Pawan Jury BhilwaraRj
मध्य प्रदेश की जेल से सिमी आतंकियों के फ़रार होने और उनका एनकाउंटर कर दिए जाने के विषय पर :
समाधान : आतंकवाद फैलाने के सभी आरोपियों एवं पुलिस कार्यवाही के चलते मारे गए सभी मामलों की सुनवायी नागरिकों की ज्यूरी द्वारा की जानी चाहिए और इनका सार्वजनिक रूप से नार्को टेस्ट लिया जाना चाहिए ।
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1000 ईस्वी में इंग्लेंड ने यह प्रक्रिया लागू की थी कि, 'पुलिस कार्यवाही के कारण होने वाली मौतों के मामलो की सुनवाई अक्रमत ढंग से चुने गए 5-15 नागरिकों की ज्यूरी द्वारा की जाएगी' । इसे कोरोनर ज्यूरी के नाम से जाना जाता है । (अधिक जानकारी के लिए कृपया "Coronor Jury" पर गूगल करें )
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इस प्रक्रिया का इस्तेमाल अमेरिका में आज भी किया जाता है । पुलिस द्वारा की गयी कार्यवाही के कारण मृत्यु होने पर या किसी पुलिस कर्मचारी की मृत्यु हो जाने पर या इस तरह के मामलों में संदिग्ध आरोपियों के मामले का अवलोकन अक्रमत ढंग से चुने गए 5-10 नागरिकों की ज्यूरी करती है । ये नागरिक इस सम्बंध प्रश्न आदि पूछ सकते है । और यदि वे मामले के निपटान के लिए ज्यूरी ट्रायल की अनुशंसा करते है तो 12 नागरिकों की ज्यूरी मुक़दमे की सुनवायी करती है ।
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मेरे विचार में हमें भारत में भी इस प्रक्रिया को लागू करने के प्रयास करने चाहिए । किसी मृत्यु में पुलिस महकमे की संलिप्तता रहने पर सुनवायी का अधिकार नागरिकों की ज्यूरी को दिया जाना चाहिए, न कि भ्रष्ट और भाई भतीजावादी जजों को । यहाँ इस बात पर विशेष रूप से ध्यान देने की ज़रूरत है कि, सोनिया-मोदी-केजरीवाल-भागवत और इनके अंध भगत पुलिस कार्यवाही में होने वाली मौतों और यहाँ तक कि अकारण की गयी हत्याओं के मामलों में भी नागरिकों की ज्यूरी द्वारा सुनवाई किए जाने का स्पष्ट रूप से विरोध कर रहे है ।
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हाल ही में किए गए सिमी आतंकियों के एनकाउंटर के मामले में भी मैं ऊपर दी गयी प्रक्रिया द्वारा सुनवाई किए जाने का समर्थन करता हूँ ।
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हमें इस बात पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है कि, भारत की अदालतों में आतंकवादियों के मुक़दमे भी महीनो/बरसों तक घिसटते रहते है, और इसी वजह से उनके जेलों से फ़रार होने की सम्भावनाएँ बढ़ जाती है । समाधान के लिए मेरा प्रस्ताव है कि, ऐसे मामलों के त्वरित व निष्पक्ष निपटान के लिए सार्वजनिक नार्को टेस्ट और ज़ूरी प्रक्रियाएँ लागू की जानी चाहिए । अपने निहित स्वार्थों में लिप्त सोनिया-मोदी-केजरीवाल-भागवत और इनके अंध भगतो को इस बात पर शर्मिंदा होना चाहिए कि ये लोग आतंकियों के सार्वजनिक नार्को टेस्ट लिए जाने का भी विरोध करते है !!
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समाधान ?
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जो भारतीय देश में "सार्वजनिक नार्को टेस्ट" और "ज्यूरी प्रक्रियाएँ लागू करना चाहते है उन्हें भाजपा-कोंग्रेस-आप-संघ और सोनिया-मोदी-केजरीवाल-भागवत से किनारा कर लेना चाहिए, और इन क़ानूनो को गेजेट में प्रकाशित करने के प्रयास करने चाहिए ।
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