Pawan Jury BhilwaraRj

राईट टू रिकॉल सांसद ---- वरुण गांधी Vs राईट टू रिकॉल ग्रुप
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वरुण गांधी ने राईट टू रिकॉल सांसद के लिए निजी बिल लोकसभा में प्रस्तुत करने का प्रस्ताव किया है। किन्तु उनकी मंशा देश में राईट टू रिकॉल कानूनों को लागू करने की नहीं है। इसीलिए उन्होंने एक बेहद ही कमजोर व नकारात्मक राईट टू रिकॉल सांसद का क़ानून प्रस्तुत किया है। निचे राईट टू रिकॉल ग्रुप द्वारा प्रस्तावित एवं वरुण गांधी द्वारा प्रस्तावित क़ानून ड्राफ्ट के बीच तुलनात्मक विवरण रखा गया है, ताकि नागरिक असली राईट टू रिकॉल और फर्जी राईट टू रिकॉल में अंतर कर सके।
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(१) सांसद को रिकॉल करने के लिए प्रक्रिया कब शुरू की जा सकेगी ?
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वरुण गांधी का प्रस्ताव :

78C. (1) Any elector of a particular constituency, may, if not satisfied with the
performance of elected member of that constituency, file a recall petition, signed by not
less than one-fourth of the total number of electors of that constituency, with the
Speaker in such manner as may be prescribed.
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यदि किसी क्षेत्र का मतदाता सांसद को रिकॉल करना चाहता है तो उसे एक रिकॉल याचिका दायर करनी होगी। यह आवश्यक है कि इस याचिका में उस संसदीय क्षेत्र के कुल मतदाताओ के कम से कम 25% मतदाताओ के हस्ताक्षर होने चाहिए।
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दोष - किसी संसदीय क्षेत्र में लगभग 16 से 20 लाख मतदाता हो सकते है। अतः रिकॉल पिटीशन के लिए किसी व्यक्ति को 4 लाख मतदाताओ के हस्ताक्षर इकट्ठे करने होंगे। ऐसा किया जाना व्यवहारिक नहीं है। क्योंकि किसी सामान्य व्यक्ति के पास इतना समय, इतना पैसा और इतनी ऊर्जा नहीं होती कि वह इतने लोगो के पास जाकर हस्ताक्षर इकट्ठे कर सके। इस दौरान यदि वह दस्तावेज खो जाता है या कट-फट जाता है तो सारी मेहनत व्यर्थ हो जायेगी।
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दरअसल इस प्रक्रिया में हस्ताक्षर इकट्ठे करने की जिम्मेदारी सरकार ने नागरिको पर डाल दी है। जबकि यह प्रक्रिया सरकारी मशीनरी द्वारा संपन्न की जानी चाहिए थी। लेकिन जानबूझ कर इस तरह की प्रक्रिया दी गयी जो कि जटिल और अव्यवहारिक है।
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राईट टू रिकॉल ग्रुप का प्रस्ताव
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(3.1) यदि कोई मतदाता पटवारी के दफ्तर आकर 3 रू शुल्क देकर सांसद पद के लिए कम से कम पांच व्यक्तियों को अनुमोदित करता है तो पटवारी उसके अनुमोदन को कंप्यूटर में दर्ज करके उसको एक रसीद देगा। पटवारी मतदाता की पहचान पत्र संख्या, तारीख, समय और अनुमोदित उम्मीदवारों के नाम भी रसीद में दर्ज करेगा।
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( 3.3 ) जिला कलेक्टर या प्रधानमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है जिससे मतदाता अपना अनुमोदन एटीएम, एसएमएस या इंटरनेट द्वारा दर्ज करवा सके।
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(3.6) जिला कलेक्टर या प्रधानमंत्री एक ऐसा सिस्टम बना सकते है जो क्रेडिट कार्ड की तर्ज पर मतदाता को उसके अनुमोदनों के बारे में एस.एम.एस द्वारा अद्यतन जानकारी देगा।
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6. ( संसद के लिए निर्देश )

यदि किसी वैकल्पिक उम्मीदवार को इतने अनुमोदन मिल जाते हैं जो कि --

(6.1) वर्तमान सांसद को पिछले चुनावों में मिले वोटों की गिनती से अधिक हो, तथा यह संख्या क्षेत्र के कुल मतदाताओ के 10% से भी अधिक हो।

अथवा

(6.2) उस चुनाव-क्षेत्र के कुल मतदाताओं के 50% से ज्यादा हो।

तथा यह अनुमोदन पदासीन सांसद के अनुमोदनों से ज्यादा हो, तो चुनाव आयुक्त अमुक संसदीय क्षेत्र में रिकॉल-पोल/रिकॉल-इलेक्शन करवाने के लिए आदेश जारी करेगा।
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गुण - मतदाता किसी भी दिन किसी पदासीन सांसद अनुमोदन रद्द कर सकता है, तथा अपनी पसन्द के किसी अन्य उम्मीदवार को अनुमोदित कर सकता है। ऐसा वह अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंम्बर से sms भेजकर या पटवारी की कचहरी में जाकर भी कर सकेगा।
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(२) किसी सांसद को कब रिकॉल किया जा सकेगा ?
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वरुण गांधी का प्रस्ताव :

(2) Subject to the provisions of sub-section (1), no process of recall of a member
shall be initiated—
(i) within a period of two years from the date of election of that member.
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किसी सांसद को चुन लिए जाने के 2 वर्ष तक रिकॉल नहीं किया जा सकेगा।
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दोष - इससे सांसद चुन लिए जाने के बाद अगले 2 वर्ष तक निरंकुश व्यवहार करेगा।
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राईट टू रिकॉल ग्रुप का प्रस्ताव : सांसद को चुन लिए जाने के बाद किसी भी दिन रिकॉल किया जा सकेगा।
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(३) रिकॉल की प्रक्रिया को स्वीकृति कौन देगा ?
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वरुण गांधी का प्रस्ताव :

78D. (1) The Speaker shall, as soon as possible, after confirming the genuineness
of the recall petition filed under section 78C refer the recall petition to the Election
Commission for verification and signing by electors of the constituency from where
the member whose recall petition has been filed got elected.
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रिकाल याचिका की वैधता सुनिश्चित करने का अधिकार लोकसभा स्पीकर को दिया गया है। यदि लोकसभा स्पीकर रिकॉल याचिका को प्रमाणिक नहीं पाता है तो वह अपने विवेकाधिकार से याचिका खारिज कर सकता है।
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दोष - लोकसभा स्पीकर की नियुक्ति सत्ताधारी पार्टी करती है, अत: वह उनका अपना आदमी होता है। इस वजह से सत्ताधारी पार्टी के किसी सांसद को रिकॉल करने की याचिका दायर की जायेगी तो स्पीकर उसे अप्रमाणिक बता कर खारिज कर देगा या उसे लंबित करके रखेगा। इस वजह से रिकॉल होगा या नहीं होगा यह लोकसभा स्पीकर यानी कि सत्ताधारी पार्टी पर निर्भर है। यदि वे चाहेंगे तो गाड़ी आगे बढ़ेगी वर्ना नहीं बढ़ेगी।
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राईट टू रिकॉल ग्रुप का प्रस्ताव : रिकॉल की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला क्षेत्र के मतदाता करेंगे।
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४) रिकॉल पोल करवाने का आदेश कौन जारी करेगा ?
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वरुण गांधी का प्रस्ताव :

78E. (1) The Election Commission shall, if safisfied about the genuineness of
signatures on the recall petition, designate one of its officials to be Chief Petition
Officer in relation to that recall petition.
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लोकसभा स्पीकर यदि याचिका को प्रमाणित पाता है तो स्पीकर यह याचिका चुनाव आयोग को अग्रेषित करेगा। चुनाव आयोग इस याचिका में दर्ज हस्ताक्षरों की प्रमाणिकता की जांच करेगा। यदि वह इस बात से संतुष्ट हो जाता है कि याचिका में दर्ज हस्ताक्षर प्रमाणिक है तो वह यह तय करेगा कि रिकॉल चुनाव आयोजित किये जाने चाहिए या नहीं।
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दोष - चुनाव आयुक्त की नियुक्ति सत्ताधारी पक्ष करता है। लोकसभा के विवेकाधिकार से निकलने के बाद याचिका को चुनाव आयोग के विवेकाधिकार क्षेत्र में डाल दिया गया है। चुनाव आयोग को यह अधिकार दिया गया है कि वह किसी याचिका में दर्ज हस्ताक्षरों को प्रमाणिक माने या नहीं। और सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि चुनाव आयोग के पास मतदाताओ के हस्ताक्षरों के नमूनों का डेटा ही नहीं है। अत: इन हस्ताक्षरों की प्रमाणिकता को जांचा ही नहीं जा सकता। यदि चुनाव आयोग चाहेगा तो वह रिकाल पोल करवाएगा और नहीं चाहेगा तो नहीं करवाएगा। फैसला चुनाव आयुक्त के विवेक पर छोड़ दिया गया है।
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राईट टू रिकॉल ग्रुप का प्रस्ताव : क्षेत्र के मतदाता बहुमत अनुमोदन का बहुमत साबित करके तय प्रक्रिया के तहत आदेश जारी करेंगे।
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(५) रिकॉल पोल का संचालन ?
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वरुण गाँधी का प्रस्ताव :

78F. Provided that the Chief Petition Officer shall not specify more than ten
places within the constituency for signing the recall petition:
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विशेष परिस्थिति के अभाव में रिकॉल-पोल के लिए चुनाव आयोग 10 से अधिक स्थलों पर मतदान केंद्र नहीं बनाएगा।
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दोष - एक संसदीय क्षेत्र में 16 से 20 लाख वोटर होते है तथा यह क्षेत्र लगभग 100 किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ होता है। शहरी क्षेत्र 10 किलोमीटर के लगभग होता है तथा शेष लोग गाँवों में निवास करते है। प्रति दस किमी पर सिर्फ एक मतदान केंद्र रखा गया है। इससे मतदाताओ की रनिंग और टाइम कोस्ट बढ़ जायेगी और मतदाता हैरान होंगे।
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राईट टू रिकॉल ग्रुप का प्रस्ताव : मौजूदा व्यवस्था के तहत बूथवार चुनाव।
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(६) मतपत्र या ईवीएम ?
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वरुण गाँधी का प्रस्ताव :

78I. (1) Every recall petition shall be signed by means of electronic voting
machines.
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रिकॉल-पोल में सिर्फ EVM का ही प्रयोग किया जाएगा।
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दोष - क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है और यह सुरक्षित नहीं है, अतः जब से देश में evm लागू हुयी है विभिन्न कार्यकर्ता समूह इन्हें हटाकर मतपत्र लाने की मांग कर रहे है। रिकॉल इलेक्शन सिर्फ एक सीट पर होता है, आसानी से मतपत्रो का प्रयोग किया जा सकता है। किन्तु धांधली के अवसर बनाये रखने के लिए evm की अनिवार्यता को रखा गया है।
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राईट टू रिकॉल ग्रुप का प्रस्ताव - मतपत्र
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(७) रिकॉल पोल के आधार पर निर्णय कैसे होगा ?

वरुण गांधी का प्रस्ताव :

(2) A recall petition of a member shall be deemed to be a successful recall petition
for the purposes of this Act, if it is signed under section 781 by electors whose number
is not less than three-fourth of the member of valid votes which that member was
polled in his election
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यदि रिकॉल-पोल में पदासीन सांसद को उतने वोटो के कम से कम 75% वोट मिल जाते है जितने वोट अमुक सांसद को पिछले चुनाव में मिले थे, तो रिकॉल पोल को सफल माना जाएगा।
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दोष - दरअसल यह धारा इस बात को सुनिश्चित करती है कि यदि सत्ताधारी पार्टी चाहेगी तो वो किसी भी सांसद को निश्चित रूप से रिकॉल करवा सकेगी। कैसे ?
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आम चुनावो में वोटिंग प्रतिशत लगभग 60% के आस पास रहता है, तथा विजयी उम्मीदवार को लगभग 30% मत मिलते है। मतलब यदि किसी क्षेत्र में कोई सांसद चुनाव जीतता है तो उसे सिर्फ 30% मतदाता ही वोट करते है, शेष 70% उसे वोट नहीं करते।
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मान लीजिये किसी संसदीय क्षेत्र p में 16 लाख वोटर है, तथा a, b, c तीन बड़ी पार्टियों के उम्मीदवार मैदान में है । मान लीजिये लगभग 60 प्रतिशत वोटिंग होती है तथा चुनाव में 10 लाख वोटर वोट करते है। a को 4 लाख वोट, b को 3.5 लाख वोट और c को 2.5 लाख वोट मिलते है। अब यदि a को रिकॉल करना है तो रिकॉल पोल में सिर्फ 3 लाख वोट की आवश्यकता होगी। ऐसी स्थिति में यदि रिकॉल पोल होता है तो b व c के वोटर आपस में मिल जायेगे और a को रिकॉल कर देंगे !!!
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चूंकि रिकॉल पोल में सांसद के पक्ष में मतदान की कोई व्यवस्था नहीं है, और सिर्फ वे ही वोट कर सकते है जो कि सांसद को हटाना चाहते है, अतः a का रिकॉल तब भी हो जाएगा जबकि शेष 10 लाख वोटर उसे सांसद बनाये रखना चाहते है !!! क्योंकि इन 10 लाख के पास सांसद को बनाये रखने के लिए वोट देने का कोई विकल्प नहीं है।
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मतलब इस ड्राफ्ट को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यदि किसी अच्छे सांसद को रिकॉल करना हो तो आसानी से तब भी किया जा सके जबकि उसके क्षेत्र के मतदाता उस सांसद को बनाये रखना चाहते है, और किसी भ्रष्ट सांसद को सिर्फ तब ही रिकॉल किया जा सकेगा जब स्पीकर यानी कि सरकार ऐसा करना चाहे।
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राईट टू रिकॉल ग्रुप का प्रस्ताव :
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7. ( चुनाव आयोग के लिए निर्देश )

रिकॉल इलेक्शन के दौरान पदासीन सांसद के नाम को मतपत्र में पहले स्थान पर रखा जाएगा, तथा उसे नामांकन पत्र दाखिल करने की आवश्यकता नहीं होगी। जिन 14 व्यक्तियों को सर्वाधिक अनुमोदन मिले है और जिन व्यक्तियों को प्राप्त अनुमोदनो की संख्या कुल मतदाताओ की संख्या के 5% से अधिक है, तो उनके नाम भी रिकॉल-इलेक्शन के मतपत्र में रखे जाएंगे। इनके अतिरिक्त अन्य किसी व्यक्ति का नाम मतपत्र में नहीं रखा जायेगा।
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8. ( चुनाव आयोग के लिए निर्देश )
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यदि किसी उम्मीदवार को इतने वोट मिल जाते है जो कि --

(8.1) वर्तमान सांसद के वोटों की गिनती से अधिक हो, तथा यह संख्या क्षेत्र के कुल मतदाताओ के 10% से भी अधिक हो।

अथवा

(8.2) उस चुनाव-क्षेत्र के कुल मतदाताओं के 50% से ज्यादा हो।

तथा यह वोट पदासीन सांसद को मिले वोटो से ज्यादा हो तो चुनाव आयुक्त अमुक व्यक्ति को सांसद घोषित करेगा तथा पदासीन सांसद को पदभार से मुक्त कर देगा।
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वरुण गांधी द्वारा प्रस्तावित क़ानून ड्राफ्ट - file:///C:/Users/HP/Downloads/RTR-Varun_Gandhi-PVTBILL_English_308_2016.pdf

राईट टू रिकॉल ग्रुप द्वारा प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट - https://mygov.in//comment/100362144
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निष्कर्ष :
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वरुण गांधी एक महाधूर्त और कपटी मनुष्य है। इन्हें पता है कि चुनाव आयोग के पास हस्ताक्षर जांचने के लिए कोई डेटा नहीं है। इसीलिए उन्होंने इस तरह की प्रक्रिया प्रस्तावित की है। वे देश में एक कमजोर राईट टू रिकॉल क़ानून लाकर नागरिको को यह सन्देश देना चाहते है कि राईट टू रिकॉल एक अनुपयोगी व्यवस्था है और इन कानूनों के आने से देश में कोई परिवर्तन नहीं आएगा। इसी निति के तहत उन्होंने ये कपट लीला की है।
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समाधान :
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यदि आप राईट टू रिकॉल ग्रुप द्वारा प्रस्तावित क़ानून का समर्थन करते है तो अपने सांसद को sms करके तथा प्रधानमंत्री को @pmo पर ट्वीट करके यह निर्देश देवें कि इस क़ानून को संसद में वोटिंग के लिए रखा जाए।
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प्रधानमंत्री को किये जाने वाले ट्वीट का प्रारूप --
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@pmo, I instruct you to put this Rtr-mp proposal in parliament - https://mygov.in//comment/100362144, sha1 - 66a7014ae31dba573d13f23d6f3b802d1a0c8f06
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और मुझे इस क़ानून का हिंदी संस्करण नेट पर नही मिल रहा है। शायद इसीलिए नहीं रखा गया है क्योंकि हिंदी में उपलब्ध होने से सब कोई इस बिल को पढ़ लेंगे और इस बिल को लाने की उनकी मंशा कार्यकर्ताओ के सामने स्पष्ट हो जायेगी। जिस किसी को मिले तो कमेंट बॉक्स में लिंक उपलब्ध कराएं।
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