Pawan Jury BhilwaraRj

"युनिफोर्म सिविल कोड" के बारे में कहा जा रहा है कि इससे देश के सभी धर्मावलम्बियों पर एक समान और एक ही क़ानून लागू होगा। किन्तु इस क़ानून में क्या प्रावधान है इस बारे में अब तक किसी प्रकार का कोई विवरण उपलब्ध नहीं है। विवरण के अभाव में कार्यकर्ता इसके बारे में अलग अलग बातें कह रहे है, जिससे भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गयी है। कुछ सामान्य शंकाए नीचे रखी गयी है। कृपया युनिफोर्म सिविल कोड के समर्थक इस बारे में स्पष्टीकरण प्रस्तुत करे।
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1) कहा जा रहा है कि युनिफोर्म सिविल कोड में ईसाई धर्मावलम्बियों को कई प्रकार की छूट दी गयी है। क्या यह सही है ?
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2) ये बिल लागू होने के बाद, क्या मदरसों को दिए जा रहे अनुदान बंद किये जायेंगे या मंदिरों में भी हिन्दू छात्रों को संस्कृत की शिक्षा दी जायेगी और इसके लिए सरकार अनुदान भी देंगी ?
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3) क्या मदरसों की संपत्तियों को भी सरकार द्वारा आहरित करके उनके बदले उन्हें बांड थमाए जायेंगे या इस कोड के आने के बाद सरकार मंदिरों की संपत्ति का आहरण नहीं करेगी।
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4) क्या युनिफोर्म सिविल कोड में हिन्दूओ के अलावा मुस्लिम और ईसाई धर्म के निचले तबके को भी आरक्षण दिए जाने का प्रावधान किया गया है ?
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5) क्या हज यात्रियों को दी जा रही सब्सिडी बंद की जायेगी या सरकार चार धाम की यात्रा करने के लिए हिन्दुओ को भी सब्सिडी देगी ?
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6) क्या इस क़ानून के आने से हिन्दू वैधानिक रूप से चार पत्नियाँ रख सकेंगे ?
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समान नागरिक संहिता या कॉमन सिविल कोड बीजेपी का मुद्दा है और बीजेपी इस कानून को 1990 से ही पास करने की "कह" रही है। बीजेपी के पास इसका ड्राफ्ट भी तैयार है और इनके कई कार्यकर्ताओं के पास यह ड्राफ्ट मौजूद है। लेकिन बीजेपी के कार्यकर्ता ये ड्राफ्ट जाहिर नहीं कर रहे है। सुनने में आया है कि, मोदी साहेब ने वाजपेयी के पुराने ड्राफ्ट में कुछ बदलाव कर दिए है। हालांकि बीजेपी ने पहले भी इसका विवरण सार्वजनिक नहीं किया था, अत: मिलान करना मुश्किल है । बहरहाल जो भी है, बीजेपी कार्यकर्ताओ से आग्रह है कि वे फिलहाल के उस "युनिफोर्म सिविल कोड" का विवरण साझा करे, जिसका वे समर्थन कर रहे है। ताकि तस्वीर साफ़ हो और अन्य कार्यकर्ता भी यह तय कर सके कि इस क़ानून का समर्थन करना है या नहीं।
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