Pawan Jury BhilwaraRj
सरकार ने राजपत्र अधिसूचना जारी की है कि, --- अब से 500/1000 के पुराने नोट नहीं चलेंगे तथा इन्हें 2000 व 500 के नए नोटों से बदल दिया जाएगा। रद्दोबदल के इस फैसले से उत्पन्न होने वाले प्रभाव :
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१. आम नागरिको के साथ साथ काले धन का संग्रहण करने वालो को भी अपने पुराने नोटों को नए नोटों में बदलवाना होगा, अतः उन्हें कम से कम 15 से 20% की चपत लगेगी। मतलब, यदि किसी व्यक्ति के पास 10 करोड़ का काला धन है तो जोड़तोड़ के बाद उसे नए नोट 8 करोड़ तक के ही मिल सकेंगे। 20% की इस कटौती के लाभार्थी निम्न मध्य वर्ग के लोग, सर्राफे, मंदिर-मस्जिद-चर्चो के ट्रस्टी और सी ए होंगे। इस तरह काले धन की इस २०% राशि का रिसाव अमीर तबके से निचले तबके की और हो जायेगा। इससे अमीर लोगो की अमीरी 20% से घटेगी और वंचित तबका लगभग 15% समृद्ध हो जाएगा।
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२. विदेशो में जमा काले धन को वापिस लाने के मुद्दे को भुला दिए जाने की पूरी संभावनाए है। इससे स्वामी रामदेव और बीजेपी को राहत मिलेगी।
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३. इस तथ्य के मद्देनजर कि फैसला बीजेपी सरकार ने किया है, इस सम्भावना से इंकार नहीं किया जा सकता कि बीजेपी के "शीर्ष" नेता अपने पुराने नोटों को पहले ही सोने में बदल चुके होंगे तथा अब बढ़े हुए दामो में सोना बेचकर फिर से नए नोट ले सकने के कारण यूपी चुनावों के लिए खर्च करने के लिए उनके पास पर्याप्त धन होगा जबकि सपा, बसपा, कोंग्रेस आदि को नकदी की कमी से जूझना पड़ सकता है। विपक्षी पार्टियों की ताकत घटेगी जबकि यूपी चुनावों में बीजेपी की नकदी खर्च करने की ताकत बढ़ जायेगी।
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४. नए नोट ज्यादा सुरक्षित है अत: आतंकवादियों और नकली नोट रैकेट चलाने वालो को गंभीर वित्तीय नुकसान उठाना पड़ेगा। साथ ही चलन में आयी नकली करेंसी भी बाजार से बाहर हो जायेगी।
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५. 5-7 साल बाद स्वामी रामदेव फिर से 2000 के नोटों को बंद करवाने के लिए एक और मुहीम चलाकर नए प्रधानमंत्री से 5000 के नोट चलवा सकेंगे।
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६. काले धन की अर्थव्यवस्था सोने में शिफ्ट होने से सोने का आयात बढेगा, जिससे भारत का विदेशी मुद्रा का कोष सूखेगा। लेकिन इससे एक लाभ यह होगा कि नागरिक सोने में निवेश करेंगे, जो कि नोटों की तुलना में एक अच्छा निवेश है। हालांकि सोने के आयात और कीमते बढ़ने से सोने की तस्करी भी बढ़ेगी।
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७. बीजेपी पेड मिडिया की सहायता से देश के नागरिको को यह समझाने में सफल होती दिखाई देती है कि, जिन लोगो के पास भी काला धन है वे सभी बर्बाद हो चुके है !! अत: यह धारणा बनने के कारण यूपी चुनावों में बीजेपी के वोट बढ़ेंगे।
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८. देश में काले धन की अर्थव्यवस्था का अधिकाँश निवेश जमीनों और सोने में है। सोने में ये निवेश और भी बढ़ जाएगा, और जमीनों में भी बढ़ेगा। चूंकि आने वाले समय में लोग नकदी की तुलना में जमीनों और सोने में ही ज्यादा निवेश करेंगे, अतः काले धन की अर्थव्यवस्था और भी ज्यादा सुरक्षित और स्थायी बनेगी।
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९. हालांकि अमीर वर्ग पहले से ही अपना पैसा देश से बाहर निवेश करता है, लेकिन अब वे निवेश को और भी सुरक्षित बनाने के लिए अपना पैसा और भी देश से बाहर ही निवेश करेंगे। इससे रुपया गिरेगा, डॉलर मजबूत होगा।
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१०. यदि इस सारे उलटफेर से जमीनों की कीमतों में कमी आती है तो रोजगार बढ़ेगा, कीमते घटेगी और अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, यदि जमीनो की कीमते वही बनी रहती है तो इस कदम से अर्थव्यवस्था में कोई स्थायी सुधार नहीं आएगा। और यदि जमीनों की कीमतें और भी बढ़ जाती है तो सब तरफ से ही नुकसान है।
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११. काला धन सरकारी पदों/नेताओ में व्याप्त भ्रष्टाचार, फिजी/सिंगापुर/मॉरीशस जैसे रुट के कारण जनरेट होता। प्रतिगामी करो, प्रजा शोषक व्यवस्था और चोट्टी सरकारों के कारण लोग करो की चोरी करते है, मतलब सरकार को कर देना, पैसे को पानी में फेंकने के बराबर समझते है। और जमीनों के स्वामित्व के रिकॉर्ड सार्वजनिक न होने के कारण जमीनों में इसे निवेश करते है। काले धन को सफ़ेद बनाने के लिए एनजीओ 80G, 35AC जैसी कर राहतो का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करते है। जब तक इन व्यवस्थाओ को सुधारने के लिए आवश्यक क़ानून पास नहीं किये जाते तब तक काला धन जनरेट होता रहेगा, जमा होता रहेगा और इसका निवेश भी जमीनों, सोने और नकदी में होता रहेगा।
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हालांकि, कितने पुराने नोट बाहर हुए, कितना काला धन नए नोटों में बदल दिया गया, कितने नकली नोट चलन से बाहर हुए, सरकार को कितनी बचत/आय हुई, अर्थव्यवस्था को कितना नफा/नुकसान हुआ आदि आंकड़ो के बारे में सटीक जानकारी तो 31 दिसंबर तक ही मिल सकेगी, लेकिन प्रतीत यह हो रहा है कि, इस रद्दोबदल के नजदीकी लाभ कम और दीर्घकालिक नुकसान ज्यादा है।
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