Pawan Jury BhilwaraRj
कुछ ही समय में यदि नागरिकों का एक वर्ग गौ रक्षा के प्रति उदासीन हो जाए तो आश्चर्य नही होना चाहिए । क्योंकि गौ वंश ने सड़कों पर पूरी तरह से क़ब्ज़ा कर लिया है, और इससे नागरिकों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है ।
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अन्य राज्यों का हाल मुझे पता नही । लेकिन राजस्थान में सड़कों पर हर तरफ़ गायें बैठी दिखायी दे रही है । इक्का दुक्का नही । बल्कि उनके पूरे पूरे के झुंडो ने सड़कों को अपना ठिकाना बना लिया है । राजमार्ग से लेकर शहरों के मुख्य मार्गों और गलियों तक । सभी जगह । वाहन चलाने वालों को बहुत समस्या का सामना करना पड़ रहा है, और एक्सीडेंट्स भी हो रहे है, क्योंकि सड़कों पर गाएँ पसरी हुयी है ।
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मौसमी वजह यह है कि, बारिश के चलते कच्ची ज़मीन निरंतर ग़ीली बनी हुयी है, जबकि सड़कें जल्दी सूख जाती है । अतः सूखे में बैठने के लिए गायों ने सड़कों पर आश्रय ले लिया है ।
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राजनीतिक वजह यह है कि --- सरकार चाहती है कि गाएँ और गौ रक्षक नागरिकों की आँखों में चुभने लगे । यदि नागरिकों को गाये मुसीबत की तरह दिखने लगेंगी तो वे इन्हें बचाने की मुहिम के प्रति उदासीन हो जाएँगे ।
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आवारा पशुओं को प्रबंधित करने तथा नागरी यातायात को समुचित बनाए रखने की ज़िम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की है, तथा पशु कल्याण अधिकारी गायों के रख रखाव के लिए उत्तरदायी है । यदि शहर के नागरिकों को ऐसी प्रक्रिया मिल जाए जिससे वे सभापति/मेयर तथा पशु कल्याण अधिकारी को नौकरी से निकाल सकें, तो इन अधिकारियों को अपनी नौकरी बचाने के लिए आवश्यक क़दम उठाने पड़ जाएँगे ।
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इसीलिए मोदी साहेब ने इन अधिकारियों पर राइट टू रिकॉल प्रक्रियाओं को लागू करने से मना कर दिया है । इसके अलावा मोदी साहेब ने भाजपा शासित राज्यों के सभी मुख्यमंत्रियो को भी ऐसे आदेश दिए है कि, वे गौ हत्या को रोकने और इनके आवास की समुचित व्यवस्था करने के लिए आवश्यक क़ानून को गेजेट में प्रकाशित न करें । और सभी मुख्यमंत्री मोदी साहेब के आदेश का पालन कर रहे है ।
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जितना ही गाय समस्या के रूप में बनी रहती है, भाजपा को उतना ही लाभ होता है । पहले वे इन्हें बचाने के नाम पर नागरिकों से वोट इकट्ठा करते है, और सत्ता में आकर क़त्लखानो की सब्सिडी जारी रखते है, कटवायी की मशीनों का आयात शुल्क घटा देते है, क़त्लखानो से भारी मात्रा में चंदे लेते है, गौ रक्षको को गुंडा बताते है, माँस का निर्यात लगभग दो गुना कर देते है, और उन सभी कानूनो का विरोध करते है जिससे गौ वंश को संरक्षित किया जा सके । अब गौ वंश को सड़कों से हटाने की जगह भाजपा शायद गायों के सिंगो पर रेडियम लगाने की योजना पर विचार कर रही है !!
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इस तरह से भाजपा इस देश में एक मात्र और सबसे बड़ी पार्टी है जिसने गायों के नाम पर वोट, नोट और माँस का सबसे ज़्यादा दोहन किया है । आम नागरिक को गाय सिर्फ़ दूध ही देती है, लेकिन भाजपा ने इसे एक बड़े कारोबारी ब्राण्ड में बदल दिया है । और मोदी साहेब इस कारोबार के सबसे बड़े व्यवसायी है ।
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कोंग्रेस ने हमेशा से ही गौ हत्या रोकने के कानूनो का विरोध किया । भाजपा ने इसे एक मौक़े की तरह लिया और इस मुद्दे पर वोट खींचे । लेकिन सत्ता में आकर भाजपा ने इस कारोबार पर क़ब्ज़ा कर लिया है । आम आदमी पार्टी का रूख इस विषय पर बिलकुल साफ़ है । उनका स्पष्ट कहना है कि, "हमारे एजेंडे में गाएँ शामिल नही है । कटे या बचे । हमें कोई सरोकार नही"।
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सभी गौ भक्तों और नागरिकों से आग्रह है कि, यदि वे गायों को बचाना चाहते है तो किसी पार्टी या नेता का समर्थन करने की जगह सरकार से उन कानूनो की माँग करें जिससे गौ वंश का समुचित प्रबंध हो और उनकी कटवायी रोकी जा सके ।
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राइट टू रिकॉल पार्टी ने इस समस्या के समाधान के लिए क़ानून ड्राफ़्ट प्रस्तावित किया है । यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो अपने क्षेत्र के विधायक को sms द्वारा आदेश भेजे कि, इसे गेजेट में प्रकाशित किया जाए ।
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गोहत्या कम करने के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
www.facebook.com/pawan.jury/posts/822256167892621
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