Pawan Jury BhilwaraRj

सर्जिकल स्ट्राइक और जनपलोकपाल ।
.
4 अप्रेल 2011 से 11 अप्रेल 2011 के बीच पेड मिडिया ने भारत में प्रचार का एक बहुत ही मारक अभियान छेड़ा था। इस अभियान के चलते पेड मिडिया के प्रायोजक भारत के लाखों कार्यकर्ताओ को यह भरोसा दिलाने में सफल रहे थे कि, -- "जनलोकपाल भारत में व्याप्त भ्रष्टाचार में भारी कमी ले आएगा और अन्ना, केजरीवाल, किरण बेदी आदि निष्पाप आत्माएं है, जिनका एक मात्र उद्देश्य भारत में जनलोकपाल क़ानून लागू करवाना है। इनकी कोई राजनैतिक महत्त्वाकांक्षाएं नहीं है।
.
(मैं उन लोगो पर ही लिखता हूँ जो किसी न किसी रूप से राजनीति या सरकार से जुड़े हुए है। अतः: मैंने किरण बेदी के खिलाफ तब से लिखना शुरू किया था जब वे राजनीति में चली आयी थी। )
.
तब मैंने कार्यकर्ताओ को यह समझाना शुरू किया था कि, "जनलोपाल ड्राफ्ट की सही जगह कूड़ेदान है, तथा अन्ना एक ख्याति-लोलुप मसखरा है। साथ ही केजरीवाल-बेदी का एक मात्र लक्ष्य सत्ता हासिल करना है व जनलोकपाल से इन्हें कोई लेना देना नहीं है"।
.
तब फेसबुक पर सैंकड़ो यूजर्स ने मेरे खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। मुझे गालियां दी गयी कोसा गया और फब्तियां कसी गयी। जिन्होंने मेरी वॉल पर अभद्र कमेंट किये मैंने उन्हें ब्लॉक कर दिया तथा उन्हें सिर्फ अनफॉलो किया जो अपनी वॉल पर मुझे कोस रहे थे। मुझे नहीं पता था कि अन्ना-केजरीवाल के ये समर्थक किस आधार पर इनके तथा जनलोकपाल ड्राफ्ट के गुणगान कर रहे है। मुझे जानने में रूचि भी नहीं थी। क्योंकि किसी को ब्लॉक करने के बाद मैं आगे बढ़ जाता हूँ। आखिर भारत में जनसंख्या 120 करोड़ है। अतः कार्यकर्ताओ की कमी नहीं।
.
लेकिन उन दिनों भी एक चीज मेरे पाले में थी जिस पर मैं निर्भर करता था --- 26 पेज का जनलोकपाल का ड्राफ्ट !!! तो जिन कार्यकर्ताओ को ड्राफ्ट पढ़ने की परवाह थी, मैं उन्हें यह बात समझा सकता था कि, जनलोकपाल का ड्राफ्ट कूड़े का ढेर है। और जब कोई ड्राफ्ट पढता तो वह यह बात आसानी से समझ जाता था कि, इस क़ानून के लागू होने से भ्रष्टाचार घटेगा नहीं बल्कि बढ़ जाएगा। और फिर, उन्हें यह समझते देर नहीं लगती थी कि, ऐसे ड्राफ्ट का समर्थन करने वाले अन्ना केजरीवाल आदि किस किस्म के व्यक्ति है।
.
तो तब कम से कम उनके पास ऐसी एक चीज तो थी जिसका इस्तेमाल मैं कर सकता था --- जनलोकपाल का ड्राफ्ट। उनके दिए गए ड्राफ्ट के आधार पर ही मैं कई कार्यकर्ताओ को यह समझाने में सफल रहा कि जनलोकपाल का ड्राफ्ट रद्दी है और अन्ना-केजरीवाल-भूषण आदि दगाबाज लोग है।
.
-----
.
आज पेड मिडिया द्वारा "सर्जिकल स्ट्राइक" को जो कवरेज दिया जा रहा है उसकी परास जनलोकपाल से कहीं ज्यादा ऊँची है। और जनलोकपाल ड्राफ्ट के उलट इस बार मेरे पास पेड मिडिया के पाले की ऐसी कोई भौतिक वस्तु या विश्वसनीय सामग्री नहीं है जिससे मैं इनके द्वारा की जा रही रिपोर्टिंग की सत्यता की पड़ताल कर सकूँ। यह पूरी रिपोर्टिंग एक तरफ़ा है, तथा दूसरे पक्ष के पास इनकी पुष्टि के लिए कोई स्त्रोत नहीं है।
.
लेकिन एक चीज जो हम कर सकते है --- सर्जिकल स्ट्राइक की तुलना कारगिल युद्ध से करे। आखिर, कारगिल के दौरान हमने सर्जिकल स्ट्राइक नहीं किया था !!!
.
इसीलिए शुरुआत इस विषय से करना बेहतर रहेगा कि, "हम उन तत्वो और कारणों को सूचीबद्ध करे, जिनके चलते हम कारगिल युद्ध के दौरान सर्जिकल स्ट्राइक करने में अक्षम रहे थे किन्तु आज सक्षम हो गए है !!!
.
___________________