Pawan Jury BhilwaraRj
जब मोदी साहेब अमेरिका गए थे तो रेल्वे स्टेशन पर WI-FI लगाने का ठेका बीएसएनएल की जगह गूगल को दे आये थे। शायद इस वजह से भी सांसद मोदी साहेब के सम्मान में खड़े होकर तालियां बजा रहे थे। कोई निवीदा नहीं, कोई बोली नहीं। सीधे अनुबंध। किन शर्तों पर ? पता नहीं। गूगल पर मिल भी नहीं रहा। मतलब, हम रेल्वे स्टेशनों पर भी इंटरनेट अपने बूते नहीं लगा रहे है। और आपातकाल में यदि गूगल चाहे तो किसी भी समय इन्हें बंद कर सकेगा।
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खबर का लिंक -- https://goo.gl/1R9YNn
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पिछले एक साल में बीएसएनएल के इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या 2.5 करोड़ गिर चुकी है। मोदी साहेब के डिजिटल इण्डिया की योजना इस तरह की है जिसमें सरकारी कंपनियों को जान बूझकर तोडा जा रहा है और संचार के सभी माध्यम विदेशी और निजी कंपनियों के हवाले किये जा रहे है। जब हमारा सामना युद्ध की स्थिति से होगा तो संचार के लिए विदेशी कंपनियों पर टिके रहने के कारण एक दिन में ही जमा हो जाएंगे या फिर भारी कीमत चुकाएंगे।
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खबर का लिंक -- https://goo.gl/Zm3025
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समाधान ?
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हमें ऐसे कानूनों की जरूरत है जिससे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमो में व्याप्त भ्रष्टाचार और निकम्मेपन को दूर करके उनकी कार्यकुशलता को बढ़ाया जा सके। राइट टू रिकॉल सूचना एवं प्रसारण मंत्री, बीएसएनएल अध्यक्ष, प्रधानमंत्री, ज्यूरी सिस्टम, टीसीपी आदि कानूनों को गेजेट में प्रकाशित करके ऐसे शासन की रचना की जा सकती है।
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प्रस्तावित कानूनों के ड्राफ्ट इस लिंक पर देखे जा सकते है -- rahulmehta.com/301.h.htm
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