकता है। लेकिन जीएसटी काउंसिल के अध्यक्ष अरुण जेटली और अन्य राज्यो मुखियाओं ने इस धारा को हटा दिया है। जीएसटी लगभग 15 लाख करोड़ की उगाही करेगा, लेकिन कैग द्वारा की जाने वाली इसकी ऑडिट को सीमित कर दिया गया है।
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कैग की धारा 16 एवं 18 के अनुसार कैग को यह अधिकार दिया गया है कि देश तथा राज्य सरकारों द्वारा उगाहे गए सभी प्रकार के राजस्व एवं प्राप्तियों का अंकेक्षण करेगा। किन्तु जेटली एवं मोदी साहेब नहीं चाहते कि कैग को जीएसटी की सम्पूर्ण ऑडिट का अधिकार दिया जाए।
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http://www.livemint.com/Politics/tz7odZ6Ci2vBu3hOn2VakK/CAG-wants-provision-in-GST-law-to-seek-any-information-for.html
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२. जीएसटी-एन भी कैग की ऑडिट से बाहर

जीएसटी द्वारा प्राप्त राजस्व के निर्धारण व उगाही के लिए जिस कम्प्यूटर नेटवर्क की आवश्यकता होगी, इस नेटवर्क को बनाने, चलाने का ठेका जिस कंपनी को दिया गया है, उस कंपनी को भी कैग की ऑडिट से पूरी तरह से बाहर कर दिया है। 4000 करोड़ की इस कंपनी का नाम जीएसटी-एन है, और इसमें निजी कंपनियों की हिस्सेदारी 51% है !! यह कंपनी खुद सर्विस टेक्स चोरी की जाँच का सामना कर रही है और वित्त मंत्रालय ने इस कंपनी को कैग की ऑडिट के दायरे में रखने से इनकार कर दिया है।
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http://indianexpress.com/article/business/economy/gstn-rejects-cags-request-to-name-auditor-do-an-extra-audit-4516856/
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http://www.business-standard.com/article/economy-policy/gstn-s-it-infra-firm-under-scrutiny-for-tax-evasion-117021800491_1.html
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समाधान - कैग के मुखिया की नियुक्ति करने का अधिकार फिलहाल केंद्र सरकार के पास है और सरकार के घाटालों को पकड़ने का काम कैग ही करता है। अतः इसके मुखिया को चुनने और नौकरी से निकालने का अधिकार नागरिको के पास होना चाहिए। वर्ना कैग ऑडिट करेगा, घोटाले पकड़ेगा और उजागर न करने के एवज में सरकार एवं नेताओ से घूस खायेगा। साथ ही प्रधानमंत्री को रिकॉल करने के अधिकार नागरिको के पास होना जरुरी है, ताकि प्रधानमंत्री एवं वित्त मंत्री कैग को ऑडिट से वंचित करने की बदमाशी नहीं कर सके। राईट टू रिकॉल कैग व जूरी प्रणाली आने से कैग ईमानदारी से कार्य करते हुए सरकार के घोटालो पर नजर रखेगा।
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