Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate

Pawan Jury BhilwaraRj:

देश कानूनो के आधार पर चलता है । सभी प्रकार के कानूनो को तोड़ने पर दंड का प्रावधान होता है । यदि क़ानून तोड़ने वालों को त्वरित दंड और पीड़ितों को निष्पक्ष न्याय मिलेगा तो ही कानूनो का महत्त्व है, अन्यथा सभी क़ानून काग़ज़ों में छपी हुयी इबारतें है । सारा मामला इस बात पर टिका हुआ है कि, दंड देने की प्रक्रिया क्या होगी और दंडनायको की नियुक्ति और निष्कासन का अधिकार किसके पास होगा ।
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१. ज्यूरी सिस्टम में दंड देने की यह शक्ति देश के नागरिकों के पास होती है ।
२. जज सिस्टम में यह अधिकार कुछ मुट्ठी भर बुद्धिजीवियों के विवेक पर छोड़ दिया जाता है ।
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अमेरिका में ज्यूरी सिस्टम जबकि चीन में जज सिस्टम होने के कारण चीन अमेरिका से तकनीक के क्षेत्र में सालों साल पिछड़ गया है, और पिछड़ता जा रहा है ।
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ब्रिटेन में १००० ईस्वी में ज्यूरी सिस्टम आया, और सोलहवीं शताब्दी तक ब्रिटेन आधी दुनिया जीत चुका था । अमेरिका में १७५० में ज्यूरी सिस्टम आया, लेकिन अमेरिका में ज्यूरी सिस्टम की प्रक्रियाएँ ब्रिटेन से मजबूत थी । मज़बूत ज्यूरी सिस्टम के कारण आज अमेरिका ब्रिटेन की तुलना में ज़्यादा मज़बूत देश बन चुका है ।
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ज्यूरी सिस्टम सबसे पहले ग्रीस में आया और इसी वजह से वे सबसे बेहतर सैन्य उपकरण बना पाए और सिकंदर दुनिया के सबसे बड़े भू भाग को जीतने में सफल हुआ । वक़्त के साथ ग्रीस में ज्यूरी सिस्टम कमज़ोर हो जाने से ग्रीस पिछड़ता चला गया ।
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ब्रिटेन में ज्यूरी सिस्टम होने व चीन में जज सिस्टम होने के कारण ब्रिटेन आज भी तकनीक के क्षेत्र में चीन से मीलों आगे है ।
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रूस, अमेरिका की तुलना में तकनीक में इसीलिए पिछड़ गया और क्योंकि रूस में ज्यूरी सिस्टम का अभाव था ।
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भारत और चीन दोनो देशों में जज सिस्टम है । किंतु भारत चीन की तुलना में इसीलिए पिछड़ गया, क्योंकि भारत की अदालतें चीन की तुलना में ज़्यादा भ्रष्ट और सुस्त है ।
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चीन में जजों की संख्या २ लाख है जबकि भारत में सिर्फ़ २० हज़ार जज है । इसके अलावा, चीन में जजों की नियुक्ति 'सिर्फ़' लिखित परीक्षा के माध्यम से होती है जबकि भारत में साक्षात्कार प्रणाली होने से नियुक्तियों में भ्रष्टाचार है ।
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उल्लेखनीय है कि, अमेरिका में ज्यूरी सिस्टम के अलावा जजों को नौकरी से निकालने का अधिकार भी नागरिकों के पास होने से अमेरिका के जजों में कम भ्रष्टाचार है ।
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अदलतो की कार्यप्रणाली का तकनीक से गहरा सम्बंध है । अदालतें जितना अच्छे से काम करेगी, उतना ही स्थानीय उद्योगों का विकास होगा, और तकनीक का सृजन होगा । तकनीक आने से देश स्वदेशी आधुनिक हथियारों का निर्माण कर सकेगा और सैन्य रूप से आत्मनिर्भर हो जाएगा । आर्थिक, धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक आदि सभी प्रकार की आज़ादी, सैन्य आत्मनिर्भरता पर टिकी होती है ।
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सबक़ यह है कि, "किसी देश को तकनिकी, आर्थिक और सैन्य दृष्टी से आत्मनिर्भर बनाने का सबसे तेज, सबसे सटीक और सबसे प्रभावी तरीका ज्यूरी सिस्टम है"
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ज्यूरी सिस्टम के लिए प्रस्तावित क़ानूनी ड्राफ़्ट, जिसे गेजेट में प्रकाशित करके भारत को अमेरिका के बराबर ताक़तवर देश बनाया जा सकता है -- https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/809746209143617
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