Pawan Jury BhilwaraRj

"टू चाइल्ड पॉलिसी" के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
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भारत में जनसंख्या का धार्मिक असंतुलन लगातार बिगड़ रहा है। इस प्रस्तावित क़ानून के लागू होने से धार्मिक जनसंख्या में संतुलन आएगा। यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो अपने सांसद को एसएमएस द्वारा निर्देश भेजें कि इस क़ानून को संसद में वोटिंग के लिए रखा जाए।
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====ड्राफ्ट का प्रारम्भ====
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[सभी के लिए ]
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(1) यह अधिनियम गेजेट में प्रकाशित होने के 1 वर्ष बाद देश में लागू होगा।
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(2) इस अधिनियम में 'आदिवासी' शब्द से आशय ऐसे नागरिको से है, जिन्हें अनुसूचित जनजाति वर्ग में शामिल किया गया है, तथा वे शहरी विस्तार सीमा से बाहर जंगल, कबीलों या गाँवों आदि में निवास करते है।
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(3) इस अधिनियम में पिता एवं माता से आशय जैविक पिता एवं जैविक माता होने से, तथा माता-पिता से आशय जैविक माता-पिता होने से है।
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(4) इस अधिनियम में संतान शब्द से आशय है - किसी व्यक्ति का जैविक पुत्र या जैविक पुत्री।
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(5) [ प्रधानमंत्री ]
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प्रधानमंत्री भारत के 'प्रधान पंजीयक एवं जनसांख्यिकी आयुक्त' ( Registrar General and Census Commissioner of India ) की नियुक्ति एवं निलम्बन के लिए ऐसी प्रक्रिया गेजेट में प्रकाशित करेंगे जिससे देश के नागरिक अपनी स्वीकृति दर्ज करके बहुमत द्वारा जनसांख्यिकी आयुक्त को बदल सके। यह प्रक्रिया धारा-11 में वर्णित की गयी है।
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(6) संतानों की संख्या के आधार पर सरकारी अनुदान और मिनरल रोयल्टी की वितरण व्यवस्था।
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[ जनसांख्यिकी आयुक्त एवं राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी]
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6.1. मिनरल रॉयल्टी एवं सरकारी भूखंडो का किराया सीधे सेना तथा नागरिको के खाते में भेजे जाने की व्यवस्था को प्रवृत करने वाले क़ानून ड्राफ्ट ( एम आर सी एम ) के गेजेट में प्रकाशित होने के बाद प्रत्येक नागरिक को मिलने वाली मासिक रोयल्टी राशि तथा भारत/राज्य सरकार द्वारा दिए जा रहे गैस, राशन आदि को शामिल करते हुए सभी प्रकार के अनुदान/सब्सिडी आदि के वितरण में नीचे दिए गए प्रावधान लागू होंगे।

6.1a. यह राशि 33 प्रतिशत बढ़ जाएगी यदि उसके कोई बच्चा न हो।
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6.1b. यह राशि 33 प्रतिशत बढ़ जाएगी यदि उसके एक पुत्री हो।
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6.1c. यह राशि 33% 'अतिरिक्त' रूप से बढ़ जाएगी, यदि ऐसी संतान विकलांग हो।
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6.1d. यह राशि 66% बढ़ जायेगी, यदि उसके तीन पुत्रियां हो।
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6.1e. यह राशि बराबर रहेगी यदि उसके चार पुत्रियां हो।
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6.1f. यह राशि बराबर रहेगी यदि उसके एक पुत्र अथवा ( एक पुत्र, एक पुत्री ) या दो पुत्रियां हो।
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6.1g. यह राशि 33 प्रतिशत कम हो जाएगी यदि उसे ( दो पुत्रियां, एक पुत्र ) अथवा (एक पुत्री, एक पुत्र ) अथवा ( दो पुत्र ) से अधिक हो और इसमें से सबसे छोटा बच्चा कानून पास होने के एक वर्ष बाद पैदा हुआ हो।
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6.1h. यह राशि 66 प्रतिशत घट जाएगी यदि उसे ( तीन पुत्रियाँ एक पुत्र ) अथवा (दो पुत्रियाँ, दो पुत्र ) अथवा ( एक पुत्री, दो पुत्र ) अथवा ( तीन पुत्र ) अथवा ( पांच पुत्रियों ) से अधिक हो और इसमें से सबसे छोटा बच्चा कानून पास होने के एक वर्ष बाद पैदा हुआ हो।
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6.1i. यह राशि शून्य हो जाएगी यदि उसे ( चार पुत्रियाँ एक पुत्र ) अथवा ( तीन पुत्रियाँ, दो पुत्र ) अथवा ( दो पुत्री, दो पुत्र ) अथवा ( चार पुत्र ) अथवा ( छह पुत्रियों ) से अधिक हो और इसमंं से सबसे छोटा बच्चा कानून पास होने के एक वर्ष बाद पैदा हुआ हो।
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6.2. अनुच्छेद 6 की उप धारा ( 6.1g ) , ( 6.1h ) , ( 6.1i ) में दिए गए प्रावधानो में आदिवासी नागरिक को एक अतिरिक्त संतान की छूट होगी।
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(7) मताधिकार से वंचित किये जाने से सम्बंधित प्रावधान
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[ चुनाव आयुक्त ]
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7.1. ऐसे माता-पिता 15 वर्षो के लिए मताधिकार से वंचित हो जाएंगे, यदि उन्हें ( दो पुत्रियां, एक पुत्र ) अथवा (एक पुत्री, एक पुत्र ) अथवा ( दो पुत्र ) या चार पुत्रियों से अधिक हो और इसमें से सबसे छोटा बच्चा यह कानून पास होने के एक वर्ष बाद पैदा हुआ हो।
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7.2. ऐसे माता पिता 30 वर्षो के लिए मताधिकार से वंचित हो जाएंगे, यदि उन्हें ( तीन पुत्रियाँ एक पुत्र ) अथवा (दो पुत्रियाँ, दो पुत्र ) अथवा ( एक पुत्री, दो पुत्र ) अथवा ( तीन पुत्र ) अथवा ( पांच पुत्रियों ) से अधिक हो और इसमें से सबसे छोटा बच्चा यह कानून पास होने के एक वर्ष बाद पैदा हुआ हो।
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(8) राजकीय सेवा से वंचित किये जाने के लिए प्रावधान
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[ प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री ]
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ऐसे माता-पिता केंद्र व राज्य शासन में तथा इनके अधीन संचालित किसी भी राजकीय विभाग में राजकीय सेवक के रूप में अपने पद पर नहीं बने रह सकेंगे व नियुक्त नहीं किये जा सकेंगे, यदि उन्हें ( दो पुत्रियां, एक पुत्र ) अथवा (एक पुत्री, एक पुत्र ) अथवा ( दो पुत्र ) या चार पुत्रियों से अधिक हो और इसमें से सबसे छोटा बच्चा यह कानून पास होने के एक वर्ष बाद पैदा हुआ हो।
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(9). कारावास से दंडनीय प्रावधान
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9.1. यह अनुच्छेद एवं इसकी धाराओ के अन्य प्रावधान आदिवासी नागरिको पर लागू नहीं होंगे।
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9.2. ऐसे पिता को 3 वर्ष तक के कारावास व जुर्माने द्वारा तथा ऐसी माता को 1 वर्ष तक के कारावास से दण्डित किया जाएगा -

क) जिसकी संतान तीन से अधिक हो तथा इनमे से प्रथम तीन संतानो में कम से कम एक पुत्र हो।
ख) जिसकी संतान चार से अधिक हो, तथा इनमे से प्रथम चार संतानो में कोई पुत्र नहीं हो।
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9.3. धारा ( 9.2 ) के तहत दोषी पिता को कारावास तब तक नही भेजा जाएगा जब तक कि उसकी सबसे छोटी संतान की आयु 4 वर्ष न हो जाए।
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9.4. धारा ( 9.2 ) के तहत दोषी माता को कारावास तब तक नही भेजा जाएगा जब तक कि उसकी सबसे छोटी संतान की आयु 14 वर्ष न हो जाए।
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9.5. इस क़ानून के गेजेट में प्रकाशित होने के 3 वर्ष बाद ऐसे पिता को 3 वर्ष तक के कारावास व जुर्माने द्वारा तथा ऐसी माता को 1 वर्ष तक के कारावास से दण्डित किया जाएगा -

अ) जिसकी संतान दो से अधिक हो तथा इनमे से प्रथम दो संतानो में कम से कम एक पुत्र हो।
ब) जिसकी संतान तीन से अधिक हो, तथा इनमे से प्रथम तीन संतानो में कोई पुत्र नहीं हो।

9.6. धारा ( 9.5 ) के तहत दोषी पिता को कारावास तब तक नही भेजा जाएगा जब तक कि उसकी सबसे छोटी संतान की आयु 4 वर्ष न हो जाए।
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9.7. धारा ( 9.5 ) के तहत दोषी माता को कारावास तब तक नही भेजा जाएगा जब तक कि उसकी सबसे छोटी संतान की आयु 14 वर्ष न हो जाए।
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(10) मुकदमो के निपटान के लिए ज्यूरी प्रक्रिया
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[ मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री एवं ज्यूरी प्रशासक ]
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10.1. मुख्यमंत्री 'जिला ज्यूरी प्रशासक' की नियुक्ति एवं निलम्बन के लिए ऐसी प्रक्रिया गेजेट में प्रकाशित करेंगे जिससे अमुक जिले के नागरिक अपनी स्वीकृति दर्ज करके बहुमत द्वारा जिला ज्यूरी प्रशासक को बदल सके।
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10.2. किसी भी प्रकार के विवाद व मुकदमे की स्थिति में सुनवाई नागरिको की ज्यूरी द्वारा की जायेगी तथा यह ज्यूरी ही फैसला देगी। ज्यूरी मंडल में 50 नागरिक होंगे, जिनका चयन अमुक जिले की मतदाता सूची में से अक्रमत ( रेंडमली ) रूप से किया जाएगा।
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10.3. यदि अमुक राज्य के मतदाता बहुमत से यह फैसला करते है कि अमुक राज्य में स्थित किसी जिले के किसी या सभी मुकदमो का स्थानांतरण अमुक राज्य के अन्य किसी जिले में किया जाना चाहिए तो, ऐसे मुकदमे निर्दिष्ट जिले में हस्तांतरित कर दिए जाएंगे।
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10.4. यदि देश के मतदाता बहुमत से यह फैसला करते है कि अमुक राज्य के किसी या सभी मुकदमो का स्थानांतरण किसी अन्य राज्य में किया जाना चाहिए तो ऐसे मुकदमे निर्दिष्ट राज्य में हस्तांतरित कर दिए जाएंगे।
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(11) प्रधान जनसांख्यिकी आयुक्त की नियुक्ति एवं निलम्बन के लिए राईट टू रिकॉल-जनसांख्यिकी आयुक्त के प्रावधान
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11.1. [ कलेक्टर ]
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यदि भारत का कोई नागरिक मतदाता भारत का जनसांख्यिकी आयुक्त बनना चाहता है, तो वह जिला कलेक्ट र के समक्ष स्वयं अथवा किसी वकील के जरिए एफिडेविट प्रस्तुत कर सकता है। कलेक्टर सांसद के चुनाव के लिए जमा की जाने वाली वाली धन राशि के बराबर शुल्क लेकर जनसांख्यिकी आयुक्त पद के लिए उसकी दावेदारी स्‍वीकार कर लेगा, और उस उम्मीदवार का नाम प्रधानमंत्री वेबसाईट पर रखेगा।
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11.2. [ पटवारी ]
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यदि जिले का कोई नागरिक मतदाता पटवारी के कार्यालय में स्वयं जाकर 3 रूपए का भुगतान करके अधिक से अधिक 5 व्यक्तियों को जनसांख्यिकी आयुक्त के पद के लिए अनुमोदित करता है, तो तलाटी उसके अनुमोदन को कम्प्यूटर में दर्ज करेगा और उसके अनुमोदन को वोटर आई डी नंबर, दिनांक, समय, और जिन व्यक्तियों के नाम उसने अनुमोदित किए है, के साथ साथ दर्ज करके रसीद देगा ।
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11.3. [ पटवारी ]
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पटवारी नागरिकों की पसंद/प्राथमिकता को प्रधानमन्त्री के वेबसाइट पर उनके वोटर आईडी नंबर और उसकी प्राथमिकताओं के साथ रखेगा।
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11.4. [ पटवारी ]
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यदि कोई नागरिक अपना अनुमोदन रद्द करने के लिए आता है तो पटवारी उसके एक या अधिक अनुमोदनों को बिना कोई शुल्क लिए बदल देगा।
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11.5. [ मंत्रिमंडल सचिव ]
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प्रत्येक महीने की पांचवी तारीख को मंत्रिमंडल सचिव प्रत्येक उम्मीादवार की अनुमोदनो की गिनती प्रकाशित करेगा ।
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11.6. [ प्रधानमंत्री ]
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यदि किसी उम्मीदवार को सभी रजिस्टर्ड मतदाताओं के 35 प्रतिशत से ज्यादा मतदाताओं ( केवल वे मतदाता ही नहीं जिन्होंने अपना अनुमोदन फाइल किया है, बल्कि सभी दर्ज मतदाता ) का अनुमोदन मिल जाता है, और यदि यह अनुमोदन पदासीन जनसांख्यिकी आयुक्त से 1% अधिक है, तो प्रधानमंत्री वर्तमान जनसांख्यिकी आयुक्त को पद से हटा सकते है, या उन्हें ऐसा करने की जरूरत नहीं है। इस सम्बन्ध में प्रधानमंत्री का निर्णय अंतिम होगा ।
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(12) जनता की आवाज
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12.1. [ कलेक्टर ]
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यदि कोई नागरिक इस कानून में किसी प्रकार का बदलाव चाहता है तो वह जिलाधीश के कार्यालय में जाकर शपथ पत्र जमा करा सकता है,और जिलाधीश या उसका क्लर्क उस शपथ पत्र को 20 रूपए प्रति पृष्ठ का शुल्क लेकर नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर स्कैन करके रखेगा ताकि कोई भी नागरिक इस शपथ पत्र को बिना लॉग-इन देख सके ।
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12.2. [ पटवारी ]
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यदि कोई नागरिक इस कानून या इसकी किसी धारा के विरूद्ध अपना विरोध दर्ज कराना चाहता है अथवा वह ऊपर की धारा में प्रस्तुत किसी शपथपत्र पर हां/नहीं दर्ज कराना चाहता है तो वह अपने वोटर आई कार्ड के साथ पटवारी के कार्यालय में आकर 3 रूपए का शुल्क देगा। पटवारी नागरिक की हां/नहीं दर्ज कर लेगा और उसे एक रसीद देगा। नागरिक की इस हां/नहीं को पटवारी वोटर आई.डी. नंबर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर रखेगा।
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=====ड्राफ्ट की समाप्ति=====