Pawan Jury BhilwaraRj
सारी "नक़दी" बैंकों में जा रही है । सारी की सारी । लेकिन हमारे बैंक तेज़ी से बहुराष्ट्रीय कम्पनियों व बैंकिंग माफ़िया के नियंत्रण में जा रहे है ।
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बैंकों की हालत ख़राब है । उनका एन पी ए बढ़ रहा है । टाट उलटने की तैयारी है । ये एन पी ए बढ़ा, क्योंकि बेंको ने घूस खाकर उच्च वर्ग को बेतहाशा क़र्ज़े दिए । और जब बेंको के पास पैसा नही बचा तो लोग क़तार में खड़े होकर पैसा जमा करवा रहे है । बेंको की तिज़ौरी भर चुकी है, अतः जो रुपया हम जमा कर रहे है वे फिर से उन्हें लुटाएँगे ।
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निजी क्षेत्र के बेंको में 74% एफ डी आइ है, तथा हमारे बेंक लगातार घाटा बना रहे है । घाटे का बहाना पब्लिक सेक्टर के बेंको को भी विदेशियों के हाथो में भेज देगा । फ़िलहाल इसकी सीमा 20% है, जिसे बढ़ाकर 49 किए जाने पर विचार किया जा रहा है ।
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सभी प्रकार के लेन देन सरकार की नज़र में रहे, ये अच्छी बात है । क्योंकि इससे एक तो कर चोरी की सम्भावनाएँ घट जाती है, दूसरे वित्तीय अपराधों में कमी आती है । लेकिन यदि हमारे बेंक ही हमारे नियंत्रण में न हो तो हम ख़ुद को कैसे बचाएँगे !!
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