Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate
Pawan Jury BhilwaraRj:
यूपी, उत्तराखंड एवं पंजाब विधानसभा में चुनाव लड़ने के इच्छुक कार्यकर्ताओ के लिए
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देश की सभी समस्याएँ राजनैतिक होती है तथा चुनाव राजनीति की मुख्य धारा है, अत: चुनाव लड़ना यह सुनिश्चित करता है कि कार्यकर्ता अपने लक्ष्य को लेकर गंभीर है। चुनावी मौसम में सभी राजनैतिक पार्टियाँ, नेता, राजनैतिक कार्यकर्ता आदि नागरिको के बीच जाते है, पेड मिडिया द्वारा बड़े पैमाने पर खबरों को कवर किया जाता है तथा नागरिक भी राजनैतिक सूचनाओं को ग्रहण करने को उत्सुक होते है। राजनैतिक विमर्श चरम पर होने से जो कार्यकर्ता चुनाव लड़ते है वे बहुत कम समय और कम मेहनत में अपनी बात ज्यादा से ज्यादा नागरिको तक पहुंचा सकते है।
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यूपी, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर एवं गोवा में 5 फरवरी से 8 मार्च के बीच विधानसभा चुनाव लडे जाने है। मतगणना 11 मार्च को होगी। मेरा सुझाव है कि जो भी कार्यकर्ता देश की विभिन्न समस्याओं का समाधान करने के लिए आवश्यक कानूनी ड्राफ्ट की जानकारी नागरिको तक पहुंचाना चाहते है और यदि वे "चुनाव लड़ने के स्थिति" में है तो उन्हें अवश्य चुनाव लड़ना चाहिए।
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संभावित चुनावी प्रतिभागियों के लिए कुछ सामान्य सूचनाये
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1. यदि उमीदवार का नाम अमुक राज्य की मतदाता सूची में नहीं है तो उम्मीदवारी प्रस्तुत नहीं की जा सकती है। आशय -- यदि आप उत्तर प्रदेश की किसी विधानसभा से चुनाव लड़ना चाहते है तो यह जरुरी है कि आपका नाम उत्तर प्रदेश की किसी न किसी विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज हो।
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2. यदि उम्मीदवार का नाम किसी राज्य की विधानसभा सीट में दर्ज है और वह उसी राज्य की अन्य विधानसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहता है तो वह ऐसा कर सकता है। किन्तु इसके लिए उम्मीदवार को उस विधानसभा क्षेत्र के कलेक्टर कार्यालय से इस आशय का प्रमाण पत्र निकलवाना होगा कि वह अमुक विधानसभा क्षेत्र का मतदाता है।
स्पष्टीकरण :
मान लीजिये छंगा मल कानपुर क्षेत्र के मतदाता है, तथा वे लखनऊ विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ना चाहते है। पर चूंकि लखनऊ क्षेत्र की मतदाता सूची में छंगा मल का नाम नहीं है तथा लखनऊ के चुनाव अधिकारी को यह जानकारी नहीं है कि छंगा मल का नाम कानपुर क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज है। अत: छंगा मल यदि लखनऊ विधानसभा से चुनाव लड़ना चाहते है तो उन्हें पहले कानपुर कलेक्टर कार्यालय में जाकर एक प्रमाण पत्र लेना होगा, जो यह पुष्टि करता हो कि छंगा मल का नाम कानपुर विधानसभा क्षेत्र में दर्ज है। यह प्रमाण पत्र लखनऊ के चुनाव अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
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3. उम्मीदवारी प्रस्तुत करने के लिए कम से कम 10 प्रस्तावको की जरूरत होती है। इन सभी प्रस्तावको के नाम अमुक विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज होने चाहिए जिस विधानसभा से उम्मीदवार चुनाव लड़ रहा है। कोई मतदाता दो उम्मीदवारों का प्रस्तावक नहीं बन सकता। तथा विवाद की स्थिति में चुनाव अधिकारी उम्मीदवार को यह आदेश कर सकता है वह भौतिक सत्यापन के लिए अपने प्रस्तावको को प्रस्तुत करे। इसीलिए उम्मीदवार को चाहिए कि वह अपने भरोसे के प्रस्तावक चुने।
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4. फॉर्म में प्रस्तावको तथा खुद के सभी नाम-पते आदि विवरण हूबहू वही दर्ज करने चाहिए जैसे कि मतदाता सूची में दर्ज है। अन्यथा चुनाव अधिकारी आवेदन को निरस्त कर सकता है।
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5. आवेदन में कोई भी कोलम/खाना खाली न छोड़े। वरना आवेदन निरस्त किया जा सकता है। जो खाने खाली है, उनमे not applicable आदि लिख दे।
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6. एक व्यक्ति किसी राज्य के दो विधानसभा क्षेत्रो से उम्मीदवारी प्रस्तुत कर सकता है, और दो जगह से एक साथ चुनाव लड़ सकता है।
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जो कार्यकर्ता चुनाव लड़ने के इच्छुक है उन्हें चाहिए कि आवेदन का फॉर्म डाउनलोड करे तथा उसे भरकर अपनी फेसबुक प्रोफाइल पर स्केन करके रखे। ताकि यदि उसमे कोई अशुद्धि पायी जाती है तो उसे ठीक किया जा सके।
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उम्मीदवारों से अपेक्षा की जाती है कि वे फॉर्म भरने के बाद नागरिको को जानकारी देने के उद्देश्य से पेम्फलेट/पत्रिकाएँ छपवाए तथा नागरिको में इन्हें वितरित करे। इन पर्चो में उन कानून ड्राफ्ट की जानकारी अवश्य होनी चाहिए जिन कानूनों के गेजेट में प्रकाशित होने से भारत में व्याप्त समस्याओ का समाधान किया जा सके।
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