Pawan Jury BhilwaraRj
राजीव भाटिया उर्फ़ अक्षय कुमार ने कनाड़ा की नागरिकता किस ख़ुशी में ले रखी है ? मुझे पक्के तौर पर नहीं पता, लेकिन बहुत ज्यादा सम्भावना है कि अक्षय कुमार की फिल्मे देखने से भारत का विदेशी मुद्रा कोष सूख रहा है !!!
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जो भी है, हमें ऐसे "राष्ट्रवादियों" को तुरंत लात मारकर कनाड़ा रवाना करना चाहिए। ( लात मारने का प्रयोग मुहावरे के तहत किया गया है, अतः कृपया इसमें भाषाई असभ्यता न खोजे। आशय इस आदमी की फिल्मो का बायकॉट करने से है, ताकि ये महाशय अपनी शेष जिंदगी सुकून से अपने देश कनाड़ा में गुजार सके । यदि ये इतने बड़े राष्ट्रवादी नही होते तो शायद इस तरह पेश आने से बचा जा सकता था।)
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एक संभावित कारण करो में छूट प्राप्त करना है। सोनिया-मोदी-केजरीवाल द्वारा बनाये और समर्थित क़ानून के अनुसार, अमेरिका व कनाड़ा का कोई भी नागरिक कानूनी रूप से रिजर्व बैंक को अपने रुपयो के बदले डॉलर देने को कह सकता है, इन डॉलर्स को कानूनी रूप से मॉरीशस या फिजी पहुंचा कर मोरीशस रुट से कानूनन भारत में फिर से निवेश कर सकता है और इस तरह से निवेश किये गए धन से प्राप्त होने वाली आय पर उसे कोई कर नहीं चुकाने होंगे !!
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अक्षय कुमार की छवि काफी भारी भरकम राष्ट्रवादी की है। इनका और बीजेपी का राष्ट्रवाद का फार्मूला एक जैसा है --- मतलब, पहले टेक्स बचाने की तिकडम लगाओ, देश के बारे में बाद में सोचेंगे !! राईट टू रिकॉल पार्टी का नजरिया इससे बिलकुल भिन्न है। हम मानते है कि, पहले टेक्स चुकाओ, और फिर राष्ट्रवाद के बारे सोचो। और इसीलिए अधिकाँश मौजूदा राजनैतिक पार्टियों की आँखों में राईट टू रिकॉल पार्टी गहरे चुभती है।
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विकिपीडिया के अनुसार अक्षय कुमार ने एक भारतीय के रूप में अमृतसर में जन्म लिया था। बाद में उन्होंने भारत को तजकर कनाड़ा की नागरिकता ग्रहण कर ली। अक्षय कुमार फिर से भारत की नागरिकता ग्रहण कर सकते है, क्योंकि उनके स्पांसर अर्थात मिशनरीज अक्षय कुमार को 2019 में केबिनेट मंत्री के रूप में देखना चाहते है। पर आज की तारीख में वे कनाड़ा के नागरिक है।
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कारण ?
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मुझे नहीं पता। कृपया यह सवाल अक्षय कुमार से ही पूछे।
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लेकिन एक संभावित कारण होलसेल में कानूनी रूप से कर चुकाने से बचना है।
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मान लीजिए कि एक व्यक्ति कनाडा का नागरिक है । मानिये कि उसे अपनी किसी फ़िल्म से १० करोड़ की आय होती है । मान लीजिए कि वह इस आय पर ३५% टेक्स चुकाता है । तो अब यह व्यक्ति क़ानूनी रूप से RBI से 6.5 करोड़ के बदले में डॉलर चुकाने को कह सकता है। यह राशि लगभग १ मिलियन डॉलर के आस पास ठहरती है । इसके बाद यह आदमी क़ानूनी रूप से ये डॉलर मोरीशस ले जा सकता है, और क़ानूनी रूप से इस पैसे का निवेश भारत में मोरीशस रूट से कर सकता है। और अब निवेश किए गए इस पैसे से होने वाली आय पर पर इस आदमी को क़ानूनी रूप से भारत में कोई कर नही चुकाने होंगे !!!
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लेकिन यदि ये व्यक्ति भारतीय नागरिक है तो, न तो ये व्यक्ति RBI से रुपयों के बदले डॉलर माँग सकता है, न ही क़ानूनी रूप से इस पैसे को मोरीशस भेज सकता है । और यदि यह व्यक्ति भारतीय नागरिक होते हुए क़ानूनी रूप से यह पैसा मोरीशस पहुँचाता है और मोरीशस रूट के माध्यम से भारत में पुनर्निवेश करता है तो --"क़ानूनी रूप से उसे इस निवेश से होने वाली आय पर भारत में टेक्स चुकाना होगा !!!
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इसीलिए भारत के कई कारोबारी व अभिनेता अप्रवासी भारतीय का दर्जा बना कर बैठे है, तथा कई ने विदेशी नागरिकता ग्रहण कर ली है ।
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इसके अलावा यदि अक्षय कुमार अपनी फ़िल्मों में निवेश करने के लिए अपनी कनाडाई कम्पनी का इस्तेमाल कर रहे है तो, इन साहेब को फ़िल्मों से जो भी आय रूपयों में होती है, उसके बदले RBI डॉलर देने के लिए बाध्य है । तो इसीलिए मैंने कहा कि, अक्षय कुमार की फ़िल्मे देखना भारत के विदेशी मुद्रा पर बोझ को बढ़ा 'सकता' है ।
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इसके अलावा चूंकि अक्षय कुमार कनाडा ट्यूरिज़्म के एम्बेसेडर रहे है अतः वे कनाडा सरकार से अन्य लाभकारी समझौता भी कर सकते है --- मान लीजिये, यदि वे मॉरीशस/फिजी/सिंगापुर रुट से भारत में 10 मिलियन डॉलर कमाते है, तो वर्तमान क़ानून के अनुसार उन्हें भारत में इस निवेश से कमाए गए मुनाफे पर कोई कर नहीं चुकाने होंगे ( आय को पूंजीगत लाभ में परिवर्तित करने तथा कुछ बैंकिग शुल्क को छोड़ते हुए )। तो अक्षय कुमार कनाडाई सरकार से इस तरह का मामला बिठा सकते है कि, यदि वे इन डॉलर्स का निवेश कनाडा में करते है तो कनाडा सरकार उन पर कमतर कराधान लागू करेगी।
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कनाडा में टेक्स क़ानून इस तरह से है :
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यदि कोई कनाडाई कम्पनी कनाडा के बाहर मुनाफ़ा कमाती है तो इसे टेक्स सिर्फ़ तब चुकाने होते है जब ये कम्पनी अपना मुनाफ़ा कनाडा में ले आए या कम्पनी के स्वामी की मृत्यु हो (विरासत कर), जबकि अमुक कम्पनी ने अपनी आय को कनाडाई डॉलर में परिवर्तित करके इन्हें कनाडा सरकार द्वारा अनुमोदित किसी बैंक में जमा किया हो !!!
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कृपया इस बारे में अधिक जानकारी के लिए, "tax on income earned by canadian companies outside canada" पर गूगल करें ।
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अमेरिका में भी कुछ इसी तरह का क़ानून है । मान लीजिये कि एप्पल की एक सब्सिडरी इकाई मोरिशस में "एप्पल मॉरीशस" नाम से है। यदि यह इकाई भारत में निवेश करती है, तो भारत सरकार इस कंपनी द्वारा भारत में कमाए गए मुनाफे पर टेक्स नहीं लगाएगी, क्योंकि सोनिया-मोदी-केजरीवाल तथा इनके निपट अंधे "अंध भगतो" द्वारा भारत में इस तरह का क़ानून लागू किया गया है कि यदि मॉरीशस रुट द्वारा किसी कंपनी द्वारा निवेश किया जाता है तो उन्हें कोई कर नहीं चुकाने होंगे। और अमेरिका सरकार एप्पल मॉरीशस से सिर्फ तब ही टेक्स वसूल करेगी जब यह कंपनी अपना मुनाफा अमेरिका में ले जायेगी। जब तक कि एप्पल मॉरीशस अपना मुनाफा मॉरीशस में रखती है उसे अमेरिका में कोई टेक्स नहीं चुकाने होंगे, जबकि अमुक कम्पनी ने अपनी आय को अमेरिकन डॉलर में परिवर्तित करके इन्हें अमेरिकी सरकार द्वारा अनुमोदित किसी बैंक में जमा किया हो।
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तो इस प्रकार जब तक एप्पल अपने मुनाफे को डॉलर में रखेगी, इससे डॉलर का अंतरराष्ट्रीय मूल्य बढ़ता रहेगा। इस तरह से टेक्स न वसूलने के दौरान भी अमेरिका को अप्रत्यक्ष लाभ होता है।
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और आज नहीं तो कल कंपनी के स्वामी के मरने से उन पर विरासत कर लागू हो जाएगा।
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तो इस तरह से अक्षय कुमार जैसे "राष्ट्रवादी अभिनेता" एक तरफ मिशनरीज द्वारा प्रायोजित OMG जैसी फिल्में बनाकर हिन्दू धर्म की खिल्ली उड़ाते है और दूसरी तरफ इस तरह के गुन्ताड़े बना कर टेक्स बचाते है। एक साधारण कारोबारी मुनाफा बनाने के लिए इस तरह की तिकडम करे तो किंचित अवहेलना की जा सकती है, किन्तु राष्ट्रवाद के नाम पर एलान देने वाले ऐसे छद्म सुधारको की नहीं।
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समाधान ?
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समाधान यह है कि हमें अमेरिका के समान ही ऐसा कानून लागू करना चाहिए जिसके अनुसार विदेशी या भारतीय नागरिक को भारत में कमाए गए मुनाफे पर भारत में टेक्स चुकाने हो।
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सोनिया-मोदी-केजरीवाल ने हमेशा ऐसे क़ानून का विरोध किया तथा वे आज भी मॉरीशस, फिजी, सिंगापुर आदि देशो के साथ जारी ऐसी ट्रिटियों का समर्थन करते है। तथा साथ ही अपने अंध भगतो में ये झूठ भी फैलाते है कि ऐसे समझौते देश का विदेशी मुद्रा कोष बढ़ाने के लिए आवश्यक है !! सच्चाई यह है कि --- अमेरिका-ब्रिटेन के धनिक भारत के नेताओ को ये क़ानून बनाये रखने के लिए उन्हें कारगिल, कसाब तथा उड़ी जैसे हमलो के माध्यम से धमकाते है !!! और सोनिया-मोदी-केजरीवाल में इतना साहस नहीं है कि वे अपने भगतो के समक्ष इन धमकियों की सच्चाई को स्वीकार करे या उस दिशा में कदम उठाये जिससे भारत की अमेरिका-ब्रिटेन पर सैन्य निर्भरता में कमी आये।
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देश में सिर्फ राईट टू रिकॉल पार्टी ही एक मात्र पार्टी है जिसने इन घाटे के कानूनों को रद्द करने का प्रस्ताव किया है। इसके अलावा हमने ज्यूरी सिस्टम, वेल्थ टेक्स, टी सी पी, राईट टू रिकॉल आदि कानूनों का भी प्रस्ताव किया है जिन्हें लागू करके हम भारत में तकनिकी कौशल बढ़ाकर अपने स्वदेशी आधुनिक हथियारों के निर्माण की क्षमता जुटा सकते है। यदि एक एकबार हम सैन्य आत्मनिर्भरता अर्जित कर लेते है तो हमें आइंदा अमेरिका-ब्रिटेन की धमकियों को गंभीरता से लेने के आवश्यकता नहीं रह जायेगी।
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अतः मेरा आग्रह है कि यदि आपकी रुचि समाधान में है तो सोनिया-मोदी-केजरीवाल को कूड़ेदान के हवाले करे और राईट टू रिकॉल पार्टी द्वारा प्रस्तावित कानूनों को देश में लागू करवाने का प्रयास करे।
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कृपया अपने सांसद को SMS द्वारा यह आदेश भेजे कि मॉरीशस-फिजी-सिंगापुर ट्रीटी को अविलम्ब रद्द किया जाए। इस सम्बन्ध में राजपत्र अधिसूचना का ड्राफ्ट तथा भेजे जाने वाले SMS का नमूना देखने के लिए कृपया इस लिंक को देखे --- https://web.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/565918486919683
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